Thursday , September 2 2021

सरसों का तेल नाक में, ताजगी मन-मस्तिष्‍क में

आयुर्वेद चिकित्‍साधिकारी ने कहा, जटिल से जटिल बीमारी शरीर के शोधन से होती है दूर

बहराइच/लखनऊ। हार्ट ब्लाकेज हो या ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल, ट्राईग्लिसराईड, थायरायड हो, कोई घबराने की जरूरत नहीं है, आयुर्वेद ऐसी सम्पूर्ण चिकित्सा पध्दति है जो जटिल से जटिल बीमारी को शरीर के शोधन के साथ दूर करती है। बहुत सी औषधियां तो हमारे घर में ही खाने-पीने के सामान के रूप में मौजूद होती हैं।

 

यह बात विश्व स्वास्थ दिवस पर बहराइच के दूरस्थ ग्राम फिरोजपुरशाहपुर, कटका मरौथा ब्लाक जरवल,तहसील कैसरगंज के प्रज्ञा शिक्षण संसथान मे आयुष विभाग के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय कुन्डासर डॉ देवेश कुमार श्रीवास्तव ने चिकित्‍सालय परिसर में लगाये शिविर में आसपास से आए जन समूह को सम्‍बोधित करते हुए कही।

 

उन्‍होंने पैसे के अभाव में लंबे समय से बीमार ग्रामीणों को गांव में उपलब्ध पेड़ पौधों, किचेन में उपस्थित मसालों व भोजन से कैसे स्वस्थ बने रहें इसकी बहुत सारी जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि जैसे बरगद के पेड़ के पंचांग का काढ़ा पीने से बरगद जैसी शक्ति का संचार होता है, औरतों की माहवारी के लिए अशोक के पेड़ की छाल का काढ़ा, श्‍वेत प्रदर में शीशम के पत्तों को पीस कर थोड़ी सी फिटकरी मिला कर सेवन करने से, सांस, खांसी में गांव में उपलब्ध रूसा (वासा) का काढ़ा गुड़, कालीमिर्च डाल कर पीने से तत्काल खाँसी सांस में राहत मिलती है। कड़ुवा तेल की दो-दो बूंद नाक के दोनों छिद्रों में डाल लें तो मन-मस्तिष्‍क में ताजगी बनी रहती है।

डॉ देवेश ने बताया कि इसी प्रकार दांतों को जिंदगी भर स्वस्थ बनाये रखने के लिए बस नीम का सीका खाने के बाद कूच लें और घरेलू मंजन हल्दी, नमक, सरसों का तेल मिला कर दांत व मसूढ़ों की मालिश से दांत सशक्त व सफेद हो जाते है, दिमाग को तरोताजा व तेज करने के लिए दो बूंद सरसों का तेल दोनों नासा छेद में डालें, त्वचा रोग में मीठी-खट्टी चीजे न खायें। नीम, तुलसी की पत्ती प्रातः खाली पेट खायें, योग प्राणायाम सिखा कर लोगो प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहने की जानकारी दी और वृक्षारोपण के बारे जानकारी दी कि हम सभी अपने बच्चों के लिए पौधरोपण अवश्य करें आजकल मेरा मुख्य उद्देश्य लोगों को पेड़-पौधे दान देना और उसको बड़े होने तक ट्री गार्ड लगाकर बचाये रखने जरूरी है।

 

निशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर डॉ देवेश ने दर्द से पीड़ित मरीजों को अपनी रिलेक्सेशन थैरेपी द्वारा दर्द के मरीजों वा विकलांग जन की मुफ्त चिकित्सा की। उन्‍होंने संबोधित अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि धनात्मक सोच रखकर अपने अंदर हर पल अच्छाइयों का समावेश करने से शरीर व मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जिससे धनात्मक मस्तिष्क का विकास होता है।

 

उन्‍होंने कहा कि मन और शरीर का आपस मे गहरा संबंध है मन स्वस्थ रहेगा तो तन भी स्वस्थता की ओर अग्रसर होगा जिस तरह हम अपने अंदर प्राकृतिक तरीक़े से ऑक्सीजन लेते हैं, जो अच्छी चीज है और कार्बन डाई ऑक्साइड निकालते हैं जो कि खराब है। ठीक उसी तरह अपने अंदर अच्छाइयों का समावेश करना है, और बुराइयों को बाहर निकालना है।

 

डॉ देवेश ने इसी के साथ बताया कि आयुर्वेद ही एक ऐसी चिकित्सा पध्दति है जो स्वस्थ को स्वस्थ बने रहने के तरीके भी बताती है, यदि व्यक्ति अपने लिए समय दे, आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाये, नियम संयम से उचित आहार-विहार का पालन करे तो अस्वस्थ हो ही नहीं सकता है।

 

 

 

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