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भारत-नेपाल सीमा के दुर्गम इलाकों में सेवा और समर्पण के महायज्ञ के छठे अध्याय का समापन

-‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’ में हुआ दो लाख मरीजों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार

-6 से 8 फरवरी तक आयोजित इस सेवा यात्रा में डेढ हजार से ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दीं अपनी सेवाएं

सेहत टाइम्स

लखनऊ। भारत-नेपाल सीमा के दुर्गम क्षेत्रों में लगभग दो लाख मरीजों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार देकर नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन (NMO) अवध एवं गोरक्ष प्रांत तथा श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास की 6 से 8 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’ का समापन हुआ। प्रतिवर्ष होने वाली यह सेवा यात्रा उत्तर प्रदेश की 700 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पूरी तरह स्थापित हो चुकी है।

यह जानकारी देते हुए नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) के अवध प्रांत के संगठन मंत्री एवं मीडिया प्रभारी डॉ. कपिल देव शर्मा ने बताया कि उन्होंने कहा कि ‘जहां कम वहां हम’ सिद्धांत पर चलते हुए सीमाओं पर रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक आधुनिक चिकित्सा सुविधा पहुँचाना और राष्ट्र के प्रति विश्वास जगाना ही हमारा लक्ष्य है। इस वर्ष पहली बार पीलीभीत जिले में सेवा कार्य का विस्तार किया गया, जो पहले ही वर्ष में अत्यंत सफल रहा। इस सेवा यात्रा में देश के ​विभिन्न राज्यों से आये 1500 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इन दुर्गम इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए लोगों को उनके ही क्षेत्र में परीक्षण और उपचार से लाभान्वित किया जो उन्हें सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद शहरों में स्थापित बडे अस्पतालों में मिलती है।

उन्होंने इन डेढ़ हजार विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रति उनकी सेवा के लिए आभार जताते हुए कहा कि सुदूर इलाकों में इस यात्रा के आयोजन को सफल बनाने के लिए 4,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने पिछले दो महीनों से धरातल पर कमान संभालते हुए अपना समर्पण दिखाया है, इसके लिए ये स्वयंसेवक भी साधुवाद के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि जंगल और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की पीड़ा को समझना और उसका निवारण करना ही वास्तविक ईश्वरीय कार्य है।

डॉ कपिल ने बताया कि थारू और वनटांगिया जैसी जनजातियों के बीच यह यात्रा स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनी है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास एवं NMO के साथ एकल अभियान, सीमा जागरण मंच, वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा भारती और विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठनों के बीच अभूतपूर्व समन्वय ने इस यात्रा को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी।