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एसजीपीजीआई में डॉक्‍टर ने एसीएल की सफल सर्जरी कर बचाया पहलवान का करियर

-कुश्‍ती प्रतियोगिता के दौरान लगी चोट से बिहार के खिलाड़ी को हो गयी थी लिगामेंट इंजरी

-एपेक्‍स ट्रॉमा सेंटर में डॉ पुलक शर्मा की टीम ने ऑर्थोस्‍कोपी सर्जरी से पुनर्निर्माण किया एसीएल का

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में प्रसिद्ध पहलवान सुमित कुमार की जटिल लिगामेंट की ऑर्थोस्‍कोपी सर्जरी सफलतापूर्वक की गयी है। प्रतियोगिता के दौरान लगी चोट के बाद अनेक अस्‍पतालों से निराश होकर एसजीपीजीआई पहुंचे सुमित की न केवल सफल सर्जरी कर उन्‍हें कष्‍ट से राहत दी बल्कि उनका कुश्‍ती का करियर भी बच गया। डॉक्‍टरों के अनुसार सुमित पूर्व की तरह कुश्‍ती लड़ते हुए विरोधियों के छक्‍के छुड़ाने लायक हो गये हैं।  

डॉ पुलक शर्मा

सुमित के ऑपरेशन को अंजाम देने वाले डॉ पुलक शर्मा ने ‘सेहत टाइम्‍स’ को बताया‍ कि बिहार के रहने वाले पहलवान सुमित कुमार एक राज्यस्तरीय 60 किलो वर्ग कुश्ती चैम्पियन हैं। ऐसी ही एक प्रतियोगिता में बीती 27 अक्‍टूबर,  2022 को वाराणसी में सुमित कुमार के बाएं घुटने के जोड़ में एक लिंगामेंट इंजरी हो गयी थी। इसके बाद सुमित कुमार ने शुरुआत में मोच समझकर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया लेकिन आराम न मिलने पर जब डॉक्‍टरों को दिखाया तो उनकी एमआरआई जांच की गयी तो एसीएल anterior cruciate (KROO-she-ate) ligament (ACL)  इंजरी का पता चला।

एसीएल इंजरी की चोट से भार उठाना तो दूर, घुटना मोड़ना भी दुश्वार हो गया था। आपको बता दें कि एसीएल ऊतक के मजबूत बैंड में से एक है जो जांघ की हड्डी (फीमर) को शिनबोन (टिबिया) से जोड़ने में मदद करता है। इसके पश्‍चात सुमित ने कई अस्‍पतालों में दिखाया, डॉक्‍टर उनकी सर्जरी करने को तैयार थे लेकिन साथ ही उनका यह भी कहना था कि फि‍र से कुश्‍ती कर पाना शायद उनके लिए मुश्किल होगा। चोट का दर्द और करियर समाप्‍त होने की सोच का दर्द से सुमित परेशान हो गये थे। तभी उन्‍हें एसजीपीजीआई में दिखाने की सलाह दी गयी। डॉ पुलक बताते हैं कि दिसम्‍बर के अंत में सुमित कुमार एपेक्‍स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उनकी जांच कर उन्‍हें यह उम्‍मीद जगायी गयी कि सर्जरी संभव है और बाद में उनका कुश्‍ती की प्रतियोगिता में भाग लेना भी संभव हो सकेगा।

इसके बाद सुमित को 3 जनवरी को भर्ती किया गया तथा तत्काल उनका उपचार शुरू किया गया।  तत्पश्चात आवश्यक जांचों के उपरांत अगले दिन ही डॉ पुलक शर्मा व उनकी टीम ने सुमित के एसीएल का पुनर्निर्माण किया। ऑर्थोस्‍कोपी से किया गया यह ऑपरेशन पूर्णतया सफल रहा। इस ऑपरेशन में डॉ पुलक शर्मा के साथ डॉ अमरेन्द्र सिंह,  डॉ मंजूनाथ और डॉ संजय शर्मा शामिल थे। सर्जरी में एनेस्थेसिया विभाग से डॉ रफत शमीम का पूर्ण सहयोग रहा। ऑर्थोस्‍कोपी की मदद बिना चीरा-टांका के की गयी सर्जरी के कारण दो दिन बाद ही सुमित को छुट्टी दे दी गयी।

फीजियोथैरिपी के बाद अब सुमित पूरी तरह से स्वस्थ हैं। डॉक्टरों का कहना है कि महीने भर में सुमित फिर से कुश्ती कर सकेंगे और जीतेंगे भी। सुमित कुमार ने डॉ पुलक शर्मा व उनकी टीम का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।