‘शरीर तो सावधान करता है, लेकिन हम होते नहीं’

बदलती जीवन शैली से उत्पन्न होने वाली बीमारियों पर मंथन

लखनऊ। आजकल बदलती जीवन शैली हमें कई प्रकार के रोग दे रही है.इन रोगों से पहले होने वाली दस्तक को हम अनसुना कर देते हैं, नतीजा यह होता है कि जिस बीमारी को हम रोक सकते थे, उससे हम ग्रस्त हो जाते हैं. यह बात कानपूर के होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. हर्ष निगम ने यहाँ आयोजित संगोष्ठी में कही. बदलती जीवन शैली के कारण स्वास्थ्य पर पड़ रहे गम्भीर खतरों के निदान एवं उसके होम्योपैथिक प्रबन्धन पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसाइटी द्वारा रविवार को गोमती नगर के होटल जे बी आर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

डॉ.हर्ष निगम ने बताया कि बदलती जीवन शैली लोगों को बीमार कर रही है। खराब जीवन शैली से होने वाले रोगों की जानकारी शरीर पहले से ही देने लगता है। लेकिन हम उसकों पहचान नहीं पाते या पहचान कर भी अनदेखा करते हैं। जिसका दुष्परिणाम बाद में बीमारी की शक्ल में उठाना पड़ता है। खराब जीवन शैली आज लोगों के बीमार होने बहुत बीमार होने की सबसे बड़ी वजह है। आगे चलकर गुर्दा रोग,लीवर रोग तथा मधुमेह जैसी बीमारियों को न्यौता देती है। उन्होंने बताया कि एक समय था जब 10 में से 01 व्यक्ति मेटाबोलिक सिंड्रोम का शिकार होता था,आज के दौर में 04 में से एक व्यक्ति इस सिड्रोम का शिकार है। मेटाबालिक सिंड्रोम में पेट का बढना सबसे पहले दिखाई देता है।

जरूरत है और शोध करने की : प्रो.एम एल बी भट्ट

संगोष्ठी का उद्घाटन केजीएमयू के कुलपति प्रो.एम एल बी भट्ट और होम्योपैथी के उप निदेशक डा. दिवाकर सिंह ने किया। इस मौके पर केेजीएमयू के कुलपति प्रो.एम एल बी भट्ट ने कहा कि होम्योपैथी दवाओं के माध्यम से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का उपचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में शोध की जरूरत है। होम्योपैथी के जनक हैनीमैन के आगे रिसर्च की जानी चाहिए।

गर्भधारण में हो रही परेशानी : डॉ दीपक शर्मा

दिल्ली से आये चिकित्सक डॉ.दीपक शर्मा के मुताबिक भागदौड़ भरी जिंदगी तथा आराम तलबी लोगों को बीमार बना रही है। यही कारण है कि मौजूदा समय में महिलाओं में पॉलिस्टिक ओविरियन सिंड्रोम बहुत तेजी से बढ़ रहा है,जिससे उनकों गर्भधारण करने में समस्या आती है। यदि महिलायें शारीरिक मेहनत करें साथ ही माहवारी रोकने के लिए दवाओं का प्रयोग न करें, तो इस बीमारी से निजात मिल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि घर में पोंछा लगाना इस बीमारी में काफी लाभप्रद होता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अक्सर महिलायें काम के चक्कर में या बाहर कहीं आने जाने के समय में दवाओं से माहवारी को रोकती है। जो आगे चलकर काफी घातक सिद्व होता है। इस प्रकार की बीमारी का इलाज होम्योपैथी तथा शारीरिक श्रम से ही सम्भव है।

70 फीसदी मौतें बदली जीवन शैली की वजह से होती हैं : डॉ.अनुरुद्ध वर्मा

केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनुरुद्ध ने बताया कि वर्तमान समय में यदि बीमारी से 100 मौते होती है तो उनमें से 70 फीसदी मौतें खराब जीवन शैली से उत्पन्न बीमारियों के चलते होती हैं। यदि जीवन शैली को सुधार लिया जाये तो कई प्राणघातक बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कैन्सर , तनाव, अवसाद, अनिद्रा, पेट के रोग, जोड़ों के रोग, मोटापा ये सभी रोग खराब जीवन शैली का ही नतीजा हैं। खराब जीवन शैली से पैदा हुये रोगों का इलाज होम्योपैथ में सम्भव हैै।

 कार्डिओलॉजी का भी है इलाज : डा. मनप्रीत बिन्द्रा

पंजाब से आये वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक डा. मनप्रीत बिन्द्रा ने कहा कि कार्डियोलोजी से जुड़ी समस्याओं को भी होम्योपैथी औषधियों के माध्यम से टाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ब्लड प्रेशर व हार्ट अटैक आने पर होम्योपैथी की एक गोली गंभीर खतरे को टाल सकती है।

ख़त्म होता जा रहा है बचपन और यौवन : डॉ.पवन पारीख

आगरा के डा. पवन पारिख ने कहा कि बच्चों का बचपन और युवाओं का यौवन खत्म होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि तीन प्रतिशत बच्चे हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि डिप्रेशन से पीड़ित महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

संगोष्ठी के वैज्ञानिक सत्रों में केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 प्रवीन ओबराॅय ने अनियमित जीवन शैली से उत्पन्न रोगों के होम्योपैथिक प्रबन्धन पर हुए नवीनतम शोध से चिकित्सकों को अवगत कराया।