किलकारी गूंजने की खुशी में दिया जाने वाला ‘नेग’ अब मौत से जूझते बीमार के इलाज का ‘सुविधा शुल्‍क’ बन गया

-झलकारी बाई अस्‍पताल में प्रसूता की मौत के बाद फि‍र उठे सवाल
-राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री ने की असमानता की व्‍यवस्‍था पर चोट

धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के वीरांगना झलकारी बाई अस्‍पताल में सोमवार को प्रसूता की मौत को लेकर जो कारण बताये जा रहे हैं, वे मानवता को शर्मसार, उस पर होते प्रहार की भयावह तस्‍वीर दिखाते हैं। प्रसव के केस में किस तरह से पैसे ऐंठने के लिए अस्‍पताल के स्‍टाफ ने पैंतरे अपनाये जिसकी परिणति प्रसूता की मौत के रूप में हुई। नवजात को उसकी मां की ममता से महरूम कर दिया, पति से पत्‍नी छीन ली। फि‍र से एक बार जांच होगी, पूछताछ होगी, हो सकता है कोई दोषी भी ठहरा दिया जाये लेकिन सरकारी अस्‍पतालों में लम्‍बे समय से चला आ रहा वसूली का यह खेल रुकता नहीं दीख रहा है।

शिशु पैदा होने की खुशी के नाम पर लिया जाने वाला यह नेग धीरे-धीरे ‘सुविधा शुल्‍क’ में बदल गया जो अब अस्‍पताल में मौत से जूझते बीमार के इलाज के लिए भी लिया जाना आम हो गया है। परेशान हाल व्‍यक्ति अपने मरीज को लेकर जब तक अस्‍पताल में रहे तब तक बराबर उसे चाय-पानी के नाम पर दक्षिणा देते रहना उसकी मजबूरी बन गया है, यही नहीं जब मरीज ठीक होकर घर जाता है तो फि‍र उससे वसूली करना तो मानो अस्‍पताल के स्‍टाफ का हक बन गया है।

 अशोक कुमार

नेग और सुविधा शुल्‍क लिये जाने के आरोप के बारे में जब हमने राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार से बात की तो उनका कहना था कि प्रसव हो या दूसरे मरीज के इलाज, इसके लिए इस तरह की वसूली कतई जायज नहीं ठहरायी जा सकती लेकिन एक ध्‍यान देने योग्‍य बात यह भी है कि इन परिस्थितियों के लिए जिम्‍मेदार कौन है, आखिर सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार समान कार्य के लिए समान वेतन सिद्धांत क्‍यों नहीं लागू करती है ? उन्‍होंने कहा कि नर्स का ही उदाहरण ले लें तो आयोग द्वारा चयनित नर्स का वेतन करीब 55 हजार रुपये है, जबकि ठेकेदारी प्रथा के चलते मिलने वाला वेतन मात्र 12 हजार, तो ऐसे में आउटसोर्सिंग से तैनात नर्स के मन में इस असमानता को लेकर जो कुंठा होती है, उसकी परिणति बेइमानी से पैसे कमाने के रूप में होती है, चूंकि अस्‍पतालों में पैसा कमाने का साधन मरीज ही है, इसलिए उसी के नाम पर शोषण होता रहता है। उन्‍होंने कहा कि मेरा मानना है कि जब तक सरकार समान कार्य समान वेतन नीति नहीं लागू करती है तब तक इस तरह के शोषण को रोक पाना बहुत मुश्किल है।

आपको बता दें कि हजरतगंज स्थित वीरांगना झलकारी बाई अस्‍पताल में सोमवार की रात्रि में प्रसूता की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों का आरोप है कि सामान्य प्रसव होने के बावजूद अस्पताल के स्टाफ ने पहले ऑपरेशन के नाम पर 50 हजार रुपये लेकिन असलियत खुलने के बाद नेग के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की। यही नहीं प्रसूता की तबीयत बिगड़ने पर उसे जो ऑक्‍सीजन लगायी गयी उसकी वाटर बॉटल में कीड़े बजबजा रहे थे। इससे पहले कि पानी बदला जाता, प्रसूता ने दम तोड़ दिया। यह देख स्टाफ मौके से भाग निकला। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने नाराज परिवारीजनों को किसी तरह शांत करवाया। अफसोस की बात यह है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद देर रात तक अस्पताल का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

मिली जानकारी के अनुसार लालबाग निवासी तेज कुमार की पत्नी सुनीता को सोमवार सुबह झलकारीबाई अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तेज के भाई विवेक के अनुसार अस्पताल स्टाफ ने पहले निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया, लेकिन वे लोग इसके लिए नहीं मानें। विवेक के मुताबिक नर्सें सुनीता को प्रसव कक्ष में ले गईं। थोड़ी देर बाद एक नर्स ने परिजनों को बताया कि बच्चा उल्टा है, इसलिए ऑपरेशन करना पड़ेगा। यही नहीं आरोप है कि जटिल ऑपरेशन की बात कहते हुए 50 हजार रुपये मांगे जाने लगे। परिजनों ने सुनीता को दिखाने को कहा तो नर्सें भला बुरा करने लगीं। इस पर परिवार की महिलाएं जबरन अंदर घुस गईं। घरवालों के अनुसार प्रसव कक्ष में सुनीता को बेटा पैदा हो चुका था। इसके बाद पोल खुलने से बौखलाई नर्सों ने 5 हजार रुपये नेग मांगना शुरू कर दिया। इस बीच सुनीता की तबीयत बिगड़ने लगी। यह देख घरवालों ने हंगामा किया तो वहां मौजूद दोनों नर्सें भाग गईं। कुछ देर बाद आईं नई नर्सें भी नेग पर अड़ गईं।

बताया जाता है कि घरवालों के विरोध पर नर्सें सुनीता का डिस्चार्ज करने का दबाव बनाने लगीं। थोड़ी देर बाद स्टाफ ने सुरक्षा गार्डों की मदद से घरवालों को जबरन अस्पताल से बाहर निकाल दिया। इस पर घरवालों ने अस्पताल के बाद हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अस्पताल के भीतर गई तो पता चला कि सुनीता की मौत हो चुकी है। यह खबर फैलते ही अस्पताल में मौजूद बाकी मरीजों के तीमारदार भी भड़क उठे। हंगामा शुरू हो गया और सड़क जाम कर दी गई।

सुनीता के देवर विवेक के मुताबिक स्टाफ ने शाम को दो यूनिट खून भी मंगाया, लेकिन उसे चढ़ाया नहीं गया। सुनीता को जो ऑक्‍सीजन मास्क लगाया गया उसकी वॉटर बॉटल में कीड़े बजबजा रहे थे। हालत गंभीर होने के बावजूद कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया।

इस प्रकरण में अस्‍पताल की सीएमएस डॉ सुधा वर्मा का कहना है कि प्रसूता को खून चढ़ाने के दौरान रिएक्शन हुआ है। खून की जांच करवाई जाएगी। ऑक्‍सीजन की वॉटर बॉटल में कीड़ों की शिकायत हुई है। इसकी हकीकत जांच के बाद ही सामने आएगी। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।