-आम जनता के साथ चिकित्सकों की लूट-खसोट के चित्रण ने माथे पर खींची चिंता की लकीरें

सेहत टाइम्स
लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने फिल्म “सूर्या – अंत से आरंभ तक” में चिकित्सा पेशे के चित्रण को लेकर अपनी गहरी चिंता जतायी है। आईएमए ने फिल्म की तत्काल समीक्षा का अनुरोध करते हुए कहा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्यापक भ्रष्टाचार होने का संदेश जाता है। आईएमए की मंशा किसी को जवाबदेही से बचाने की नहीं है बल्कि चिकित्सा पेशे की गरिमा की रक्षा करना, स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में जनता के भरोसे को बनाए रखना है। ऐसे में समीक्षा के उपरान्त फिल्म पर प्रतिबंध या जो भी कानूनसम्मत हो, कदम उठाये जायें।
आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिलकुमार जे. नायक ने इस सम्बन्ध में केंद्रीय मंत्री सूचना एवं प्रसारण अश्विनी वैष्णव को पत्र लिख कर कहा है कि फिल्म में चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा को दिखाया गया है, और इससे जनता के भरोसे तथा स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। पत्र में कहा गया है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के व्यापक होने का संदेश जाता है, चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा को दिखाया गया है, और इससे जनता के भरोसे तथा स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों के खिलाफ आमधारणा बनने का अंदेशा
पत्र में कहा गया है कि इस तरह के चित्रण से यह धारणा बन सकती है कि चिकित्सा जगत में भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्य आम हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के गलत आचरण की जांच होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कुछ लोगों की हरकतों के आधार पर अनगिनत ईमानदार और समर्पित डॉक्टरों की प्रतिष्ठा को धूमिल नहीं किया जाना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल के कर्मचारियों पर शारीरिक हमले के दृश्य – खासकर जब सही ठहराने वाले कार्यों के रूप में दिखाया जाता है, तो इससे लोगों की जान बचाने वालों के खिलाफ होने वाली हिंसा को सामान्य मानने का खतरा पैदा होता है।
हमलों का महिमामंडन करता है फिल्म का चित्रण
आईएमए का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को अस्पतालों में पहले से ही सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा कंटेंट जो चिकित्सा पेशेवरों पर होने वाले हमलों का महिमामंडन करता हो, वह लोगों में नफरत को बढ़ावा दे सकता है और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वालों के लिए खतरा और बढ़ा सकता है। इस तरह के चित्रण से डॉक्टरों के प्रति अकारण अविश्वास और दुश्मनी पैदा हो सकती है, जिससे वह आपसी भरोसा और सहयोग कमजोर होता है जो प्रभावी इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए बहुत जरूरी है।
नकारात्मक छवि से गिर सकता है चिकित्सा छात्रों का मनोबल
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भ्रष्टाचार, अनैतिक चिकित्सा प्रथाओं या पेशेवर कदाचार का समर्थन नहीं करता है। किसी भी गलत काम के खिलाफ उचित कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति के गलत आचरण को पूरे पेशे पर लागू करके नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की बढ़ती आबादी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए और अधिक समर्पित और प्रेरित डॉक्टरों की आवश्यकता है। इस तरह की नकारात्मक छवि चिकित्सा छात्रों का मनोबल गिरा सकती है, डॉक्टर बनने के इच्छुक लोगों को इस पेशे में आने से हतोत्साहित कर सकती है, और वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग, करुणा और मानवता की सेवा पर आधारित इस पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचा सकती है।
दोषी को बचाना उद्देश्य नहीं
अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा है कि हम रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन इसका उपयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए, खासकर तब जब स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं में जनता का विश्वास दांव पर लगा हो। हमारा अनुरोध है कि फिल्म की सामग्री और उसमें चिकित्सा पेशे के चित्रण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। फिल्म निर्माताओं से उचित सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा जाए, ताकि कथित कदाचार के सामान्यीकरण और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा के चित्रण जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके। यदि लागू कानून के तहत उचित हो, तो प्रतिबंध लगाने या कोई अन्य उपयुक्त कार्रवाई करने पर विचार करें। उन्होंने कहा है कि हमारा उद्देश्य किसी दोषी को जवाबदेही से बचाना नहीं है।

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