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सिस्टम वारंटी में… फिर भी एएमसी का अग्रिम भुगतान

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों की सुविधा के लिए बने सेंट्रल पेशेंट मेनेजमेंट सिस्टम(सीपीएमएस) की स्थापना और संचालन को लेकर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इसका कारण है कि इस सिस्टम को करोड़ों खर्च करने के बाद भी  केजीएमयू ने मेसर्स यूड फेैंटेसी कंपनी से निर्मित कराया था, उस सॉफ्टवेयर की स्थापना से लेकर संचालन तक अनियमितताओं का मकड़जाल उलझा हुआ है। आलम है कि निर्मिता कंपनी को सीपीएमएस उपकरण स्थापना के पूर्व ही वार्षिक अनुरक्षण का भुगतान कर दिया गया जबकि स्थापना के बाद पांच वर्ष तक कंपनी द्वारा वारंटी का प्रस्ताव दिया गया था। उक्त अनियमितता को लेकर परफॉर्मेंस रिपोर्ट में आपत्ति जतायी गयी है।

केजीएमयू को ऑन लाइन संसाधन युक्त बनाने के साथ ही मरीजों के चिकित्सकीय रिकॉर्ड की सुरक्षा एवं इलाज सुविधा के लिए स्थापित सीपीएमएस सिस्टम के निर्माण, इंस्टालेशन व संचालन को लेकर मतभेद उजागर हो रहे हैं। सीपीएमएस की स्थापना के पूर्व यूपीसीएल कंपनी को उपकरणों की मरम्मत के लिए लाखों रुपयों का प्रतिवर्ष के आधार पर अनुरक्षण मद में भुगतान करने का खुलासा हुआ है, जबकि यूपीसीएल ने पांच वर्ष तक वारंटी दिये जाने का प्रस्ताव दिया था। इस सम्बन्ध में आईटी सेल के चेयरमैन डॉ.आशीष वाखलू का स्पष्ट कहना है कि आईटी सेक्शन का भुगतान केजीएमयू के कुलपति प्रो.रविकांत व वित्त अधिकारी मुकुल अग्रवाल द्वारा किया जाता है। वारंटी अवधि में एएमसी भुगतान संबन्धी जानकारी उन्हें नहीं है, जबकि वित्त अधिकारी मुकुल अग्रवाल का कहना है कि वे बीते कई दिनों से अवकाश पर हैं इसलिए बिना फाइल का अवलोकन किये जानकारी देना संभव नहीं है। वहीं शहर से बाहर होने की वजह से कुलपति प्रो.रविकांत से भी संपर्क नहीं हो सका।

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