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डॉक्टरों पर हमला अब गैरजमानती अपराध, 3 माह से 7 साल तक की सजा

-गाड़ी या क्लीनिक पर हमला होने पर नुकसान के बाजार भाव से दोगुना हर्जाना
-देना पड़ सकता है 50 हजार से 2 लाख तक जुर्माना
-प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में कैबिनेट की बैठक, अध्‍यादेश लाकर किया गया फैसला
प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली/लखनऊ। कोरोना वायरस से देश में जंग लड़ रहे डॉक्‍टरों व अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों पर हमला करना गैर-जमानती अपराध माना जाएगा, साथ ही हमले की गंभीरता के हिसाब से दोषियों को 3 माह से लेकर 7 साल तक की सजा होगी। केंद्र सरकार इस सम्‍बन्‍ध में एक अध्‍यादेश लायी है। सरकार ने साफ कर दिया गया है अगर किसी डॉक्टर की गाड़ी या क्लीनिक पर हमला होता है तो नुकसान के बाजार भाव से दोगुना हर्जाना वसूला जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक अध्यादेश के जरिये लिया गया।  कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि देश में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला मामलों पर सरकार अध्यादेश लेकर आई है।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने बताया कि राष्ट्रीय महामारी कानून के तहत अध्यादेश लागू किया जाएगा जिसके तहत डॉक्टरों पर हमला गैरजमानती अपराध होगा। इसमें 30 दिन में जांच पूरी होगी तथा एक साल में फैसला आ जाएगा और कड़ी सजा हो सकती है। इसके अलावा 50 हजार से 2 लाख तक जुर्माना देना पड़ सकता है।

इस अध्यादेश के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति मेडिकल कर्मचारियों के साथ हिंसा करने का दोषी पाया जाता है तो उसे 6 महीने से 7 साल तक की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं दो लाख रुपए तक आर्थिक दंड देने का भी प्रावधान किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मेडिकल कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सरकार पूरा संरक्षण देने वाला अध्यादेश जारी करेगी। प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर के बाद ये तुरंत प्रभाव से जारी होगा। उन्होंने कहा कि महामारी कानून में कैबिनेट ने बदलाव किया गया तथा इस अपराध को गैरजमानती बनाया गया।

जावड़ेकर ने अध्यादेश की जानकारी देते हुए कहा कि मेडिकल टीम पर हमला करने पर 3 महीने से 5 साल की सजा और 50,000 से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना होगा। अगर गंभीर नुकसान हुआ है तो 6 महीने से 7 साल की सजा का प्रावधान और जुर्माना 1 लाख से 5 लाख रुपए है।

जावड़ेकर ने कहा कि अगर स्वास्थ्य कर्मियों के वाहनों या क्लीनिकों को नुकसान पहुंचाया गया तो अपराधियों से क्षतिग्रस्त की गई संपत्ति का बाजार मूल्य से दोगुना दाम मुआवजे के रूप में वसूला जाएगा।  हाल के दिनों में देखा गया कि कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटे मेडिकल स्टाफ पर देश के कुछ हिस्सों में हमले की खबर सामने आई थी। इसके बाद सरकार सख्त हो गई और अब अध्यादेश लेकर आई है।