आयुर्वेदिक औषधि निर्माता नहीं बाज आ रहे डींगें हांकने से

आयुर्वेद दवाओं के गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हुए विज्ञापन देने पर निदेशक नाराज

ड्रग्स एण्ड मैजिक रिमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइजमेंट) एक्ट, 1954 के तहत होगी कार्रवाई  

लखनऊ। डायबिटीज, कैंसर, मोतियाबिन्‍द, कम सुनना, महिलाओं से संबंधित बीमारियां, प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड्स सं‍बधित बीमारियां, लैप्रोसी, ल्‍यूकोडर्मा, नर्वस सिस्‍टम की बीमारी सहित 50 से ज्‍यादा रोगों की आयुर्वेदिक दवाओं के गुणों को बढ़ा-चढ़ा कर उनका विज्ञापन देने पर आयुर्वेद निदेशालय ने सख्‍त रुख अपनाते हुए इसे रोकने के निर्देश दिये हैं। आपको बता दें कि इस तरह की कोशिश पहले भी की गयी थी, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।

 

इस बारे में निदेशक आयुर्वेद सेवाएं उत्तर प्रदेश डॉ एसएन सिंह ने कहा कि विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों, विज्ञापनों, होर्डिंगों एवं विभिन्न टीवी चैनलों में आयुर्वेदिक औषधियों के गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर एवं अतिश्योक्तिपूर्ण ढंग से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।   इस संबंध में उन्होंने कहा कि द ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक्स रूल्स 1945 जो यूनानी औषधियों के विज्ञापनों के प्रतिषेध से संबंधित है। इसमें आयुर्वेदिक, सिद्ध एवं यूनानी औषधियों के विज्ञापनों को प्रिन्ट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचारित एवं प्रसारित करने की व्यवस्था दी गयी है। इसलिए आयुर्वेदिक औषधि निर्माता लाइसेंस प्राप्त कर एवं निर्धारित नियम का पालन करते हुए ही विज्ञापन करें।

 

डॉ सिंह ने आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं को निर्देश दिए हैं कि उनके द्वारा आयुर्वेदिक औषधियों के प्रचार प्रसार के लिए दैनिक समाचार पत्रों, विज्ञापनों, होर्डिगों एवं विभिन्न टीवी चैनलों में, सम्बन्धित राज्य के लाइसेन्स प्राधिकारी के निर्धारित प्रारूप पर अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त ही प्रकाशन एवं प्रसारण के लिए दिये जायें। उन्होंने निर्देश दिए कि ड्रग्स एण्ड मैजिक रिमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइजमेंट) एक्ट, 1954 का अक्षरशः अनुपालन करना भी सुनिश्चित किया जाये, अन्यथा उनके विरुद्ध ड्रग्स एण्ड मैजिक रिमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइजमेंट) एक्ट, 1954 में दिये गये प्राविधानों के अन्तर्गत कड़ी कार्रवाई की जायेगी।