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कोई नया या असामान्य स्ट्रेन नहीं, मौसमी इन्फ्लुएंजा है H1N1

-केजीएमयू की सभी से अपील : जागरूक रहें, भयभीत नहीं

सेहत टाइम्स

लखनऊ। “स्वाइन फ्लू” से संबंधित हाल की खबरों और आमजन में बढ़ती चिंता को देखते हुए, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने जनहित में वर्तमान स्थिति के संबंध में तथ्यपरक जानकारी साझा करते हुए लोगों से अनावश्यक भय और घबराहट से बचने की अपील की है।

1. “स्वाइन फ्लू” क्या है?

“स्वाइन फ्लू” सामान्यतः इन्फ्लुएंजा A(H1N1)pdm09 के लिए प्रयुक्त शब्द है। वर्ष 2009 में महामारी का कारण बना, यह वायरस अब मनुष्यों में नियमित रूप से फैलने वाले मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरसों में से एक है। इसके साथ इन्फ्लुएंजा A(H3N2) और इन्फ्लुएंजा B भी मौसमी रूप से प्रसारित होते रहते हैं। इसलिए वर्तमान समय में H1N1 की पुष्टि होने का अर्थ यह नहीं है कि कोई नई महामारी शुरू हो गई है।

2. भारत में वर्तमान स्थिति : घबराने की आवश्यकता नहीं

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), ICMR और NCDC के साथ 25 अगस्त 2026 को वर्तमान इन्फ्लुएंजा स्थिति की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि घबराने या भयभीत होने का कोई कारण नहीं है। DHR-ICMR नेटवर्क द्वारा की जा रही जीनोमिक एवं महामारी-विज्ञान निगरानी के अनुसार वर्तमान में भारत में पाया जा रहा H1N1 वायरस पहले से ज्ञात मौसमी A(H1N1)pdm09 वंश से संबंधित है। कोई नया अथवा असामान्य रूप से अधिक विषाणुजनक स्ट्रेन तथा कोई असामान्य आनुवंशिक परिवर्तन नहीं पाया गया है। वायरस में पाए गए परिवर्तन मौसमी इन्फ्लुएंजा में समय-समय पर होने वाले सामान्य antigenic drift के अनुरूप हैं।

मौसमी अवधि में इन्फ्लुएंजा के मामलों में वृद्धि देखी जा सकती है। भारत सरकार द्वारा देशभर में इन्फ्लुएंजा-जैसी बीमारी (ILI), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI), प्रयोगशाला में वायरस की पहचान तथा बीमारी की गंभीरता की निरंतर निगरानी की जा रही है। स्वस्थ व्यक्तियों में अधिकांश इन्फ्लुएंजा संक्रमण हल्के होते हैं और स्वतः ठीक हो जाते हैं। केवल H1N1 रिपोर्ट पॉजिटिव होने का अर्थ यह नहीं है कि रोग गंभीर होगा या रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ेगी।

3. किन लोगों को विशेष सावधानी की आवश्यकता है?

छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा फेफड़े, हृदय, गुर्दे, यकृत या तंत्रिका तंत्र की पुरानी बीमारियों, मधुमेह, अत्यधिक मोटापे, कैंसर अथवा कम प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि सांस लेने में कठिनाई, लगातार या बढ़ता हुआ बुखार, सीने में दर्द, होंठ या शरीर का नीला पड़ना, अत्यधिक सुस्ती या चेतना में बदलाव, पर्याप्त पानी/तरल न ले पाना या डिहाइड्रेशन, ऑक्सीजन स्तर कम होना अथवा प्रारंभिक सुधार के बाद अचानक स्थिति बिगड़ना दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

4. क्या बुखार और खांसी वाले प्रत्येक व्यक्ति को H1N1 की जांच करानी चाहिए?

नहीं, भारत सरकार/NCDC के दिशा-निर्देश रोगियों के क्लिनिकल वर्गीकरण पर आधारित हैं। हल्के एवं बिना जटिलता वाले इन्फ्लुएंजा-जैसे संक्रमण में सामान्यतः H1N1 जांच की आवश्यकता नहीं होती। जांच मुख्यतः गंभीर या जटिल बीमारी वाले रोगियों तथा उन परिस्थितियों में की जाती है जहां उपचार करने वाला चिकित्सक इसे चिकित्सकीय रूप से आवश्यक समझता है। बिना आवश्यकता के जांच कराने से अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जबकि हल्के मामलों के उपचार में इससे कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता।

5. कौन-सी जांच की जाती है और कब?

जहां प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि आवश्यक हो, वहां रियल-टाइम RT-PCR अनुशंसित आणविक जांच है। इसकी रिपोर्ट मिलने में सामान्यतः 2–3 दिन लग सकते हैं। जांच के लिए नाक-गले से उपयुक्त स्वाब लिया जाता है। गंभीर निमोनिया वाले कुछ रोगियों में निचले श्वसन तंत्र से नमूना लेना आवश्यक हो सकता है। नमूना लक्षण शुरू होने के बाद यथाशीघ्र, प्राथमिक रूप से पहले 48 घंटों के भीतर, तथा जहां संभव हो एंटीवायरल दवा शुरू करने से पहले लिया जाना चाहिए। हालांकि, गंभीर रूप से बीमार रोगी का उपचार केवल जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा में विलंबित नहीं किया जाना चाहिए।

6. उपचार उपलब्ध 

अधिकांश बिना जटिलता वाले मामलों में आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ तथा लक्षणों के अनुसार उपचार से रोगी ठीक हो जाते हैं। ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं केवल चिकित्सकीय सलाह पर लेनी चाहिए। गंभीर बीमारी वाले अथवा उच्च जोखिम वाले रोगियों में इनका विशेष महत्व है। गंभीर इन्फ्लुएंजा के रोगियों का उपचार समय पर प्रारंभ किया जाना चाहिए तथा प्रयोगशाला रिपोर्ट की प्रतीक्षा में आवश्यक उपचार को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए। एंटीबायोटिक दवाएं इन्फ्लुएंजा वायरस पर प्रभावी नहीं होतीं। इन्हें नियमित रूप से नहीं लेना चाहिए और केवल तभी दिया जाना चाहिए जब चिकित्सक को साथ में बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका हो।

7. साधारण सावधानियों से संक्रमण का प्रसार कम किया जा सकता है

इन्फ्लुएंजा-जैसे लक्षण होने पर जहां तक संभव हो घर पर रहें और बुजुर्गों तथा अन्य उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचें। नियमित रूप से हाथों की स्वच्छता रखें तथा खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। लक्षण वाले व्यक्ति विशेष रूप से अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जाते समय अथवा अन्य लोगों के निकट रहने की स्थिति में उचित रूप से फिट होने वाला मास्क पहनें। बंद स्थानों में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी उपयोगी है। स्वस्थ व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय सलाह के ओसेल्टामिविर अथवा एंटीबायोटिक दवाएं बचाव के लिए लेने की आवश्यकता नहीं है।

8. टीकाकरण

मौसमी इन्फ्लुएंजा टीकाकरण विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी है जिनमें बीमारी की जटिलताओं का जोखिम अधिक है तथा जिनके लिए चिकित्सकीय रूप से टीकाकरण की सलाह दी गई है। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन की संरचना समय-समय पर वर्तमान में प्रसारित वायरस के अनुसार संशोधित की जाती है और भारत में NCDC/ICMR की निगरानी प्रणाली टीकाकरण संबंधी अनुशंसाओं में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

KGMU का सरल संदेश

“जागरूक रहें, भयभीत नहीं। H1N1 वर्तमान में मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में प्रसारित हो रहा है। भारत सरकार और ICMR की निगरानी में कोई नया या असामान्य स्ट्रेन नहीं पाया गया है। अधिकांश संक्रमण हल्के होते हैं। प्रत्येक बुखार या खांसी में H1N1 जांच की आवश्यकता नहीं होती। उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों तथा चेतावनी वाले लक्षण विकसित होने पर शीघ्र चिकित्सकीय सलाह लें। अनावश्यक जांच, स्वयं दवा लेने और अफवाहों से बचें।” माइक्रोबायोलॉजी विभाग, KGMU उपयुक्त प्रयोगशाला जांच, संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण तथा श्वसन वायरसों की निगरानी के लिए क्लिनिकल विभागों एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ निरंतर कार्य कर रहा है।