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एक और उपलब्धि : आपस में जुड़ी बच्चियों को 24 घंटे लम्‍बी सर्जरी के बाद किया गया अलग

-रीढ़ की हड्डी और आंत जुड़ी थीं आपस में, एक ही थीं दोनों के पैरों की नसें

-कोविड के दौर में दो वर्ष की जुड़वा बहनों की सर्जरी से बच्चियों को मिला नया जीवन

-एम्‍स दिल्‍ली के 64 चिकित्‍सकों ने जटिल सर्जरी के इतिहास में जोड़ा नया अध्‍याय

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

नयी दिल्‍ली/लखनऊ। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सीय जगत में नया रिकॉर्ड कायम किया है। 64 डॉक्टरों ने साढ़े 24 घंटे चली मैराथन सर्जरी के बाद दो जुड़वां बहनों को अलग करने में कामयाबी हासिल की है। दोनों बहनें कूल्हे से आपस में जुड़ी थीं। इनकी रीढ़ की हड्डी और पैरों की नसें भी एक थीं। आंत भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी। इस उपलब्धि की महत्‍ता तब और बढ़ जाती है जब दुनिया कोविड-19 जैसे खतरे से जूझ रही है, लगभग सारी मशीनरी कोरोना से जंग में लगी हुई है। ऐसे समय चिकित्‍सकों ने एम्‍स दिल्‍ली और देश की उपलब्धियों की माला में एक और फूल पिरोया है।

चिकित्‍सकों के अनुसार शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई सर्जरी शनिवार सुबह 9 बजे तक चली। फिलहाल दोनों बहनें वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दोनों बच्चियां जल्द स्वस्थ हो जाएंगी। ज्ञात हो इससे पहले दिल्ली एम्स के डॉक्टर सिर से जुड़े जग्गा और बलिया को अलग करने में कामयाब हो चुके हैं।

जानकारी के अनुसार दो वर्षीय जुड़वां बच्चियां बीते डेढ़ साल से एम्स में भर्ती हैं। दोनों बच्ची कूल्हे और पेट से आपस में जुड़ी हुई हैं। यूपी के बुलंदशहर की निवासी ये बच्चियां जब भर्ती हुई थीं तो शारीरिक तौर पर जटिल ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थीं, इसलिए डॉक्टरों को सर्जरी के लिए एक लम्बा वक्त लगा। यही नहीं कम आयु के कारण एनेस्थीसिया भी नहीं दिया जा सकता। ऐसे में डॉक्टरों को इनके मजबूत होने का इंतजार था।

बताया गया है कि 3डी मॉडल पर एक लंबी प्रैक्टिस के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की योजना बनाई और कोविड महामारी के इस वक्त एकजुट होकर बच्चियों को नई जिंदगी देने का प्रयास शुरू किया। शुक्रवार को यह ऑपरेशन शुरू हुआ, जो शनिवार सुबह पूरा हो सका। फिलहाल दोनों बच्चियां गहन निगरानी में हैं।

एम्स के पीडिएट्रिक्स सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडिएट्रिक्स कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, सीटीवीएस के अलावा रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ समेत 64 से ज्यादा लोगों की टीम ऑपरेशन में जुटी रही। तीन अलग-अलग टीमें आठ-आठ घंटे की शिफ्ट के लिए तैयार की गईं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान सभी को एक साथ रहना पड़ा।

ऑपरेशन में व्यस्त मेडिकल टीम को सबसे बड़ी चुनौती का सामना तब करना पड़ा जब दोनों बच्चियों का कूल्हा और पेट से जुड़ाव होने के अलावा उनकी रीढ़ की हड्डी और आंत आपस में जुड़े थे। पैरों की नसें दोनों की एक ही थीं, जिसकी वजह से नई नसें प्रत्यारोपित करना जरूरी हो गया। रक्त संचार भी जरूरी था। ऐसे में नई नस को एहतियात के साथ प्रत्यारोपित किया गया। अलग करने के बाद एक बच्ची को नई त्वचा देना भी चुनौती था। बच्ची की मां से टिश्यू लेकर प्रत्यारोपित किए गए। एम्‍स के आधिकारिक सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि एम्‍स ने इस उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।