Friday , August 27 2021

अपने जीवन पर दूसरों का नहीं अपना नियंत्रण रखें महिलायें

 

प्रो निशी पाण्डेय का स्वागत करतीं डॉ चंद्रावती, डॉ प्रीती कुमार व डॉ मंजू शुक्ला।

लखनऊ। पुरुष और स्त्रियों के बीच अभी भी काफी असमानता है इसे खत्म होने में अभी समय लगेगा, महिलाओं को चाहिये कि वे निडर बनें, अपनी स्वीकार्यता के लिए पुरुषों की सहमति का इंतजार न करें तथा अपने जीवन पर अपना खुद का नियंत्रण रखें। इसके अतिरिक्त अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें, शास्त्रों में भी कहा गया है कि आपका शरीर सबसे पहले है, स्वास्थ्य है तो सब कुछ है।

नारी स्वास्थ्य पहल का आयोजन

यह आह्वान लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. निशी पाण्डेय ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान एनबीआरआई में मॉर्निंग वाक के समय आयोजित नारी स्वास्थ्य पहल कार्यक्रम में किया। कार्यक्रम का आयोजन स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ मंजू शुक्ला, डॉ प्रीति कुमार ने नॉर्थ जोन युवा फॉगसी टीम के साथ फेडरेशन ऑफ ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटीज ऑफ इंडिया फॉगसी के तत्वावधान में किया। मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए प्रो निशी पाण्डेय ने इस विशेष दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि यह दिवस पुरुषों के खिलाफ नहीं है, बल्कि मैं पुरुषों से यह कहना चाहती हूं कि वे नारी के साथ खड़े हों, उसके प्रति संवेदनशील रहें, इस दिवस पर मैं उन्हें भी बधाई देती हूं।

नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने के बाद सन्देश देते कलाकार

नारी के जीवन की समस्याओं पर नुक्कड़ नाटक

इससे पूर्व कृष्णा मेडिकल सेंटर के नर्सिंग स्टूडेंट्स ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नारी संघर्ष जन्म से मृत्यु तक की खूबसूरत प्रस्तुति दी। इस नाटक निर्देशन डॉ तेजल ने किया। नाटक के माध्यम से नारी के जीवन में होने वाली समस्याओं जैसे छेड़छाड़, एसिड हमला, कन्या भू्रण हत्या एवं घरेलू हिंसा का मंचन किया गया।

स्तन की 80 से 85 फीसदी गांठें कैंसर नहीं होतीं

कैंसर विशेषज्ञ डॉ विवेक गर्ग ने इस अवसर पर स्तन कैंसर के प्रति जागरूक रहने का आह्वान करते हुए बताया कि गांव में एक लाख में 18 तो शहरों में एक लाख में 28-32 महिलाओं में स्तन कैंसर की शिकायत पायी गयी है। इसके कारणों के बारे में उन्होंने बताया कि देर से शादी, देर से बच्चा पैदा होना, स्तनपान न कराना, व्यायाम न करना जैसे अनेक कारणों से यह हो जाता है। उन्होंने इस अवसर पर महिलाओं द्वारा स्वयं स्तन में गांठ का चेकअप करने का तरीका भी बताया, उन्होंने यह भी कहा कि स्तन में पायी जाने वाली 80 से 85 प्रतिशत गांठें कैंसर नहीं होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब ऐसी दवायें और टेक्नीक आ गयी हैं जिनसे कैंसर के इलाज का शरीर पर साइड इफेक्ट नहीं होता है और न ही स्तन को हटाने की जरूरत रहती है। उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं के मां की साइड यानी मां, मौसी किसी को स्तन कैंसर हुआ है तो उन्हें कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। अत: उन्हें सावधानी बरतकर जागरूक रहने की जरूरत है।

नारी ही करती है नारी का शोषण

एनबीआरआई के डॉ प्रमोद शिकरे ने बेटियों का महत्व बताते हुए कहा कि कभी-कभी यह देखकर अफसोस होता है कि नारी ही नारी का शोषण करती है और गर्भ में पल रही लडक़ी को देखकर गर्भपात के लिए तैयार हो जाती है। उन्होंने आह्वïान किया कि इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। सरस्वती डेंटल कॉलेज की डॉ मधु माथुर ने एक गीत के जरिये मां और बेटी के बीच संवाद को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।

बेटियों से करें दोस्ताना व्यवहार

डॉ अपेक्षा विश्नोई ने किशोरावस्था में होने वाले बदलावों का जिक्र करते हुए माताओं से आह्वान किया कि उन्हें अपनी बेटियों से दोस्ताना व्यवहार करते हुए उनकी समस्याओं के बारे में पूछना चाहिये क्योंकि इस अवस्था में होने वाले बदलावों को लेकर वह इधर-उधर से जानकारी ढूंढऩे का प्रयत्न करते हैं इसलिए बेहतर होगा कि यह जानकारी मां बेटी को देेे। मांओं को बेटी को कुपोषण, मोटापा से बचाने पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अपनी बेटियों को समझाएं कि जीरो फिगर के चक्कर में वह कुपोषण की शिकार न हों, गुस्सा न करें, समझा कर अपनी बात मनवायें साथ ही यह भी ध्यान रखें कि आप अपने बच्चों के रोल मॉडल होते हैं इसलिए आप भी वैसा ही अनुसरण करें जो बच्चों से चाहती हैं। बच्चों को तनाव में न रखें, उन पर प्रेशर न डालें। अपने बेटों को लड़कियों की इज्जत करना सिखायें।

सर्विक्स कैंसर के लिए पेप्समीयर टेस्ट जरूरी

डॉ अंजना जैन ने इस अवसर पर सर्विक्स कैंसर यानी बच्चेदानी के मुख के कैंसर के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि 20 से 25 वर्ष की आयु वाली महिलाओं को हर तीन साल में एक बार पेप्समीयर टेस्ट कराना चाहिये, इस टेस्ट से सर्विक्स कैंसर की प्राथमिक स्टेज से ही कैंसर का पता चल जाता है जिससे उपचार करना संभव हो जाता है। उन्होंने इससे बचाव के टीके के बारे में भी बताया कि यह 14 वर्ष की आयु तक की लड़कियों को लगाया जाता है। इस मौके पर सर्विक्स कैंसर के प्रति गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलाने के लिए डॉ स्मिता को वरिष्ठ गायनाकोलॉजिस्ट डॉ चंद्रावती ने सम्मानित किया। केके हॉस्पिटल की डॉ अनीता सिंह ने आये हुए अतिथियों का धन्यवाद अदा किया। मंच संचालित करने की जिम्मेदारी डॉ रश्मि ने निभायी। इस अवसर पर एक स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया जिसमें बोन मैरो डेंसिटी, ब्लड प्रेशर, हीमोगलोबिन का नि:शुल्क परीक्षण किया गया। इस अवसर पर डॉ पीके गुप्ता, डॉ रमा श्रीवास्तव, डॉ अनिल खन्ना, डॉ गीता खन्ना, डॉ वारिजा सेठ, डॉ शाजिया सिद्दीकी, डॉ सुनीता चन्द्रा, डॉ दीपा कपूर सहित अनेक चिकित्सक व डेली मॉर्निंग वाकर उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eleven + one =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com