-भेदभाव के विरोध में सीएचसी-पीएचसी पर तैनात बॉन्डेड मेडिकल ऑफीसर्स आंदोलनरत, 1090 चौराहे पर निकाला कैंडिल मार्च

सेहत टाइम्स
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बॉन्ड के तहत अनिवार्य सेवा दे रहे चिकित्सा अधिकारियों को मिलने वाले वेतन में एक समानता न होने पर विरोध जताते हुए सीएचसी-पीएचसी पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों ने आंदोलन की राह पकड़ी है, इन चिकित्साधिकारियों ने मंगलवार की शाम को 1090 चौराहे पर कैंडिल मार्च भी निकाला। इन चिकित्सा अधिकारियों ने ₹5,400 ग्रेड पे / समकक्ष लेवल-10 वेतनमान के अनुसार वेतन समानता, भत्ते सहित अन्य मांगें पूरी करने का अनुरोध किया है।
इस बारे में जानकारी देते हुए बॉन्डेड चिकित्सा अधिकारी डॉ शिवम शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के 2019 एवं 2020 बैच के लगभग 1,800 डॉक्टर अनिवार्य दो वर्षीय सरकारी सेवा बॉन्ड, जिसकी बॉन्ड राशि ₹10 लाख है, के अंतर्गत सेवा दे रहे हैं। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा द्वारा इन डॉक्टरों की पोस्टिंग राजकीय मेडिकल कॉलेजों (GMC) अथवा CHC एवं PHC में मेडिकल ऑफिसर के रूप में की गई है। उन्होंने कहा कि जिन बॉन्डेड चिकित्सकों की तैनाती मेडिकल कॉलेजों में है उनका मासिक वेतन एक लाख दस हजार से ज्यादा और जिन बॉन्डेड चिकित्सकों की तैनाती सीएचसी-पीएचसी में है, उनका 50 से 65 हजार रुपये मासिक वेतन है।
डॉ शिवम ने कहा कि यही नहीं सीएचसी-पीएचसी में ही जो दूसरे चिकित्सा अधिकारी नेशनल हेल्थ मिशन के द्वारा तैनात किये जाते हैं, उनका वेतन भी एक लाख और उससे ज्यादा है, जबकि हमारे और उनके कार्य के दायित्व समान हैं। उन्होंन कहा कि डॉ शिवम शुक्ला ने बताया कि जनरल मेडिकल कॉलेज GMC में आवंटित डॉक्टरों को ₹5,400 ग्रेड पे / समकक्ष लेवल-10 वेतनमान, साथ में DA, HRA, NPA एवं अन्य लागू भत्ते प्राप्त होते हैं, जिससे उनका मासिक पारिश्रमिक लगभग ₹1.10 लाख या अधिक है। इसी तरह CHC/PHC में कार्यरत NRHM मेडिकल ऑफिसरों को लगभग ₹1 लाख मासिक पारिश्रमिक प्राप्त होता है। इसके विपरीत, CHC/PHC में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत बॉन्डेड डॉक्टरों को ₹50,000–₹65,000 का निश्चित पारिश्रमिक दिया जाता है और संबंधित भत्ते नहीं दिए जाते। जिससे समान स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत डॉक्टरों के बीच वेतन का अंतर और अधिक स्पष्ट होता है।
डॉ शिवम ने बताया कि बॉन्डेड डॉक्टर OPD, IPD, इमरजेंसी, नाइट ड्यूटी एवं अन्य सभी निर्धारित चिकित्सकीय कार्य करते हैं तथा कई डॉक्टर दूरस्थ एवं कठिन क्षेत्रों में तैनात हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा, विशेषकर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, तथा आवास से संबंधित समस्याएं भी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान निश्चित पारिश्रमिक 2017 के सरकारी नोटिस के आधार पर निर्धारित है और लगभग नौ वर्षों से बिना वार्षिक वेतन वृद्धि के स्थिर है।
उन्होंने कहा कि इससे लगभग 1,800 डॉक्टर प्रभावित हैं, जिनमें लगभग 400 वरिष्ठ बैच और 1,400 वर्तमान बैच के डॉक्टर शामिल हैं। पिछले लगभग एक वर्ष से DGME, उत्तर प्रदेश को कई ज्ञापन एवं प्रतिनिधित्व दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस विषय पर लिखित एवं समयबद्ध समाधान प्राप्त नहीं हुआ है।
मांगें
चिकित्सकों ने मांग की है कि ₹5,400 ग्रेड पे / समकक्ष लेवल-10 वेतनमान के अनुसार वेतन समानता, DA, HRA, NPA एवं अन्य लागू भत्ते, 2018, 2019 एवं 2020 बैच द्वारा की गई पात्र सेवा के लंबित पारिश्रमिक/एरियर का भुगतान, वार्षिक वेतन वृद्धि की जाये उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर लिखित एवं समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम सेवा के लिए तैयार हैं। हम समानता, सम्मान और हमारी सेवा के अनुरूप उचित पारिश्रमिक की मांग करते हैं।

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