-केजीएमयू में सेवा नवीनीकरण के समय कई पुराने कर्मचारियों को बिना कारण निकाला जा रहा
-200 कर्मियों की सेवाएं समाप्त, मंगलवार तक मसला हल न हुआ तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि आदेश के बावजूद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती करने वाली कम्पनियां पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों में से कुछ कर्मचारियों को हटा रही है, जबकि रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि आउटसोर्सिंग करने वाली जिस कम्पनी को ठेका मिलेगा वह पुराने ही कर्मचारियों को चयनित करते हुए उनकी सेवाएं जारी रखेंगी।
आउटसोर्सिंग कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल द्वारा यह आरोप लगाते हुए कहा गया है कि मानव आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल व्यवस्था के अंतर्गत कंपनियों का चयन किया गया है जिसमें पूर्व में कार्यरत 4333 कर्मचारियों की ही सेवा के लिए जाने का आदेश रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी हुआ है। मगर सेवा प्रदाता फर्मो द्वारा विभागाध्यक्ष एवं एजेन्सियों की मिलीभगत से मनमानी तरीके से हर विभाग से 10 से 15 कर्मचारियों को बिना किसी कारण के कार्य मुक्त कर दिया जा रहा है। कार्यमुक्त कर्मचारियों की संख्या अबतक लगभग 200 से ऊपर हो चुकी है तथा नई नियुक्ति सीधे विभाग द्वारा की जा रही है। जबकि शासनादेश के अनुसार पूर्व में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखने तथा नई भर्ती सेवायोजन द्वारा किए जाने का आदेश शासन द्वारा कई बार जारी हो चुका है।
रितेश ने कहा है कि इसके इतर सेवा प्रदाताओं द्वारा पुराने कर्मचारियों से भी अपने कंपनी की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन 250 रुपये शुल्क लेकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा रहा है एवं वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों से तमाम तरह के कागजात, चरित्र प्रमाणपत्र की मांग की जा रही है, जबकि जैम पोर्टल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सेवा प्रदाता फर्मों द्वारा वर्षों से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है तथा पुराने कर्मचारियों को हटाकर नई तैनाती में धन उगाही की भी शिकायतें आ रही हैं।
इस संबंध में आज प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल की अध्यक्षता में केजीएमयू के तमाम कर्मचारियों के साथ कुलपति कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की गयी। कुलपति से वार्ता कर मांग की गयी कि पूर्व में कार्यरत सभी कर्मचारी की सेवाएं जारी रखी जाएं और साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर धन उगाही बंद की जाए। रितेश मल्ल ने कहा है कि अगर मंगलवार तक सभी कर्मचारियों की वापसी नहीं हुई और कर्मचारियों का उत्पीड़न बन्द नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन होगा जिसमें वी सी कार्यालय पर प्रदर्शन और कार्यबहिष्कार का भी फैसला हो सकता है। इसके साथ ही सेवा प्रदाता फ़र्मों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के संबंध में जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से भी मुलाकात करेगा।

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