जिन्दगी सिर्फ लम्बी ही नहीं, गुणवत्तापूर्ण भी हो, जीवन शैली में करें सुधार, योग का लें सहारा
संजय गांधी पीजीआई में कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया की नेशनल इंटरवेंशन काउंसिल की वार्षिक बैठक का किया उद्घाटन

लखनऊ। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि जिन्दगी लम्बी कर देना ही पर्याप्त नहीं है, जरूरी यह है कि यह गुणात्मक रूप से समृद्ध हो, संतुष्ट हो। आज संक्रामक रोगों की तुलना में जीवनशैली पर आधारित असंक्रामक व्याधियों का खतरा बढ़ गया है। यह चिंता का विषय है कि विश्व में मधुमेह और हृदय रोगों के सर्वाधिक रोगी हमारे देश में हैं। हृदय रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि चिकित्सक कम से कम तीन वर्ष ग्रामीण प्राथमिक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में सेवा करें। उन्होंने कहा कि हमारे प्राथमिक उपचार केंद्र, उपचार की पहली कड़ी हैं अतः एक सुदृढ़, सक्षम, सुसज्जित और त्वरित प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की श्रृंखला, हमारे सेकेंडरी और टरशरी चिकित्सा संस्थानों पर बढ़ते बोझ को कम करेंगी।
हृदय रोगों के कारण 34 फीसदी बढ़ गयी है मृत्यु दर
उपराष्ट्रपति आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई में कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया की नेशनल इंटरवेंशन काउंसिल की वार्षिक बैठक के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। 5-7 अप्रैल तक चलने वाले इस गोष्ठी में देश विदेश के लगभग 1500 हृदय रोग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आज विश्व भर में लगभग 170 लाख लोग सालाना हृदय रोगों के शिकार हो रहे हैं। भारत में भी 1990 से 2016 के बीच हृदय रोगों के कारण मृत्युदर में 34% की वृद्धि हुई है।
25 फीसदी हृदयरोगी 35 वर्ष से कम आयु के
उन्होंने कहा कि सबसे अधिक चिन्ता का विषय यह है कि देश में हार्ट अटैक से ग्रस्त लोगों में से 40 प्रतिशत लोग 55 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं। हृदयघात से मरने वाले 25 फीसदी लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं।” आधुनिक जीवनशैली के कारण पैदा हुई बीमारियों के उपचार में योग की अहम भूमिका की चर्चा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि “आज विश्व, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए योग के महत्व को स्वीकार कर रहा है। यह तनाव को दूर रखने का प्रभावी साधन है। योग में कई व्याधियों का विशेष कर जीवनशैली से संबंधित बीमारियों, का उपचार है।”
आज कहा कि यदि देश को एक समन्वेशी और सतत विकास के मार्ग पर बढ़ना है और विश्व समुदाय में अपना अभीष्ट अग्रणी स्थान प्राप्त करना है तो आवश्यक है कि हम विश्वास और जोश से भरी अपनी विशाल युवा जनसंख्या को स्वस्थ रखें। उन्होंने कहा कि जीवन को मात्र दीर्घायु कर देना पर्याप्त नहीं, जीवन गुणात्मक रूप से समृद्ध होना चाहिए, जीवन संतुष्ट होना चाहिए।

बच्चों को करें प्रेरित
उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि डॉक्टर तथा स्वास्थ्य कर्मी लोगों में स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागृति पैदा करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को ट्रांस फैट युक्त खाने के बजाय पौष्टिक आहार लेने के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों में शारीरिक व्यायाम वाले खेल कूद के लिए प्रेरित करना चाहिए। बढ़ती स्वास्थ्य आपदाओं के प्रति सावधान और सजग रहने की सलाह देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आपदा के समय आपात स्वास्थ्य और चिकित्सा आवश्यकताओं को त्वरित रूप से पूरा करने की क्षमता को और विकसित करने की दिशा में प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।
चिकित्सा के क्षेत्र में नये आयामों को छूना है भारत को
बीमारियों के बढ़ते प्रकोप पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री नायडू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण नित नए, औषधिरोधी जीवाणु विकसित हो रहे हैं। इनके विरुद्ध तैयार रहने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत को चिकित्सा के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान के नए क्षितिजों, नए आयामों को छूना है। आयुष्मान भारत कार्यक्रम की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी इस स्वास्थ्य योजना से इतने काम समय में ही 10 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं।
उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि इस आयोजन के माध्यम से हृदय रोग विशेषज्ञ अपने अनुभवों का लाभ साझा करेंगे। निरंतर शिक्षण और प्रशिक्षण तथा इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रयासों की सराहना की। सोसायटी ने अब तक 5000 से अधिक हृदय चिकित्सकों को प्रशिक्षित कर देश की स्वास्थ्य सुविधाओं में बहुमूल्य योगदान दिया है।

Sehat Times | सेहत टाइम्स Health news and updates | Sehat Times