कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावरहित कैंसर की दवाएं उपलब्ध

अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज दिया जा रहा है केजीएमयू में

लखनऊ। कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव से रहित कैंसर की दवाएं अब उपलब्ध हैं और काफी हद तक रोग को ठीक भी कर देती हैं। यह जानकारी चंडीगढ़ पीजीआई के हेमेटोलॉजिस्ट प्रो0 पंकज मल्होत्रा तथा एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉ. राजेश कश्यप ने किंग जॉॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के क्लीनिकल हेमेटोलॉजी विभाग के वार्षिक हेमेटोलॉजी अपडेट के आयोजन के दौरान कही।
उन्होंने मायलोमा की नई दवा के बारे में बताया कि ये दवायें पूरी तरह सुरक्षित हैं और इससे कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव नहीं हैं और इन दवाओं से रोगों को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इन दवाओं के प्रयोग में कीमोथेरेपी के विपरीत मरीजों को भर्ती नहीं करना पड़ता मरीज का इलाज ओपीडी से ही किया जा सकता है। इन दवाओं में प्रमुख है-थाइलिडोमाइड और प्रोटीयोसोमइनहिबिटर।
संस्थान के क्लीनिकल हेमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एके त्रिपाठी ने कहा कि विभाग में विभिन्न प्रकार के रक्तरोगों एवं कैंसर की अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रो त्रिपाठी ने कहा कि सिर्फ पांच वर्षों में देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू का हेमेटोलॉजी विभाग अपनी पहचान बना चुका है, यह विभाग गरीब मरीजों को भी विश्वस्तरीय कैंसर चिकित्सा मुहैया करा रहा हैै। उन्होंने बताया कि विभाग में मरीजों के उपचार के साथ ही साथ, चिकित्सा छात्रों को प्रशिक्षण एवं शोध के अतिरिक्त तीनअहम योजनाओं का संचालन हो रहा है, जिसमें मरीज और तीमारदारों के साथ निरंतर संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं का निराकरण करना, कर्मचारियों के कल्याण हेतु हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण, स्वच्छ जीवन शैली, उनके उच्च शिक्षा में सहयोग तथा कम्युनिटी सर्विसेज विभाग द्वारा शहर और उसके बाहर विभिन्न स्कूलों में रक्त रोगों एवं रक्त कैंसर की जानकारियां उपलब्ध कराया जाता है। दो वर्ष पूर्व में पूरे वर्ष में 10000 मरीज क्लीनिकल हिमैटोलॉजी विभाग की ओ0पी0डी0 में आये जो इस वर्ष 20000 के आसपास मरीजों को ओपीडी में पंजीकरण होने की सम्भावना है। 2017 में अबतक 12000 से अधिक मरीजों का पंजीकरण हो चुका है। विभाग में गरीब मरीजों, बीपीएल, मरीजों को जो कि इसके पात्र हैं उनके मुफ्त दवा एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराई जाती है। विभाग द्वारा गरीब से गरीब मरीजों को भी विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
प्रो0 त्रिपाठी ने भविष्य की योजनाओ के बारे में बताते हुये कहा कि विभाग में गुणवत्तापरक स्टेट ऑफ आर्ट प्राइवेट वार्ड की शुरुआत करना, स्टेमसेल प्रत्यारोपण की शुरुआत करना जो कि गरीब मरीजों के लिए भी सुलभ होगा और विभाग के अंतर्गत डी0एम0 पाठ्यक्रम की शुरुआत करने की योजना है।
कार्यक्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एमएलबी भट्ट ने अपने व्याख्यान में क्लीनिकल हेमेटोलॉजी विभाग की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस नये विभाग ने इतने कम समय में रक्तरोगों एवं रक्त कैंसर का विश्वस्तरीय इलाज हो रहा है यह सराहना के काबिल है। कार्यक्रम में सहारा अस्पताल के डॉ0 सुनील, आरएमएलआईएमएस से डॉ0 प्रद्युम्न सिंह, डॉ0 नमिता और केजीएमयू के डॉ. एसपी वर्मा, डॉ मिली जैन ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम में अन्य उपस्थित व्यक्तियों में प्रो0 विनिता दास, प्रो. अरुन चतुर्वेदी, प्रो0 मधुमती गोयल एवं प्रो0 कीर्ति श्रीवास्तव सहितअन्य चिकित्सा शिक्षक उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का मुख्य आर्कषण हेमेटोलॉजी क्विज था जिसमें प्रदेश भर के 15 मेडिकल कॉलेज/ इंस्टीट्यूट से 60 एमडी रेजीडेन्ट डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों द्वारा गुवाहाटी में होने वाले राष्ट्रीय हेमेटोलॉजी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया जायेगा।