नशे की पहली सीढ़ी है सिगरेट, जरूरत है इस पर ही कदम न रखें

-बांग्‍लादेश के डॉ अजीज-उर-रहमान ने कहा, दक्षिण एशियाई क्षेत्र के देशों को मिलकर करने चाहिये प्रयास
डॉ अजीज-उर-रहमान

धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना

लखनऊ। ढाका बांग्लादेश में रहने वाले ढाका यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मोहम्मद अजीज उर रहमान का मानना है कि‍ युवावस्‍था में नशे की लत की शुरुआत सिगरेट से होती है जो कि बाद में दूसरे नशों तक पहुंच जाती है,  इसलिए अगर कुछ ऐसा हो कि युवा सिगरेट ही न पी सकें तो इससे न सिर्फ श्‍वास रोग बल्कि अन्‍य नशों के चलते होने वाले रोगों पर भी लगाम लग सकती है।

डॉ रहमान पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित फेफड़ों के कैंसर पर दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने आये थे,  इस दौरान उन्‍होंने ‘सेहत टाइम्‍स’ के साथ विशेष वार्ता में अपने अनेक विचारों को साझा किया। उन्‍होंने कहा कि यह देखा गया है कि युवावस्‍था या किशोरावस्‍था में व्‍यक्ति पहली बार सिगरेट पीकर नशे की पहली सीढ़ी पर चढ़ता है, और इसी के बाद उसे इसकी नशे की लत लगना शुरू होती है, चूंकि एक नशे का वह आदी हो जाता है तो दूसरी नशीली वस्‍तुओं के सेवन की तरफ झुकाव होना शुरू हो जाता है। डॉ रहमान का कहना है कि‍ देश की जनता के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे कानून और योजनायें लाये जिससे आमजन स्‍वस्‍थ रह सके। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह से इंडियन लंग कैंसर सोसायटी की बैठक में केजीएमयू के पल्‍मोनरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ सूर्यकांत के भारत देश में तम्‍बाकू पूर्णतया निषेध करने के प्रस्‍ताव पर एकस्‍वर से सभी ने मुहर लगायी, यह स्‍वागतयोग्‍य है, ऐसी जरूरत बांग्‍लादेश में भी है।

डॉ रहमान कहते हैं कि मेरा मानना है कि जलवायु, व्‍यक्तियों की कद-काठी एक सी होने के कारण दक्षिण एशियाई क्षेत्र (सार्क) के देशों द्वारा एक साझा मंच पर आकर धूम्रपान, पर्यावरण से निपटने के लिए प्रयास किये जाने की आवश्‍यकता है, ऐसे संयुक्‍त प्रयास से निकले हुए परिणामों से सभी सार्क देश लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि चूंकि पश्चिमी देशों की जलवायु, वहां का रहन-सहन अलग है इसलिए वहां रिसर्च में खोजी गई दवाओं से जितना लाभ मिलेगा उससे कहीं ज्यादा लाभ सार्क देशों के द्वारा खोजे गये परिणामों से हासिल हो सकता है।

डॉ रहमान ने कहा कि पिछले दिनों जब दिल्ली सबसे प्रदूषित शहरों पहले नम्‍बर पर था, उस समय ढाका दूसरे नंबर पर था। उन्‍होंने बताया कि ढाका जिले के चारों ओर ईट भट्ठे हैं, उनसे निकलने वाला धुआं विभिन्न प्रकार के श्‍वास के लोगों को जन्म देता है जो बाद में लंग कैंसर के कारण बन जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि प्राइवेट ऑफि‍स हों या कोई और स्‍थान, जहां स्‍मोकिंग जोन बनाया जाता है, यह भी कहीं न कहीं परोक्ष रूप से धूम्रपान को बढ़ावा देता है। इसलिए कदम ऐसे उठाने चाहिये जिससे व्‍यक्ति धूम्रपान कर ही न सके। डॉ रहमान का कहना है कि पश्चिमी देश धूम्रपान को छोड़ रहे हैं पर हम लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में कैंसर की सबसे बड़ी वजह अल्कोहल है, जबकि भारत, बांग्‍लादेश में कैंसर की पहली वजह तम्‍बाकू  है।