ब्रिलियेन्ट चाइल्ड चाहिये तो जन्म के पहले घंटे में करायें स्तनपान

पहले घंटे में स्तनपान शिशु और माता दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह

वर्तमान में सिर्फ 25 फीसदी माताएं कराती हैं प्रथम घंटे में स्तनपान

लखनऊ। स्तनपान शिशु का प्रथम आहार है, जन्म के बाद पहले घंटे में किया जाने वाला स्तनपान न केवल बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है बल्कि बच्चा तीव्र बुद्धि का भी होता है, साथ ही यह मां को भी कैंसर जैसी बीमारियों से बचाता है, इसलिए हर मां को जानकारी होनी चाहिये कि स्वस्थ शिशु के भविष्य के लिए प्रथम छह माह स्तनपान कराना बहुत जरूरी है। शुरुआती छह माह में दूध के अलावा पानी समेत सबकुछ नजरअदांज करना चाहिये। यह जानकारी सोमवार को, विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह (1 अगस्त से 7 अगस्त तक)की पूर्व संध्या पर प्रमुख सचिव परिवार कल्याण एवं चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने दी।
प्रमुख सचिव ने कहा कि 1 अगस्त से शुरू होने वाले विश्व स्तनपान सप्ताह में जागरूकता में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि समाज में तमाम भ्रांतियां है, जिसकी वजह से स्तनपान कराने में महिलाएं कतराती हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्तनपान बच्चे और माता, दोनो के लिए बहुत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर में जिन बच्चों को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराया गया उनमें 14 प्रतिशत दर कम रही। यह अफसोस की बात है कि अभी भी सिर्फ 25 फीसदी बच्चों को जन्म के पहले घंटे के अंदर स्तनपान कराया जा रहा है। हालांकि 10 वर्ष पूर्व यह प्रतिशत सिर्फ 7 था।
निदेशक, नेशनल हेल्थ मिशन आलोक कुमार ने बताया कि मां के दूध में अदभुत शक्ति होती है, प्रसव उपरांत प्रथम घंटे में पीले रंग का दूध(कोलोस्ट्रम) बच्चें को जीवन भर निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मिथक होता है कि पीला गाढ़ा दूध नवजात हजम नहीं कर पाता है, इसलिए शहद चटाने की परम्परा बना रखी है जो कि पूर्णतया गलत है, कुदरती पीला गाढ़ा दूध ही बच्चे के लिए सबकुछ है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शहरों में पढ़ी लिखी महिलाओं में भी जागरूकता की जरूरत है, महिलाओं को लगता है कि स्तनपान से शारीरिक चुस्ती-फुर्ती खत्म हो जायेगी, फीगर बिगड़ जायेगा? मगर ऐसा नही है। स्तनपान से ब्रेस्ट व सर्विक्स कैंसर की संभावना 90 प्रतिशत कम हो जाती है, इसके अलावा शहरी महिलाओं की सुविधा के लिए कार्यालयों में स्तनपान कॉर्नर बनाने का प्रावधान है ।
चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.पदमाकर सिंह ने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए, लेबर रूम में ही स्तनपान कराने की सुविधा शुरू करने की प्लानिंग हो रही है। महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ.नीना गुप्ता ने कहा कि स्तनपान से शिशु मृत्यु दर कम होती है, आकड़ों के मुताबिक स्तनपान से अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी केसों में 14 प्रतिशत मृत्यु दर कम हो सकती है।