Wednesday , August 17 2022

एनेस्‍थीसिया में बदलाव का असर : आज सर्जरी, कल घर, परसों से काम पर

-वर्ल्‍ड एनेस्‍थीसिया डे पर केजीएमयू में आयोजित हुई इन्हेलेशन एनेस्थीसिया विषय पर संगोष्‍ठी
-क्विज प्रतियोगिता में 26 टीमों ने हिस्‍सा, संजय गांधी पीजीआई ने बाजी मारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। एनेस्‍थीसिया के क्षेत्र में आये बदलावों के चलते अब सर्जरी के लिए मरीज को कम समय के लिए दवाओं के दायरे में रखा जाता है, यानी सर्जरी के बाद अगले दिन से मरीज अपने रोज के काम आसानी से करना शुरू कर दें। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज को अस्‍पताल में कम से कम दिनों के लिए रुकना पड़ता है, जिससे न सिर्फ खर्च में बचत होती है बल्कि उसे अपने काम से भी कम समय के लिए छुट्टी लेनी पड़ती है। मरीज को दी जाने वाली बेहोशी की दवाएं ज्‍यादा असरकारक, सटीक एवं शॉर्ट पीरियड में शरीर से बाहर होने वाली होती है।

यह जानकारी आज “वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे” के उपलक्ष्य में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ एनेस्थीसिया द्वारा इन्हेलेशन एनेस्थीसिया विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी में विभागाध्‍यक्ष प्रो अनीता मलिक एवं डॉ जीपी सिंह ने दी। इस संगोष्ठी में इन्हलेशन एनेस्थीसिया के क्षेत्र में आयी तकनीकी बदलाव के बारे में चर्चा की गयी। संगोष्‍ठी में मरीज़ों को बेहोशी और ऑपरेशन के दौरान सुरक्षित और दर्द से मुक्त रख कर ऑपरेशन के बाद अपने रूटीन काम में सकुशल वापस लौटने की नयी तकनीको के बारे में चर्चा की गयी । इस संगोष्ठी के माध्यम से इन्हेलेशन एनेस्थीसिया के नयी दवाईयों की खोज में हो रही रिसर्च पर भी प्रकाश डाला गया। बदलाव का एक लाभ यह भी है कि अस्‍पतालों पर मरीजों के बढ़ते बोझ को मैनेज करने में भी आसानी हो सकती है। संगोष्‍ठी के दौरान डॉ मोनिका कोहली, डॉक्टर हेमलता, डॉ शेफाली, डॉ रवि प्रकाश, डॉ अहसान, डॉ मनीष, डॉ राजेश, डॉ विनोद श्रीवास्तव, डॉ मनोज, डॉ अपर्णा आदि शामिल रहे।

इस मौके पर कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने उपस्थित रेजीडेंट डॉक्‍टर्स को रिसर्च पर ध्यान देते हुए अपने क्लिनिकल काम में मानवीय भावनाओं के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया। कुलपति ने के॰जी॰एम॰यू॰ के सबसे बड़े विभाग, एनेस्थीसिया विभाग को मरीज़ों की सदैव सेवा करने के लिए और वर्ल्ड अनेस्थेसिया डे के उपलक्ष्य पर बधाई दी।

एनेस्‍थीसिया विभाग ने इस मौके पर रेजीडेंट्स डॉक्‍टर्स के लिए एक क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जिसमें उत्‍तर प्रदेश भर से आयीं 26 टीमों ने हिस्‍सा लिया। क्विज का संचालन करने वाले डॉ तन्‍मय तिवारी ने बताया कि प्रदेश स्‍तरीय क्विज का आयोजन केजीएमयू स्थित शताब्दी हॉस्पिटल ऑडिटोरियम में किया गया। इस क्विज प्रतियोगिता में संजय गांधी पीजीआई की टीम को प्रथम एवं तृतीय स्‍थान मिला जबकि दूसरा स्‍थान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की टीम को मिला। एस॰जी॰पी॰जी॰आई॰ की टीम प्रथम (प्रणव और रोहित),  ए॰एम॰यू॰की टीम (मोहित प्रकाश और सानिया परवीन) द्वितीय स्थान पर तथा एस.जी.पी.जी.आई. की ही टीम (श्रुति सोमानी और नायाब फरज़ाना) तृतीय स्थान पर रहीं। क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अन्‍य टीमों में एस.एन.एम.सी.आगरा, एल.एल.आर.एम.मेरठ, यू.पी.यू.एम.एस. सैफ़ई, एम.एल.एन.एम.सी. प्रयागराज, जी.एस.वी.एम. कानपुर, आई.एम.एस.बी.एच.यू.वाराणसी, बी.आर.डी.गोरखपुर, के.जी.एम.यू.लखनऊ, आर.एम.एल.आई.एम.एस. लखनऊ, आर.एल.बी.एम.सी. झाँसी आदि शामिल रहीं। क्विज़ में एनेस्थीसिया में नवीनतम तकनीकों पर सवाल पूछे गए। क्विज़ का संचालन डॉ तन्मय तिवारी और डॉ प्रेम राज ने किया। कुलपति प्रो एम॰एल॰बी॰ भट्ट, डीन स्टूडेंट वेल्फ़ेयर डॉ जीपी सिंह और एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ अनीता मलिक ने विजेता टीम को ट्रॉफ़ी और मेडल से पुरस्कृत किया।