लखनऊ। अगर बच्चों को रुक-रुककर पेशाब आ रही है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है क्योंकि हो सकता है कि बच्चे की किडनी गड़बड़ हो रही हो। यह महत्वपूर्ण बात संजय गांधी पीजीआई में चल रही अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में डॉ एमएस अंसारी ने बतायी।
उन्होंने बताया कि पेशाब की थैली यानी यूरेटर के पास बना वॉल्व कमजोर हो जाता है जिससे थोड़ी सी पेशाब किडनी में ही रुक जाती है। डॉ अंसारी ने बताया कि लेकिन दवा के एक डोज से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। संजय गांधी पीजीआई में यह इलाज किया जा रहा है। इसके इलाज के लिए दवा का एक डोज कमजोर हो चुके वॉल्व में डाल दिया जाता है। इसके इलाज में लगभग 50 हजार रुपये का खर्च आता है।
डॉ. अंसारी ने बताया कि कई बच्चों में यूरेटर और ब्लेडर के बीच में बना वॉल्व पैदाइशी कमजोर होता है। इससे वॉल्व का रास्ता टेढ़ा हो जाता है। रास्ता टेढ़ा होने से पेशाब वापस किडनी में चली जाती है। उन्होंने बताया कि चूंकि शुरुआत में इससे कोई परेशानी नहीं महसूस होती है, इसलिए माता-पिता को भी इसकी जानकारी नहीं होती है लेकिन बाद में पांच से छह वर्ष के होने के बाद माता-पिता इलाज के लिए सम्पर्क करते हैं।

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