क्‍वीनमेरी हॉस्पिटल की स्‍टाफ नर्स को नहीं मिला केजीएमयू में इलाज

-प्राइवेट हॉस्पिटल में दिखाना पड़ा, वीडियो वायरल, प्रशासन का कहना ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) के क्‍वीनमैरी हॉस्पिटल में काम करने वाली स्‍टाफ नर्स की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे केजीएमयू में ही इमरजेंसी में इलाज नहीं मिल सका, हार कर उसे प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। इस सम्‍बन्‍ध में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।

आउटसोर्सिंग कर्मचारी अध्‍यक्ष रितेश मल्‍ल ने बताया कि क्‍वीनमैरी हॉस्पिटल के नेयोनेटल विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग स्‍टाफ नर्स को आज ड्यूटी करते समय अचानक पेट में दर्द होने लगा, दर्द जब बढ़ने लगा तो उसे सलाह दी गयी कि इमरजेंसी में दिखा ले। बताया जाता है कि इसके बाद पीडि़त स्‍टाफ नर्स को लेकर उसकी साथी जब इमरजेंसी में दिखाने के लिए मानसिक रोग विभाग स्थित होल्डिंग एरिया पहुंची तो उससे पहले कोरोना जांच रिपोर्ट लाने के लिए कहा गया, इस बीच मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोश होने लगी। वहां से मरीज को लेकर कोरोना जांच के लिए कोरोना वार्ड पहुंची तो वहां 1500 रुपये जांच के लिए मांगे गये। पता चला है कि चूंकि तबीयत ज्‍यादा बिगड़ रही थी लेकिन बिना जांच रिपोर्ट के उसे भर्ती करने के लिए कोई तैयार नहीं था। इसके बाद मरीज को लखनऊ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे ट्रीटमेंट दिया गया।

देखें दोनों वीडियो – केजीएमयू के क्‍वीनमैरी हॉस्पिटल में कार्यरत स्‍टाफ नर्स ड्यूटी करते समय अचानक बीमार होने के बाद दिखाने के लिए केजीएमयू की इमरजेंसी के होल्डिंग एरिया में बाहर तड़पती रही लेकिन उसे इलाज नहीं मिला, उसे कोविड जांच के लिए भेजा गया जबकि उसे पहले इलाज देना चाहिये था, अंतत: उसे निजी हॉस्पिटल ले जाया गया।

ज्ञात हो शासन के स्‍पष्‍ट निर्देश हैं कि इमरजेंसी में आने वाले मरीज के इलाज में कोरोना जांच का इंतजार न किया जाये, उसे होल्डिंग एरिया में रखकर उसका इलाज किया जाये, जांच बाद में करायें। वायरल वीडियो पर केजीएमयू के मीडिया प्रवक्‍ता डॉ सुधीर सिंह ने कहा है मीडिया ग्रुप में एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि स्टाफ नर्स को ट्रामा में उपचार नहीं मिला। ट्रॉमा प्रभारी द्वारा बताया गया है कि यह वीडियो ट्रॉमा का नहीं है। ट्रामा प्रभारी को इस संदर्भ में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

उन्‍होंने कहा है कि चिकित्सा अधीक्षक को भी इससे संदर्भित शिकायत दर्ज नहीं करायी गयी है। केजीएमयू की ओर से कहा गया है कि रोगियों और कर्मियों का हित विश्वविद्यालय के लिये सर्वोपरि है। उपचार में लापरवाही अथवा कर्मियों की उपेक्षा संभव ही नहीं है। वीडियो से कुछ भी स्पष्ट नहीं है, फि‍र भी इस प्रकार की यदि कोई भी शिकायत प्राप्त हुई तो विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।