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लावारिस मरीजों की शिद्दत के साथ देखभाल की वजह ‘नौकरी की मजबूरी’ से ज्यादा ‘सेवाभाव’

-केजीएमयू के न्यूरो सर्जरी विभाग में एक साल से भर्ती किशोर को मिला शेल्टर होम

प्रो बीके ओझा

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के न्यूरो सर्जरी विभाग में एक नहीं ऐसा अनेक बार होता है कि एक्सीडेंट होने के बाद पुलिस या अन्य लोगों द्वारा भर्ती कराये गये मरीज को ठीक होने के बाद भी उसे भर्ती रखना मजबूरी बन जाती है, क्योंकि उस मरीज के घरवालों के बारे में जानकारी न होने के चलते डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता है। विडम्बना यह कि मरीज स्वयं भी नहीं बता पाता है कि उसका घर कहां है। ऐसे में उसकी देखभाल एक पारिवारिक सदस्य की तरह विभाग के लोग करते हैं। यह देखभाल सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक पारिवारिक सदस्य जैसी सेवा की तरह होती है। ऐसे ही एक ​किशोर मरीज, जिसे ट्रेन से गिरने के बाद पुलिस ने भर्ती कराया था, को एक साल बाद बीती 14 अगस्त को मोहनलाल गंज स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी में शिफ्ट किया गया है।

परिस्थितिवश भर्ती मरीज की देखभाल करने वाली समर्पित टीम में शामिल रेजीडेंट डॉ अभिषेक सिंह व अन्य रेजीडेंट्स, सिस्टर प्रिया राय सहित पूरी टीम का हौंसला बढ़़ाते हुए उन्हें हरसंभव सहयोग करने वाले न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो बीके ओझा ने इस बारे में जानकारी देते बताया कि मरीज की उम्र लगभग 17 – 18 साल है। यह 7 अगस्त 2025 को बाराबंकी में ट्रेन से गिर गए थे और वहां से पुलिस कांस्टेबल के द्वारा हमारे यहां 7 अगस्त को ही लाकर भर्ती किए गए थे। उनके सीटी स्कैन के हिसाब से सिर में अत्यंत गंभीर चोट थी जिसके लिए विभाग द्वारा सभी व्यवस्था करा कर, 8 अगस्त 2025 को इनका ऑपरेशन किया गया।

डॉ अभिषेक – अतुल उपाध्याय – प्रिया राय

डॉ ओझा ने बताया कि धीरे-धीरे किशोर मरीज अब यह काफी ठीक हो गया हैं, परंतु अभी भी कुछ स्पष्ट बोल नहीं पाते। जो कुछ भी यह थोड़ा बहुत बोल पाते हैं उससे यह समझ में आता है कि शायद यह बाराबंकी या बंकी के रहने वाले रहे होंगे। इस कारण हमारे डिपार्टमेंट के एनेस्थीसिया टेक्नीशियन अतुल उपाध्याय इनको लेकर के बाराबंकी और बंकी की कई जगहों पर गए, कई स्कूलों में गए, कई थानों में गए, कई मंदिरों में गए, रेलवे स्टेशन पर गए, ताकि कोई इन्हें पहचान ले, लेकिन इनकी पहचान वहां पर भी नहीं हो सकी।

प्रो ओझा ने बताया कि इनको विभाग में भर्ती हुए 1 साल से ऊपर हो गया है। अब यह ठीक से स्वयं ही खाना पीना करते हैं, टॉयलेट जाते हैं और लगभग सभी को मुस्कुरा कर नमस्ते करते हैं, लेकिन अभी भी बोल नहीं पाते हैं। इनके इलाज में सिस्टर प्रिया राय की संपूर्ण टीम और डॉक्टर अभिषेक सिंह वह अन्य रेजिडेंट्स की टीम ने बहुत मेहनत की है। हम लोगों ने बहुत प्रयास किया कि इनका किसी प्रकार घरवालों से संपर्क हो जाए पर ऐसा कुछ हो नहीं पाया।

उन्होंने बताया कि यह मरीज अभी तक शताब्दी फेस टू के पंचम तल पर न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती थे, अब यह इस स्थिति में पहुंच गए थे कि इन्हें किसी डेस्टिट्यूट होम में रखा जा सकता था। इसके लिए हम लोगों ने कई लोगों से संपर्क किया। इन लोगों में से गुरप्रीत सिंह लांबा आगे आए, जिन्होंने पूर्व में भी हम लोगों के कुछ मरीजों को चैरिटी होम्स में शिफ्ट करने में मदद की है। उनके प्रयास और मदद से बीते 14 अगस्त को इस मरीज को मोहनलालगंज के एक शेल्टर होम मिशनरीज आफ चैरिटी में शिफ्ट कर दिया गया है।