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केले के रेशों से बने सैनेटरी पैड और दिव्यांगों को उपकरण की परियोजनाओं को एम्स गोरखपुर ने दी मंजूरी

-कमजोर वर्ग के दिव्यांगों, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चल रहे प्रोजेक्ट

सेहत टाइम्स

लखनऊ। महिलाओं और दिव्यांगजन सहायता के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह ने समर्थन देने की स्वीकृति दी है। इनमें से एक श्री माता अमृतानंदमयी देवी मठ, केरल द्वारा संचालित है, और दूसरा आकांक्षा समिति उत्तर प्रदेश (IAS अधिकारियों की पत्नियों की संस्था) द्वारा संचालित किया जाता है। दोनों परियोजनाएं समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं के कल्याण के लिए समर्पित हैं।

यह जानकारी देते हुए प्रोजेक्ट सौख्यम की राज्य निदेशक और आकांक्षा समिति उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य समिति की सदस्य डॉ प्रियंका यादव ने बताया कि प्रोजेक्ट सौख्यम की पहल श्री माता अमृतानंदमयी देवी अम्मा की प्रेरणा से शुरू की गई है, जिसे अंजू बिष्ट, एमडी द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत केले के रेशों से बने पुन: उपयोगी सैनिटरी पैड के माध्यम से अब तक 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। अब इसे उत्तर प्रदेश में लागू किया जा रहा है, ताकि समाज के कमजोर वर्ग की उन महिलाओं को लाभ मिले जो नियमित सैनिटरी पैड का खर्च वहन नहीं कर सकतीं। यह पर्यावरण के प्रति जागरूक और मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने वाला एक अनोखा कदम है।

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार दूसरा प्रोजेक्ट सहायक उपकरण परियोजना है। इसकी पहल आकांक्षा समिति उत्तर प्रदेश द्वारा की गई है। इस परियोजना की घोषणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में की गई थी, जिन्होंने इस नेक पहल के लिए आकांक्षा समिति की सराहना की। इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. रश्मि सिंह, आईएएस (उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की पत्नी) कर रही हैं। इसका उद्देश्य एम्स गोरखपुर में एक रीजनल सेंटर फॉर असिस्टिव डिवाइसेस की स्थापना करना है। यह सरकारी योजनाओं, CSR फंड और NGO के सहयोग से न्यूनतम लागत पर सहायक उपकरण उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिससे समाज के कमजोर वर्ग के दिव्यांग महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाया जा सके।

डॉ. प्रियंका यादव ने एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय सिंह को परियोजना के प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. अरूप मोहंती, डॉ. अमित रंजन और डॉ. सुधीर सिंह भी उपस्थित थे, जिन्होंने इन नेक प्रयासों और उनके प्रभाव को विस्तार से समझाया। प्रो. सिंह ने दोनों परियोजनाओं की सराहना की और उनके कार्यान्वयन को स्वीकृति दी। एम्स गोरखपुर के प्रमुख विभाग इन परियोजनाओं का समर्थन करेंगे। प्रोजेक्ट सौख्यम का क्रियान्वयन सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहयोग से किया जाएगा जबकि सहायक उपकरण परियोजना को भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास (PMR) विभाग के समर्थन से लागू किया जाएगा।

डॉ प्रियंका यादव ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs और CHCs) को कवर करना है, ICMR, CSR फंडिंग, और NGO साझेदारी के समर्थन से, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को अधिकतम लाभ मिल सके।

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