30 लाख रुपये का काम करता है तीस साल का पीपल का वृक्ष : ओपी सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक ओपी सिंह ने कहा है कि पुरातन काल से ही भारतवर्ष में पौधों एवं जन्तु संरक्षण की दृष्टि से इनको देवी-देवताओं के साथ जोडक़र देखा जाता रहा है उन्होंने एक दृष्टांत देकर बताया की 30 वर्ष का पीपल का वृक्ष जिसकी प्रत्यक्ष हमें कीमत 4 से 5 हजार मिलती है परंतु परोक्ष रूप से इसकी कीमत 30 लाख होती है क्योकि यह वायुमण्डल को ऑक्सीजन तथा नमी प्रदान करता है और उससे हानिकारक कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषण करता है।
श्री सिंह ने यह बात आज 5 जून को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस द्वारा विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी में कही। श्री सिंह को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। विश्व पर्यावरण दिवस पर केजीएमयू में विभिन्न  समारोह आयोजित किये गए।

केजीएमयू में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस, कुलपति ने लगाये औषधीय पौधे

सर्वप्रथम चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मदनलाल ब्रह्म भट्ट एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों द्वारा औषधीय पौधों का रोपण किया गया तत्पश्चात पैरामेडिकल एवं नर्सिंग के विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय के परिसर में एक जागरूकता रैली निकाली गई जो प्रशासनिक भवन से चलकर पर्यावरण विभाग होते हुए कलाम सेंटर पर आकर समाप्त हुई। उक्त रैली को कुलपति द्वारा झण्डा दिखाकर रवाना किया गया। इसके उपरांत विश्वविद्यालय पर्यावरण विभाग में भी वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पैरामेडिकल के विद्यार्थियों द्वारा कलाम सेंटर के बाह्य परिसर में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा के लिए सकरात्मक संदेश दिया गया एवं प्रचार वाक्य स्लोगन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। मध्यान्ह 12:00 बजे कलाम सेण्टर मे पर्यावरण दिवस के अवसर पर कनेक्टिंग पीपुल्स टू द नेचर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में प्रधान वन संरक्षक उत्तर प्रदेश डॉ रूपक डे एवं विशिष्ट अतिथि मुख्य वन संरक्षक ओपी सिंह, संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति द्वारा की गई।

आने वाली पीढ़ी के सुखमय जीवन के लिए पर्यावरण की रक्षा जरूरी : प्रो. विनोद जैन

संगोष्ठी के स्वागत समारोह में पैरामेडिकल साइंस के अधिष्ठाता एवं कार्यक्रम के संयोजक प्रो. विनोद जैन ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना हम सब की जिम्मेदारी है, जलवायु वन एवं वातावरण को संरक्षित रखना न केवल हमारा कर्तव्य है बल्कि हमारा धर्म भी है। इससे हमारे आने वाली पीढ़ी सुखमय जीवन व्यतीत कर सकेगी। उन्होने अह्वान किया कि हम सब पर्यावरण का संरक्षण करके मानव सेवा का संकल्प लें।

दिल्ली से लेकर इटावा तक बड़ा नाला बन चुकी है यमुना : डॉ रूपक डे

इस मौके पर प्रधान वन संरक्षक डॉ रूपक डे ने बताया कि आबादी के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश दुनिया का छठा बड़ा देश होता। प्रदेश का वन क्षेत्र 16580 वर्ग मीटर है, जिसका संरक्षण करके हम जन सामान्य की सेवा कर सकते है। उन्होने नदी प्रदूषण के ऊपर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जाने अनजाने में मानव ने यमुना नदी को दिल्ली से लेकर इटावा तक एक बड़े नाले के रूप में परिवर्तित कर दिया है। हम लोग प्रकृति से पाये हुए लाभ का सही मूल्यांकन नहीं करते हैं और इसका लगातार अतिक्रमण करते हैं। यदि यह अतिक्रमण जारी रहा तो भविष्य की स्थिति बड़ी भयावह होगी। कनेक्टिंग पीपुल्स टू द नेचर के लिए इको टूरिज्म सबसे सार्थक तरीका बताते हुए कहा की उत्तर प्रदेश मे बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां मनुष्य जाकर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। इस प्रकार उनमें प्रकृति की संरक्षण की चेतना जागृत होगी।

कचरा निस्तारण मात्र से हो जायेगा 80-90 प्रतिशत समाधान : प्रो मदनलाल ब्रह्म भट्ट

संगोष्ठी में कुलपति ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि एक व्यक्ति लगभग तीन सिलिन्डर ऑक्सीजन प्रतिदिन प्रयोग करता है जिसकी कीमत 2100 रुपये और 60 साल की आयु तक 60 लाख का ऑक्सीजन वातावरण से नि:शुल्क प्राप्त करता है। परंतु इस प्राकृतिक सम्पदा का हमकों भान नही होता है। अत: पर्यावरण संरक्षण हर मनुष्य की जिम्मेदारी है। कुलपति ने इस अवसर पर आज के दिन को नेचर सेल्फी डे के रूप मे मनाने का आह्वान किया, जिससे प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति के साथ अपनी सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करें इससे आप स्वत: प्रकृति से जुड़ जायेंगे। प्रो. भट्ट ने यह भी कहा की पर्यावरण प्रदूषण की 80 से 90 प्रतिशत समस्या कचरा निस्तारण के उचित प्रबंधन से समाप्त हो जायेंगी। उन्होंने कहा कि विष्वविद्यालय परिसर मे जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में हजारों की संख्या में छायादार वृक्षारोपण किया जायेगा। इसके लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय का पर्यावरण सेल तत्पर है।

डिस्पोजेबल सामान का उपयोग कम करने की जरूरत

संगोष्ठी में प्रो. कीर्ति श्रीवास्तव प्रभारी पर्यावरण सेल द्वारा कचरा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल चिकित्सालय मे बल्कि अन्य स्थानों पर भी कचरा प्रबंधन की आवश्यकता है। आज समाज मे डिस्पोजेबल सामान का उपयोग लगभग 80 प्रतिशत के करीब बढ़ा है इस को कम करने की जरूरत है। वाहनों द्वारा बढ़ते हुए वायु प्रदुषण को कम करने के लिए हमे साइकिल का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत मे मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो एसएन संखवार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय पर्यावरण विभाग के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं पैरामेडिकल तथा नर्सिंग संकाय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ अंकिता जौहरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रचार वाक्य प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को प्रशस्ति प्रत्र भी दिया गया।