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विश्व की इकलौती होम्योपैथी यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह संपन्न

-यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के मेम्बर डॉ गिरीश गुप्ता ने कहा, होम्योपैथी शिक्षा के प्रति डॉ गिरेन्द्र पाल का समर्पण लाजवाब

सेहत टाइम्स

लखनऊ। होम्योपैथी के लिए विशेष रूप से समर्पित एकमात्र विश्वविद्यालय ‘होम्योपैथी यूनिवर्सिटी’, जयपुर का दीक्षांत समारोह 16 जुलाई को जयपुर के बीएम बिड़ला ऑडीटोरियम में आयोजित किया गया। कोरोना काल के बाद यह पहला दीक्षांत समारोह था, इसमें पीएचडी के 75, एमडी के 120 तथा बीएचएमएस के 523 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गयीं। इस विश्वविद्यालय की खास बात यह है कि भारत ही नहीं, पूरे विश्व में सिर्फ होम्योपैथी शिक्षा देने वाला यह एकमात्र विश्वविद्यालय है।

राजस्थान के गवर्नर और केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री हुए शामिल

समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े तथा गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव गनपतराव जाधव को आमंत्रित किया गया था। समारोह की अध्यक्षता पूर्व सांसद डॉ मनोज राजौरिया ने की। मंच पर विश्वविद्यालय के आजीवन संरक्षक एवं एडवाइजर डॉ अमर सिंह शेखावत, नेशनल कमीशन ऑफ होम्योपैथी के चेयरपर्सन डॉ तारकेश्वर जैन, विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ कैलाश चंद भिंडा और कुलपति डॉ एएन माथुर भी मौजूद रहे। समारोह के सफल आयोजन में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. शिशिर माथुर ने विशेष योगदान दिया।

डॉ गिरेन्द्र पाल का सपना था होम्योपैथी डेडीकेटेड यूनिवर्सिटी

ज्ञात हो सिर्फ और सिर्फ होम्योपैथी शिक्षा देने वाले विश्वविद्यालय को स्थापित करने का सपना मशहूर होम्योपैथ डॉ गिरेन्द्र पाल ने देखा था। उन्होंने 1965 में होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की, जो कालान्तर में डॉ मदन प्रताप खुंटेटा (एमपीके)होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च सेंटर कहलाया, इसके बाद डॉ पाल ने 2010 में इसे होम्योपैथी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाकर अपना सपना पूरा किया। पूर्णत: होम्योपैथी को समर्पित सरकारी और निजी क्षेत्रों में यह अकेला पूर्ण-विकसित निजी विश्वविद्यालय है। डॉ पाल को राजस्थान में होम्योपैथी शिक्षा का जनक माना जाता है।

डॉ गिरेन्द्र पाल को समर्पित की थी डॉ गिरीश गुप्ता ने अपनी पहली पुस्तक

समारोह में होम्योपैथी यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) के मेम्बर व गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च लखनऊ के संस्थापक होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ गिरीश गुप्ता ने विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा होम्योपैथी के क्षेत्र में डॉ गिरेन्द्र पाल का समर्पण एक अलग ही स्थान रखता है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि डॉ गिरेन्द्र पाल लखनऊ स्थित नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र भी थे। उन्होंने कहा कि विश्व की इस इकलौती होम्योपैथी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। आपको बता दें डॉ गिरीश गुप्ता ने अपने शोध कार्यों पर लिखी पुस्तकों में पहली पुस्तक Evidence-based Research of Homoeopathy in Gynaecology, डॉ गिरेन्द्र पाल को ही समर्पित की थी, यह पुस्तक स्त्री रोगों के होम्योपैथिक उपचार पर आधारित है।