मुख्‍यमंत्री आरोग्‍य मेला : विरोध की ‘आग’ में कोरोना वायरस के माहौल का ‘घी’

-राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद उत्‍तर प्रदेश ने कहाविरोध के कारणों का दायरा बढ़ गया

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों में मुख्‍यमंत्री आरोग्य मेले में राज्य कर्मचारियों ने काम तो किया लेकिन अपनी मांग को लेकर तीसरे रविवार को भी काला फीता बांधकर अपनी बात कहने का प्रयास किया। पूर्व के विरोध के बीच कर्मचारियों का यह भी कहना है जब सभी भीड़ वाले कार्यक्रम निरस्‍त कर दिये गये हैं, यहां तक कि कोचिंग, जिम, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, क्लब्स, डिस्को, स्वीमिंग पूल तक बंद कर दिये हैं तो ऐसे में आरोग्‍य मेले में आने वाली रोगियों की भीड़ को देखते हुए इन मेलों को भी स्‍थगित किया जाना चाहिये।

कार्यक्रम की समीक्षा के लिए आज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक समीक्षा बैठक संघ कार्यालय बलरामपुर में सुरेश रावत प्रान्तीय अध्यक्ष की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। परिषद ने कोरोना के प्रसार को देखते हुए आरोग्य मेला स्थगित करने की मांग की है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि समीक्षा बैठक में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आवश्यक जानकारी मांगी गई थी जिसके आधार पर प्रतीत होता है कि अधिकांश आरोग्य मेलें में आने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या कम है जबकि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों पर जबरन दबाव बनाकर मरीजों के आंकड़ों में बदलाव कराया जा रहा है। वहीं मेले में महज वही सेवाएं एवं औषधियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं जो नियमित रूप से उन स्वास्थ्य केन्द्रों पर बांटी जा रही हैं। मरीज के आंकड़ेबाजी बढ़ाने के चक्कर में कर्मचारियों एवं अधिकारियों में कई जगह आपसी असहमति भी हो जा रही है।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें सप्ताह में केवल 1 दिन रविवार के दिन अवकाश दिया जाता है जिस दिन स्कूलों में और अन्य कार्यालयों में भी अवकाश होता है, इसलिए रविवार को ही कर्मचारी अपने सामान्य घरेलू कार्य एवं सामाजिक कार्यों का भी निष्पादन करते हैं, परंतु विगत माह से प्रत्येक रविवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों में आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। चूंकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं नगरीय स्वास्थ केंद्रों में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब अटेंडेंट के साथ अन्य पद भी एकल है, इसलिए इन सभी कर्मचारियों को सप्ताह के सातों दिन में कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं मिल पा रहा है।

परिषद के महामंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे विश्व में कोरोना को ‘‘महामारी’’ घोषित कर दिया है। प्रदेश में प्रस्तावित समस्त कार्यक्रम रद कर दिए है एवं भीड़ कही एकत्रित ना हो इस हेतु प्रदेश सरकार ने भी इस बीमारी को महामारी घोषित करते हुए स्कूल कॉलेज आदि संस्थान बन्द कर दिए है। अतः परिषद जनहित में यह मांग करती है कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए आरोग्य मेले तत्काल प्रभाव से स्थगित किए जाएं।

प्रदेश में कुल 3621 पी॰एच॰सी॰ एवं लगभग 150 से अधिक नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र संचालित है, जिनपर आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। उक्त स्वास्थ्य केन्द्रो पर लगभग उन केन्द्रों के कार्यरत स्टाफ के अतिरिक्त अन्य विधाओ तथा आयुर्वेद, होम्योपैथ, यूनानी आदि चिकित्सक, फार्मेसिस्ट अन्य कर्मी एवं फील्ड स्टाफ भी प्रत्येक रविवार मेला ड्यूटी में लगाये गये हैं। 55 हजार से अधिक चिकित्सक, फार्मेसिस्ट, लैब अटेन्डेन्ट, चतुर्थ श्रेणी कर्मी, फील्ड स्टाफ सप्ताह के सातो दिन कार्य कर रहे हैं। रविवारीय अवकाश ना मिल पाने के कारण कर्मचारी परेशान हैं अतः परिषद ने कर्मचारियों की मांग को देखते हुए निर्णय लिया था कि कर्मचारी आरोग्य मेले में काला फीता बांधकर सरकार का ध्ययानाकर्षण करेंगें। लगातार तीन सप्ताह तक काला फीता बांधकर कार्य करने के बाद भी शासन स्तर पर कोई संज्ञान नहीं लिया, अतः समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अगले रविवार को स्वास्थ्य मेले का उद्घाटन करने वाले विशिष्ट महानुभावों को संघ की तरफ से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जायेगा। परिषद ने कर्मचारियों की मांग को देखते हुए निर्णय लिया था कि मुख्यमंत्री से इस संबंध में कर्मचारियों की समस्याओं को अवगत कराते हुए मांग की जाएगी कि आरोग्य मेला रविवार के स्थान पर किसी कार्य दिवस में सोमवार से शनिवार के बीच लगाया जाए। लेकिन सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के बाद भी परिषद की इस मांग पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।

कोरोना वायरस के प्रभाव से पूर्व भी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि कर्मचारी रविवार के दिन साप्ताहिक अवकाश में कार्य करता है तो उसे केंद्र सरकार की भांति अतिरिक्त कार्य के बदले उक्त दिवस के वेतन के दोगुने धनराशि के बराबर मानदेय उपलब्ध किया जाना न्यायोचित होगा। परिषद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री सहित सभी उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया लेकिन सरकार द्वारा एवं शासन द्वारा उक्त मांग पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।