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डॉ सूर्यकांत आईएससीबी एक्सीलेंस अवार्ड फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट इन मेडिकल साइंसेज से सम्मानित

-आईएससीबी एंड आईएससीबी रिसर्च फाउंडेशन ने किया सम्मानित

 

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए आईएससीबी एक्सीलेंस अवार्ड फॉर ग्लोबल इम्पैक्ट इन मेडिकल साइंसेज बाय इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट्स (आईएससीबी) एंड आईएससीबी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाले महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

इंडियन सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्स एंड बायोलॉजिस्ट्स (आईएससीबी) की स्थापना वर्ष 1995 में सीडीआरआई, लखनऊ में रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में इसके लगभग 1,800 सदस्य हैं, जो शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी संगठनों और उद्योग जगत से जुड़े हुए हैं। आईएससीबी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, वैज्ञानिक व्याख्यानों और शोध गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है। संस्था द्वारा उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक गतिविधियों को मजबूत करना तथा देश-विदेश के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाना है। फाउंडेशन शोध, नवाचार, वैज्ञानिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। आईएससीबी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. अनामिक शाह एवं राष्ट्रीय सचिव डॉ. पी एम एस चैहान ने डा0 सूर्यकान्त को इस प्रतिस्थित अवार्ड के लिए बधाई दी है और आशा की है कि वे इस संस्था को भी अपना मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

ज्ञात रहे कि डॉ. सूर्यकान्त विश्व के सर्वोच्च 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की श्रेणी में भी शमिल हैं। वह रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में विगत 30 वर्षों से चिकित्सा शिक्षक, 21 वर्षों से प्रोफेसर व 15 वर्षों से विभागाध्यक्ष के पद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा वह चिकित्सा विज्ञान सम्बंधित विषयों पर 25 किताबें भी लिख चुके हैं तथा एलर्जी, अस्थमा, टी.बी. एवं कैंसर के क्षेत्र में उनके अब तक लगभग 1000 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं साथ ही 2 अंतर्राष्ट्रीय पेटेन्ट का भी उनके नाम श्रेय जाता है। लगभग 250 एमडी/पीएचडी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, 50 से अधिक शोध परियोजनाओं का निर्देशन, 22 फैलोशिप, 22 ओरेशन एवार्ड का भी श्रेय उन्हें जाता है। उन्हें अब तक अन्तरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा 231 पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। यह उनका 232वाँ अवार्ड है। डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि यह रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, केजीएमयू तथा उन सभी सहयोगियों और शोधकर्ताओं के प्रयासों का सम्मान है, जिन्होंने चिकित्सा एवं शोध के क्षेत्र में निरंतर सहयोग किया है। यह सम्मान मुझे मरीजों की बेहतर सेवा, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में और अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।

डॉ. सूर्यकान्त पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से अपने लेखों व वार्ताओ एवं टी.वी. व रेडियों एवं इलेक्ट्रानिक/प्रिंट/सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो में टी.बी. रोग, अस्थमा, एलर्जी, लंग कैंसर व श्वसन संबंधी अन्य बीमारियों से बचाव व उपचार के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर पीएम श्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी हिंदी में 100 पुस्तकों का विमोचन किया गया उसमें डा0 सूर्यकान्त की 2 पुस्तकें ’टीबी’ एवं ’आस्थमा में योग की भूमिका’ हिन्दी में पुस्तक भी शामिल है। समय समय पर आम जनमानस के लिए इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी टीबी रोग के लेख, वार्ता, वीडियों आदि के द्वारा जागरूक करते रहते है।

डॉ. सूर्यकान्त वर्तमान में केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं केजीएमयू की कार्य परिषद के सदस्य हैं। वर्तमान में वे गवर्निंग बॉडी एम्स भुवनेश्वर तथा यू.पी. यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल सांइन्सेज, सैफई, इटावा के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य भी है। वे पूर्व में लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्य परिषद के सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही वे यू.पी. यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल सांइन्सेज, सैफई, इटावा की कार्य परिषद के सदस्य भी रहे हैं। वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के इन्स्टीट्यूट एवं गवर्निंग बॉडी एवं बोर्ड ऑफ मैनेजमेन्ट, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर के सदस्य एवं स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन भी रहें हैं। इसके साथ ही वे वैज्ञानिक समिति, वैश्विक रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मीडिया एलायंस – गामा के सह-अध्यक्ष है, तथा इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टीबी एंड लंग डिजीज द्वारा अपने IDEFETE TB प्रोजेक्ट के तहत स्थापित “सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स“ ड्रग रेजिसन्टेन्ट टी.बी. केयर एवं पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर, (यूपी में पहला सार्वजनिक केंद्र) के प्रभारी व स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर सोसाइटी तथा पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी (पीआरएस) के संस्थापक अध्यक्ष है। आर्गेनाइजेशन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ़ एनवायरनमेंट एंड नेचर (ओशन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तरी क्षेत्र कार्य बल (भारत के नौ राज्य) राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, भारत के अध्यक्ष, राष्ट्रीय कोर समिति डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन (डीएफसीए) के सदस्य भी है। इसके साथ ही चेस्ट रोगों के विशेषज्ञों की राष्ट्रीय संस्थाओं इण्डियन चेस्ट सोसाइटी, इण्डियन कालेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एण्ड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी एवं नेशनल कालेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन (एन0सी0सी0पी0) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही इण्डियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके है एवं डा0 सूर्यकान्त आई0एम0ए0, लखनऊ के अध्यक्ष एवं उ0प्र0 आई0एम0ए0 एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज के चेयरमैन रह चुके है एवं आई0एम0ए0-ए0एम0एस0 के राष्ट्रीय वायस चेयरमैन भी रह चुके है। वे इंडियन स्टडी अगेंस्ट स्मोकिंग के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं।