सभी विधाओं के फार्मासिस्‍ट रविवार के आरोग्‍य मेले में काला फीता बांधेंगे

-रविवार को अतिरिक्‍त ड्यूटी के लिए दोगुना मानदेय की मांग व लंबित प्रकरणों को न निपटाने के कारण जता रहे विरोध

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश भर के राज्‍य चिकित्‍सालायों में कार्यरत सभी विधाओं के फार्मासिस्‍ट अपनी मांगें लटकाये रखे जाने तथा आरोग्‍य मेले के रविवार के स्‍थान पर किसी और दिन लगाये जाने या मानदेय दोगुना देने की मांग को लेकर 1 मार्च को आयोजित होने वाले आरोग्‍य मेले में अब मेले की अतिरिक्‍त ड्यूटी काला फीता बांधकर करेंगे।

उक्त निर्णय की जानकारी राजकीय फार्मासिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने दी। उन्‍होंने कहा कि इसके साथ ही पुरानी पेंशन बहाली, वेतन  उच्चीकरण, पदों का पुनर्गठन, उच्च पदों का सृजन, मानक के अनुसार पद बढ़ाने, पेशेंट केयर एलाउंस, होम्योपैथ फार्मासिस्टो के पंजीकरण, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एलोपैथिक का वेटरनरी फार्मासिस्ट के पद पर तैनाती, वेटनरी आयुर्वेद व होम्योपैथ फार्मासिस्टों के कैडर में उच्च पदों का सृजन, पदोन्नति व नियमावली का प्रख्यापन आदि प्रमुख मुद्दों पर शासन का ध्यान आकर्षण करने हेतु प्रदेश के सभी एलोपैथी, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ, वेटरनरी, संविदा, जेल और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों व अन्य विभागों के फार्मासिस्ट राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर दिनाँक 20-21 अप्रैल को काला फीता बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे, 22 अप्रैल को मोटर साइकिल रैली के बाद 23 व 24 अप्रैल को कार्य बहिष्कार भी करेंगे।

श्री यादव ने कहा कि परिषद से सम्बद्ध सभी संघो की बैठक में आरोग्य मेले के संबंध में निर्णय लिया गया है । वहीं 2 फरवरी को परिषद की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व से ही आंदोलन की घोषणा की गई है।शासन स्तर पर हुए समझौतों के बावजूद क्रियान्वयन ना होने के कारण कई सांकेतिक आंदोलनों के बाद इस आंदोलन की घोषणा की गई है।

राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव एवं महामंत्री अशोक कुमार ने चिंता व्यक्त की कि शासन स्तर पर कई बार हुए समझौतों व वार्ताओं के बाद भी फार्मासिस्ट संवर्ग की समस्याएं लंबित हैं। वेतन समिति की रिपोर्ट शासन के पास गत 2 वर्ष से अनिर्णीत है । फार्मेसिस्ट संवर्ग के साथ औषधि निरीक्षकों का भी वेतन उच्चीकरण के संबंध में समिति की रिपोर्ट शासन के पास है । प्रदेश में मात्र 100 ड्रग इंस्पेक्टर तैनात हैं, जिससे फार्मेसी सेवाओ का प्रभावी निरीक्षण संभव नहीं है लगभग 400 नए पदों के सृजन की पत्रावली वर्षों से भटक रही है। लगभग 2 वर्ष पूर्व हुए शासनादेश के बावजूद कार्यरत होम्योपैथिक फार्मासिस्टो का पंजीकरण अभी तक नहीं किया गया और जिन पदों के सृजन पर सहमति बन चुकी है उनके शासनादेश निर्गत नहीं हो पा रहे हैं।

आयुर्वेद विधा के फार्मासिस्ट के पुनर्गठन की पत्रावली भी लंबित है, 2017 से ए सी पी का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है, वरिष्टता सूची नहीं बनी है जिससे पदोन्नतिया नहीं हो पा रही है। 27/05/2019 को निदेशक से 5 बिंदुओं पर सम्पन्न हुई वार्ता में उपरोक्त पर सहमति व्याप्त है पर क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुई, आयुर्वेद के निद्देशक द्वारा संवर्ग को सहयोग नही किया जा रहा है।

पशुपालन विभाग में एलोपैथी विधा की औषधियां वितरित होती हैं, फार्मेसी एक्ट 1948 के अनुसार पशु चिकित्सालय में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एलोपैथी नियुक्त होने चाहिए । न्यूनतम योग्यता डिप्लोमा फार्मासिस्ट एलोपैथिक निर्धारित होने के बावजूद नियमावली संशोधन में अनेक अड़चनें पैदा की जा रही हैं एवं अनैतिक रूप से विधि के विपरीत अवैध पैरा वेटरनरी कौंसिल बनाने का प्रस्ताव शासन द्वारा किया जा रहा है। पदोन्नति भी बाधित हैं। जिला अध्यक्ष एस एन सिंह, सचिव जीसी दुबे ने बताया कि लखनऊ में सभी विभागों में कार्यरत फार्मेसिस्ट अपनी मांगों के लंबित रहने से आक्रोशित हैं।

बैठक में संविदा फार्मासिस्ट की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। एनएचएम में कार्यरत संविदा फार्मेसिस्ट का वेतन पुनरीक्षण नहीं हो सका है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार समान कार्य समान वेतन दिया जाना आवश्यक है जो नहीं हो पा रहा है। वहीं कुछ कार्यदाई संस्थाओं द्वारा सेवायोजित फार्मासिस्टो की सेवा समाप्त कर दी गई है।

प्रदेश के फार्मासिस्टो में रोष व्याप्त है। इसलिए प्रदेश भर के सभी विधाओं के फार्मासिस्ट परिषद के आह्वान पर आंदोलन में शरीक होंगे।