योग जोड़ता है आत्मा से, मन विचलित नहीं होता

केजीएमयू की टीम ने मोदी संग किया योग, कन्वेंशन सेंटर मेंं भी हुआ आयोजन

‘मेडिकल प्रेक्टिशनर्स के लिए योग’ कार्यक्रम में बतायी गयीं ज्ञानवर्धक बातें

लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यहां रमा बाई अम्बेडकर मैदान पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संग जिन 51000 लोगों ने योग किया उनमें किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय की तरफ से 800 लोगों ने योग किया। इस टीम का नेतृत्व केजीएमयू की योग इकाई के प्रभारी प्रो दिवाकर दलेला ने किया। इस टीम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. एसएन शंखवार, चिकित्सा अधीक्षक प्रो विजय कुमार, कुलानुशासक प्रो आरएएस कुशवाहा, प्रो विभा सिंह चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकाय सदस्य, एमबीबीएस एवं नर्सिंग तथा पैरा मेडिकल संकाय के विद्यार्थी शामिल रहे। योग की महत्ता को देखते हुये इसके प्रसार एवं प्रचार के लिए यूनाईटेड नेशन द्वारा वर्ष 2015 से प्रत्येक वर्ष 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। योग भारत वर्ष की प्राचीन परम्परा है, योगाभ्यास करने वालों को मानसिक शांति के साथ ही साथ स्वस्थ शरीर और सुंदर मन प्राप्त होता है तथा व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होताहै। आज के परिप्रेक्ष्य में योग स्वस्थ रहने के साधन के साथ ही साथ मानवता को जोडऩे का भी साधन बन गया है।

नये आयामों को छूने के साथ पुरातन को भी सम्मान दे रहा केजीएमयू

किंग जार्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय आधुनिक भारत का एक 100 वर्षो से भी ज्यादा पुराना चिकित्सा संस्थान है तथा यह संस्थान आज चिकित्सा के क्षेत्र में नित नये आयामों को जहां छू रहा है वहीं संस्थान द्वारा अपनी पुरातन परम्पराओं को भी पूर्णतया सम्मान दिया जाता है। इसी क्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा भी प्रत्येक वर्ष की भांति आज भी अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रो वाणी गुप्ता के नेतृत्व में प्रात: 7:00 से 7:45 बजे तक एक योग प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के साईंटिफिक कंवेंशन सेण्टर में किया गया जिसमें चिकित्सा विश्व विद्यालय के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। ज्ञात हो कि चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में रोजाना 1 जून से योग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था और लोगों को योग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में आज अपराह्न 2:00 बजे से 4:00 बजे के मध्य योगा फॉर मेडिकल प्रैक्टिशनर शीर्षक के अन्तर्गत एक व्याख्यान का आयोजन संस्थान के कलाम सेण्टर में किया गया।

वृत्ति पर नियंत्रण दिलाता है योग : प्रो. भट्ट

व्याख्यान में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मदन लाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि योग की पद्धति ऐसी है जिसके माध्यम से हम अपने जीवन स्तर को उच्च स्तर तक ले जा सकते हैं। योग विद्या में 100 से अधिक योग विद्यायें एवं पद्धति हैं। योग विद्या के सारे पहलुओं को जीवन में उतार कर हम अपनी जीवन यात्रा में सुलभता से आगे बढ़ाना सुनिश्चित करते हैं और अपनी वृृत्ति पर नियंत्रण करते हैं।

तनाव दूर करने में सहायक है योग : डॉ केके गुप्ता

निदेशक चिकित्सा शिक्षा,उप्र, डॉ केके गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा चिकित्सक का व्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय होता है जिसमें मानव सेवा स्वत: ही निहित है। वर्तमान समय में हमारी तनावपूर्ण मानसिक स्थिति और परिस्कृत जीवन शैली को योग के माध्यम से सही किया जा सकता है और एक स्वस्थ जीवन जीया जा सकता है।

श्वांस पर नियंत्रण से होता है मस्तिष्क पर नियंत्रण : नवल चंद्र पंत

कार्यक्रम में योगदा समाज के मुख्य वक्ता नवल चंद्र पंत ने कहा कि मानव जीवन का लक्ष्य हर परिस्थिति में सुख को प्राप्त करना है और यह परम सुख संसारिक वस्तुओं से नहीं प्राप्त किया जा सकता है। इस सुख को प्राप्त करने के लिए तीन आवश्यक वस्तुयें हैं। प्रथम वस्तु सबसे बड़ा महत्वपूर्ण शरीर दूसरा किसी तरह की योग पद्धति और तीसरा उस पद्धति को सीखने के लिए गुरू। सारी योग पद्धतियों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सभी पद्धतियां श्वांस पर नियंत्रण करना सिखाती है। जब श्वांस पर नियंत्रण होता है तो चेतना और मष्तिस्क पर नियंत्रण हो जाता है। जिससे हम परम चेतना को देखने लगते हैं। विद्यार्थियों के लिए सबसे ज्यादा महत्व समय का प्रबंधन करना होता है। हम अपनी दिनचर्या को चार भागों में विभाजित करके जो सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक है उसे करना चाहिए। हमे समय को बर्बाद करने वाले कार्यों को छोड़ देना चाहिए।

नन्हे शिशु भी करते हैं कई प्रकार के आसन : तनुज नारायण

आर्ट ऑफ लिविंग के तनुज नारायण ने कहा कि स्वास्थ्य का तात्पर्य स्वमेंस्त। अस्तित्व के सात स्तर होते हैं। शरीर, श्वांस, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार और आत्मा। बीमारियों का कारण मन है। जीवन में जब तनाव आता है तो उससे ही शरीर में बीमारियां जन्म लेने लगती हैं। जीवन में समस्या आने से मन नकारात्मक हो जाता है। योग को चित्तवृत्ति निरोधक कहा जाता है और वृत्ति का नियंत्रण योग के माध्यम से किया जाता है। योग के द्वारा हम आत्मा से जुड़ जाते हैं। जिससे जीवन के उतार-चढ़ाव से मन प्रभावित नहीं होता है। नन्हे शिशु भी कई प्रकार के योगासन करते हैं। अपने आपको तथा अपनी अंगुलियों को कई मुद्राओं में बांध लेता है। जिससे उसके शरीर के विशैले तत्व निकलकर उसके शरीर का शुद्धिकरण हो जाता है। इस समय हमें अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोडऩे की आवश्यकता है जिससे बढ़ती बीमारियों को रोका जा सके।

केजीएमयू के फिजियोलॉजी विभाग में योग पर हो रही रिसर्च : प्रो.सुनीता तिवारी

व्याख्यान में फीजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो सुनीता तिवारी ने कहा कि चिकित्सा विश्वविद्यालय में योग पर फीजियोलॉजी विभाग द्वारा रिसर्च की जा रही है। और आधुनिक चिकित्सा के साथ इसकी उपयोगिता पर भी शोध किया जा रहा है। कार्यक्रम में अधिष्ठाता नर्सिंंग प्रो. पुनीता मानिक, प्रो. नरसिंह वर्मा एवं कार्यक्रम की संयोजक प्रो. वाणी गुप्ता के साथ विभिन्न संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बलरामपुर, सिविल, लोहिया अस्पतालों में भी आयोजित हुआ योग

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन अनेक संस्थानों मेंं किया गया। लखनऊ में बलरामपुर अस्पताल, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल, डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय सहित अनेक संस्थानों के साथ ही जिला कारागार व अनेक छोटे-बड़े पार्कों में योग का संचालन किया गया।