नसबंदी पर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों पर भारी, स्त्रियों की 75 प्रतिशत तो पुरुषों की सिर्फ 0.62

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा की संगोष्ठी में बढ़ती जनसंख्या पर लगाम के लिए कई तरह के सुझाव दिए विशेषज्ञों ने  

 

लखनऊ. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा द्वारा भी आज 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. इसमें जहाँ बच्चे कम पेड़ ज्यादा थीम पर जोर दिया गया वहीँ वक्ताओं ने अपनी-अपनी तरह से समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिए. आईएमए भवन में इस मौके पर संगोष्टी का आयोजन किया गया | इस संगोष्टी में शहर के अनेक चिकित्सकों ने भाग लिया. खास बात जो सामने आयी वह यह थी कि जनसंख्या नियंत्रण में अन्य योजनाओं की तरह अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है, इसके पीछे एक बड़ा कारण है पुरुषों द्वारा इसमें भागीदारी नहीं के बराबर है. महिलाओं और पुरुषों के बीच के आंकड़ों का अंतर कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि चौड़ी खाई के समान है.

 

इस बारे में अपने संबोधन में स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ. वारिजा सेठ ने कहा कि परिवार नियोजन में पुरुषों की भी भागीदारी होनी चाहिए. उन्होंने बताया की 75 प्रतिशत नसबंदी केवल महिलाओं की ही की जाती हैं, जबकि पुरुषों की केवल 0.62 प्रतिशत. आखिर ऐसा क्यों. इसका अर्थ यह है कि कहीं न कहीं नसबंदी के प्रति पुरुषों में जागरूकता की कमी है. इस कमी को सिर्फ शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है. परिवार नियोजन में पुरषों की शिक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. डॉ वारिजा के मुताबिक़ सभी चिकित्सा संस्थानों को अधिक से अधिक मात्रा में पुरुषों को परिवार नियोजन के विषय में शिक्षित कर पुरुषों की भी भागीदारी बढाने की ज़रूरत है. इसके लिए पुरुषों की काउंसिलिंग की जानी चाहिए. यही नहीं पुरुषों की काउंसिलिंग उनसे सम्बंधित दूसरे रोगों जैसे प्रोस्टेट की बीमारी, नशे की लत आदि के साथ ही नसबंदी के बारे में भी उन्हें जागरूक किया जा सकता है. यही नहीं अगर उनके अन्दर किसी प्रकार का भ्रम है तो उसे दूर करने का काम भी काउंसिलिंग में किया जाना चाहिए. इसी से जुड़ा के.जी.एम्.यू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. सुजाता देव का सुझाव था कि किशोरावस्था के दौरान ही सभी लड़कों और लड़कियों को जनसंख्या नियंत्रण के बारे में जानकारी देना चाहिए और पढ़ाना चाहिए जिससे आने वाली ज़िन्दगी में वो अपनी इस जानकारी का सही प्रयोग कर पाएं.

 

मेनोपौज़ तक सभी परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाते रहने चाहिए

 

के.जी.एम्.यू के स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. मंजू शुक्ल ने कहा की ज़मीनी स्तर पर जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूकता अभियान एवं कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता है, तभी अच्छे परिणाम मिल सकेंगे. जबकि डॉ. शिखा ने कहा कि निजी संस्थानों की भागीदारी प्राथमिकता से करने की ज़रूरत है, तभी जनसंख्या नियंत्रण में मुकाम हासिल किये जा सकेंगे. उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत एवं हौसिला भागीदारी जैसे सभी सरकारी कार्यक्रम भी निजी संस्थानों के सहयोग के बिना उचित परिणाम नहीं दे सकेंगे. के.जी.एम्.यू के स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शिप्रा ने कहा की मेनोपौज़ (यानि मासिक धर्म बंद होने तक) सभी महिलाओं को परिवार नियोजन के तरीके अपनाने चाहिए. उन्होंने कहा कि महज उम्र का बढ़ जाना, गर्भवती होने के खतरे को कम नहीं करता, इससे बचने के लिए मेनोपौज़ तक सभी परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाते रहने चाहिए.

 

सरकारी सहयोग राशि केवल पहले दो बच्चों तक निर्धारित कर देना चाहिए

 

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. चन्द्रावती ने कहा की उन्होंने परिवार नियोजन में बहुत काम किया है, और उनके मुताबिक़ बच्चों के जन्म होने पर मिलने वाले सरकारी सहयोग राशि केवल पहले दो बच्चों तक निर्धारित कर देना चाहिए ताकि परिवार नियोजन को बढ़ावा मिल सके. विशिष्ट अतिथि डी.जी. हेल्थ डॉ. सविता भट्ट ने कहा की निजी संस्थानों की भागीदारी के साथ सरकार परिवार नियोजन एवं जनसंख्या प्रबंधन में कई कार्यक्रम आयोजित करेगी. कार्यक्रम में मौजूद के.जी.एम्.यू. के स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. हेम प्रभा गुप्ता ने कहा कि अधिक से अधिक मात्रा में सभी विभागों के चिकित्सकों द्वारा परिवार नियोजन हेतु शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिए, और परिवार नियोजन की अकेले जिम्मेदारी केवल स्त्री रोग विशेषज्ञों की नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा की इससे ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फ़ैल सकेगी |

 

आवास, भोजन, पानी, प्रदूषण, बेरोजगारी, सफाई, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का बड़ा कारण है बढ़ती जनसंख्या  

 

आईएमए लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने विश्व जनसंख्या दिवस मनाने के इतिहास के बारे में बताया कि 11 जुलाई 1987 को विश्व की जनसंख्या 5 अरब हो गयी थी, और इसी दिन 11 जुलाई 1987 को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ घोषित किया गया. उन्होंने कहा कि बदती जनसंख्या ढेर सारी अन्य समस्याओं जैसे, आवास की समस्या, भोजन की समस्या, पानी की समस्या, प्रदूषण की समस्या, बेरोजगारी की समस्या, सफाई की समस्या तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं आदि को पैदा करती हैं. डॉ. सूर्यकांत ने कहा की भारत देश की जनसंख्या इस समय 134 करोड़ के करीब पहुँच चुकी है, जो कि विश्व की 17 प्रतिशत आबादी है और चीन के बाद जनसंख्या में दूसरे नंबर पर है.

 

बच्चे कम, पेड़ ज्यादा लगाने का आह्वान

 

डॉ. सूर्यकांत ने प्रदेश सरकार को अपनी ‘प्रदेश स्वास्थ्य नीति’ बनाने के लिए बधाई दी तथा आईएमए लखनऊ द्वारा एक प्रस्ताव पारित कराया कि इस प्रदेश की स्वास्थ्य नीति में ‘जनसंख्या नियंत्रण’ के लिए भी प्रभावी कदम उठाएं जाएँ. सभा में उपस्थित आई.एम.ए. के चिकित्सकों ने इसका हाथ उठाकर पूरा समर्थन दिया. डॉ. सूर्यकांत ने नारा दिया की ‘व्यक्तियों की जनसंख्या कम हो, पेड़ों की संख्या ज्यादा हो’. यही नारा आईएमए लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पी.के. गुप्ता ने भी देते हुए बच्चे कम पेड़ ज्यादा लगाने का आह्वान किया.

हेल्थ कैंप का आयोजन

कार्यक्रम में आईएमए उत्तर प्रदेश के प्रेसिडेंट एलेक्ट डॉ. एएम खान, लखनऊ शाखा के सचिव डॉ. जे.डी. रावत, डॉ. आरसी. सिंह, डॉ. सुमीत सेठ, मेयो मेडिकल कॉलेज के चिकित्साध्यक्ष डॉ.आरबी सिंह, डॉ. नईम व डॉ. प्रांजल अग्रवाल आदि मौजूद थे.  इस मौके पर डॉ. राकेश सिंह द्वारा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आईएमए भवन में हेल्थ कैंप का आयोजन भी किया गया, जिसमे लगभग 70 लोगों ने हेल्थ चेक अप कराया एवं उन्हें परिवार नियोजन के ऊपर जानकारी भी दी गयी. आईएमए लखनऊ द्वारा सामाजिक सरोकार कार्यक्रम के तहत सीतापुर रोड पर वृक्षारोपण भी किया गया. कार्यक्रम के अंत में  सचिव डॉ. जे.डी. रावत ने मौजूद सभी चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों, जनता के प्रतिनिधियों एवं पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद सन्देश दिया.