सर्जरी विभाग के 107 वें स्थापना दिवस अवसर पर आयोजित सीएमई का चौथा दिन
लखनऊ। पैरों में सूजन के साथ बुखार की समस्या अक्सर बनी रहती है तो, दोनों लक्षण एक साथ गंभीर बीमारी ‘डीप वेन थ्रोम्बोसिस’ का लक्षण हैं। इसमें पैर की की नसों में खून के थक्के जम जाते हैं और इलाज न मिलने पर यह थक्के टूट कर छोटे-छोटे टुकड़ों में खून के साथ छाती (फेफड़ों) में पहुंच जाते हैं। जहां फेफड़ों की सक्रियता प्रभावित होती है और मौत का कारण बन सकते हैं या लंग्स का हाइपरटेंशन हो जाता है। इसमें मुंह से खून की समस्या शुरू हो जाती है। यह जानकारी गुरुवार को केजीमएयू के शल्य विभाग में आयोजित सीएमई में बीएचयू के प्रो. एके खन्ना ने दी।
सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस पर आयोजित छह दिवसीय सीएमई में चौथे दिन प्रो. खन्ना ने बताया कि पैरों में सूजन व बुखार के लक्षण मिलें तो ब्लड टेस्ट में डी डायमर की जांच से बीमारी का पता लग जाता है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड व डाप्लर टेस्ट से भी बीमारी की पुष्टि की जा सकती है। इस इलाज मिलने पर ठीक हुआ जा सकता है। डॉ. खन्ना ने एक अन्य बीमारी पोस्ट थ्रोम्बोटिक सिन्ड्रोम के लक्षण व इलाज बताते हुए कहा कि इस बीमारी से एड़ी में अल्सर हो जाता है इसमें वेसेल्स को ठीक किया जाता है और गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। इस अवसर पर डॉ.पुनीत, डॉ.सुनील होंकलास, डॉ.आनन्द एवं डॉ.जितेन्द्र कुशवाहा व टाटा मेमोरियल के डॉ.कमलेश वर्मा ने बड़ी आंत व मलाशय के कैंसर के उपचार की विभिन्न विधियों के बारे में चर्चा की।

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