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बच्‍चों को मुस्‍कान संग पोषण भी देगी अमेरिका की स्‍माइल ट्रेन

-यूके से आयीं स्‍वतंत्र सलाहकार ने किया हेल्‍थ सिटी हॉस्पिटल का दौरा
-उपलब्‍ध सुविधाओं व किये जा रहे कार्यों की जमकर तारीफ की आशा न्‍यूसम ने

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। सर्जरी और पुनर्वास के जरिये कटे होठ व तालू वाले बच्‍चों के चेहरे पर मुस्‍कान लाने का कार्य कर रही अमेरिका की स्‍माइल ट्रेन संस्‍था अब जल्‍दी ही कुपोषित बच्‍चों का कुपोषण दूर करने में भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभायेगी। यह बात इंग्‍लैंड की सुप्रसिद्ध गवर्नेंस एंड इंस्‍टीट्यूशंस डेवलपमेंट प्रेक्टिश्‍नर आशा न्‍यूसम ने आज 3 मार्च को यहां गोमती नगर स्थित हेल्‍थसिटी हॉस्पिटल के अपने दौरे में कही। स्‍वतंत्र सलाहकार की भूमिका में यहां आयीं आशा न्‍यूसम यूके के डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट और एशियन डेवलपमेंट बैंक के साथ जुड़ी हैं। आशा न्‍यूसम ने हेल्‍थसिटी अस्‍पताल स्थित कई विभागों का दौरा करने के बाद अस्‍पताल के निदेशक व स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट के डाइरेक्‍टर डॉ वैभव खन्‍ना के साथ अस्‍पताल स्थित स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट के कार्यालय को भी देखा तथा स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट की टीम से मुलाकात की तथा उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की अत्‍यंत प्रशंसा की।

इस मौके पर प्रोजेक्‍ट से जुड़े वरिष्‍ठ प्‍लास्टिक सर्जन डॉ आदर्श कुमार ने एक प्रेजेन्‍टेशन के माध्‍यम से डॉ वैभव खन्‍ना के नेतृत्‍व में चल रहे  स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट के कार्यों से परिचि᧕ఀत कराया। इस दौरान उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश के दूरदराज इलाकों में जाकर कटे होठ व तालू वाले बच्‍चों को कैम्‍प लगाकर ऑपरेशन की सुविधा दिये जाने के बारे में बताया। इन इलाकों में सरकार के मुख्‍यमंत्रियों, मंत्रियों, क्षेत्रीय सांसदों से लेकर स्‍थानीय ग्राम प्रधान तक के शामिल होने की जानकारी तस्‍वीरों के माध्‍यम से दी। उन्‍होंने बताया कि किस तरह से इन शिविरों में कटे होठ-तालू वाले बच्‍चों के अलावा अन्‍य बीमारियों से ग्रस्‍त लोगों के आने पर उन्‍हें भी निराश नहीं किया जाता है।

देखें वीडियो-आशा न्‍यूसम ने अपने दौरे को लेकर क्‍या कहा

उन्‍होंने बताया कि स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों के तहत विभिन्‍न प्रकार के खेलों, साइकिल रैली का आयोजन किया जाता रहता है। इसके अतिरिक्‍त रेलवे स्‍टेशनों, बस स्‍टैन्‍ड जैसे भीड़-भाड़़ वाले इलाकों में प्रचार गाड़ी के माध्‍यम से परियोजना की जानकारी देकर कटे होठ-तालू वाले बच्‍चों को खोजने का काम किया जाता है। इस मौके पर आशा न्‍यूसम ने कटे होठ-तालू वाले बच्‍चों को स्‍माइल ट्रेन प्रोजेक्‍ट की ओर से उपहार भी दिये।

अपने भ्रमण के दौरान आशा न्‍यूसम ने स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा से जुड़े तमाम विषयों पर गम्‍भीर विचार-विमर्श किया। उन्‍होंने अस्‍पताल में लगे आधुनिक उपकरणों को भी देखा और सुविधाओं के लिए तारीफ की। इस मौके पर स्‍माइल ट्रेन से जुड़े डॉ रोमेश कोहली, डॉ एसपीएस तुलसी व डॉ सुबोध कुमार के साथ ही टीम के अन्‍य सदस्‍यों से बातचीत कर उनके कार्य की तारीफ की।

आशा न्‍यूसम खुद भी हैं कटे होठ-तालू का शिकार

आशा न्‍यूसम का जन्‍म कोलकाता में जुलाई 1947 में हुआ था। आशा को भी जन्‍म से कटे होठ और तालू की शिकायत थी, जिसकी सर्जरी की गयी थी।