छह इंच से ज्यादा ऊंचाइयों वाली सीढ़ियां चढ़ रहे हैं तो हो जाइए सावधान

देश-विदेश के विशेषज्ञों का लखनऊ में लग रहा 23 और 24 को जमावड़ा

 

लखनऊ. ऑर्थराइटिस में सबसे ज्यादा ऑस्टियोऑर्थराइटिस होती है. इसके यूँ तो बहुत से कारण हैं लेकिन ऑस्टियोऑर्थराइटिस होने की एक वजह सीढ़ियों का ऊंचा होना भी है. जिन घरों या अन्य भवनों में ज्यादा ऊंची सीढ़ियाँ होती हैं, उनका इस्तेमाल करने वालों को ऑस्टियोऑर्थराइटिस का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए घर बनवाते समय ध्यान रखिये कि दो सीढियों के बीच का गैप छह इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. ऑस्टियोऑर्थराइटिस की वजह ज्यादा वजन होना भी है. इसलिय यह ध्यान देना चाहिए कि यह बढे नहीं अगर बढ़ रहा है तो शुरुआत में ही इस पर लगाम लगा लें.

 

आज यहाँ एक प्रेस कांफ्रेंस में केजीएमयू के गठिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ दास ने ऑस्टियोऑर्थराइटिस के विषय में जानकारियाँ दीं. उन्होंने बताया कि यहाँ लखनऊ में ऑस्टियोऑर्थराइटिस पर एक नेशनल कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है. यहाँ होटल क्लार्क्स अवध में होने वाला यह आयोजन 23 और 24 सितम्बर को होगा. उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देश और विदेश के कई स्पीकर भाग लेने आ रहे हैं.

 

 

ऑस्टियोऑर्थराइटिस के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका असर घुटने में होता है. अभी इसका स्थायी इलाज नहीं खोजा जा सका है. लेकिन इतना अवश्य है कि इलाज करने से तकलीफ में 50 फ़ीसदी आराम जरूर मिल जाता है. डॉ. दास ने बताया कि इस रोग की शुरुआत अब 30 से 40 वर्ष की आयु में होने लगी है. उन्होंने बताया कि यह देखा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह ज्यादा होता है. इसका एक बड़ा कारण पैर मोड़कर यानी उकडू बैठना है. उन्होंने कहा कि झाड़ू लगाने, पोछा लगाने, खाना बनाने, बर्तन मांजने में महिलाओं को अक्सर उकडू बैठना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हालांकि आजकल बहुत से घरों में खाना खड़े होकर ही बनने लगा है. इसी प्रकार झाड़ू, पोछे को भी खड़े-खड़े ही लगाना चाहिए.

 

 

उन्होंने कहा कि अगर प्रारम्भिक अवस्था में ऑस्टियोऑर्थराइटिस का पता चल जाये तो इसका इलाज संभव है, लेकिन प्रारंभिक अवस्था में मरीज समझ ही नहीं पाता है कि उसे ऑस्टियोऑर्थराइटिस हुआ है, क्यों कि घुटने में दर्द जैसे साधारण लक्षण को वह अनदेखा कर देता है. प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद डॉ. आरएन श्रीवास्तव ने बताया कि अगर घुटनों में दर्द हो तो डाक्टर को अवश्य दिखा लेना चाहिए, जिससे रोग को प्रारंभिक चरण में ही ठीक किया जा सके. उन्होंने बताया कि भारत में 60 वर्ष से ज्यादा की उम्र वाले 40 फ़ीसदी लोगों ऑस्टियोऑर्थराइटिस की शिकायत है.

 

 

डॉ. दास ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले दिनों जो सस्ते उपकरणों के बारे में आदेश किया है, उसमें यह जिक्र हैं कि दिव्यांग बनाने वाली ऑस्टियोऑर्थराइटिस चौथी बीमारी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 से 2007 तक केजीएमयू में किये गए सर्वे में देखा गया कि लखनऊ में करीब 10 फीसदी लोग ऑस्टियोऑर्थराइटिस के शिकार हैं. इनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी उम्र के लोग शामिल हैं. पत्रकार वार्ता में डॉ. रागिनी श्रीवास्तव और डॉ. पूजा धवन भी उपस्थित रहीं.