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विश्‍व फलक पर होम्‍योपैथी को स्‍थापित करने की पुरजोर वकालत

अनेक देशों के 60 होम्‍योपैथी विशेषज्ञों का लगा थाईलैंड में जमावड़ा

लखनऊ। होम्योपैथी साइंस कांग्रेस सोसाइटी के तत्वावधान में इण्टरनेशनल कॉन्फ्रेन्स ऑन होम्योपैथी का आयोजन पिछले दिनों  पटाया, थाईलैण्ड के होटल द-सीजन में किया गया। इसमें कई देशों के लगभग 60 होम्योपैथी विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिसमें भारत के 40 चिकित्सक शामिल थे।

 

यह जानकारी कान्फ्रेन्स से वापस आने के बाद संयोजक डा0 अनुरुद्ध वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि 21 जून को आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में होम्योपैथी को विश्व फलक पर स्थापित करने,  दूसरे देशों के चिकित्सकों के साथ ज्ञान, अनुभव एवं शोध का साझा करने,  होम्योपैथी को जनता की पहली पसन्द के रूप में स्थापित करने, होम्योपैथिक शिक्षा, शोध, शैक्षिक मानकों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित करने, विश्व के सभी देशों में होम्योपैथी को मान्यता देने,  होम्योपैथी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने, होम्योपैथी के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य आच्छादन के लक्ष्य को प्राप्त करने, थाईलैण्ड में होम्योपैथी को मान्यता देने के सम्बन्ध में प्रस्ताव पारित किये गये।

 

उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेन्स के वैज्ञानिक सत्र में बैंकाक, थाईलैण्ड की डा0 विलाई ने थाईलैण्ड में होम्योपैथी-चुनौतियां एवं सम्भावनायें, उत्तर प्रदेश के पूर्व होम्योपैथिक निदेशक प्रो0 डॉ बीएन सिंह ने 21वीं शताब्दी में होम्योपैथी की भूमिका, दिल्ली के डॉ सुशील वत्स ने कार्लजंग्स ऐनालिटिकल साइकालोजी इन लाइट ऑफ होम्योपैथी, पंजाब के सैय्यद तनवीर हुसैन ने होम्योपैथिक मैंनेजमेंट ऑफ एडवांस कैंसर केसेज एवं लखनऊ के डॉ निशान्त श्रीवास्तव ने इविडेंस बेस्ड क्लिीनिकल स्टडी आफ डर्माटोलॉजी पर शोध पत्र प्रस्तुत किया।

 

उन्होंने बताया कि थाईलैण्ड में मात्र 80 प्रशिक्षित चिकित्सक हैं। होम्योपैथी को मान्यता न होने कारण उन्हें दूसरे के लाइसेन्स के आधार पर उसके अधीन चिकित्सा कार्य करना पड़ता है जबकि थाईलैण्ड की जनता को होम्योपैथी के माध्यम से स्वास्थ्य की सेवायें आसानी से उपलब्ध करायी जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिक सत्रों में अन्य कई देशों के चिकित्सकों ने अपने चिकित्सीय एवं शोध से सम्बन्धित अनुभव साझा किये।