साढ़े तीन घंटे में ही पूरी हो जाती है प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की नींद

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार के साथ इंटरव्‍यू में खोले जीवन के कई पन्‍ने

मौका है देश भर में हो रहे आम चुनाव के दिनों का लेकिन राजनीति से जुड़ा एक भी सवाल नहीं। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार द्वारा लिया गया प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का इंटरव्‍यू बुधवार को प्रसारित किया गया। इंटरव्‍यू में ऐसी कई बातें पता चलीं जिनसे पता चलता है कि 68 वर्ष की आयु में भी पीएम मोदी इतने ऊर्जावान कैसे बने हुए हैं। योग, प्राणायाम के साथ-साथ अपने कार्य व्‍यवहार को मोदी किस तरह करते हैं जो उनके शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को चुस्‍त-दुरुस्‍त बनाये रखता है।

 

नरेन्द्र मोदी बताते हैं कि जब उनके पास कोई पत्र का ड्राफ्ट लेकर आता है तो उसमें अगर कुछ बदलना होता है तो वह यह नहीं कहते कि क्‍या ले आये हो, बल्कि वह यह कहते हैं कि अगर इसमें ऐसे नही ऐसे लिख दिया जाये तो कैसा रहेगा। वह बताते हैं कि इससे फायदा यह रहता है कि ड्राफ्ट लाने वाले को आपका नजरिया समझ में आ जाता है तो अगली बार जब वह ड्राफ्ट लाता है तो उसमें आपको गलतियां नहीं दिखेंगी या कम दिखेंगी। इस तरह मैं तनाव से गुस्‍सा करने से दूर रहता हूं।

 

अक्षय कुमार और प्रधानमंत्री मोदी के बीच जो सवाल-जवाब हुए उनहें न्‍यूज एजेंसी एएनआई ने जारी किया है। पेश हैं इनमें से कुछ सवाल-जवाब

 

अक्षय: क्या हमारे प्रधानमंत्री को गुस्सा आता है? आता है तो किस पर और कैसे निकालते हैं?

 

मोदी: राजी-नाराजगी यह स्वभाव के हिस्से हैं। हर प्रकार की चीज सब में होती है। आपके स्वभाव में ईश्वर ने दिया है आपको तय करना है। मैं इतने दिन तक मुख्यमंत्री रहा, इतने दिन प्रधानमंत्री रहा, किसी चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक पर गुस्सा करने का अवसर नहीं मिला। मैं लोगों से सीखता भी हूं और सिखाता भी हूं। मेरे अंदर गुस्सा होता होगा, लेकिन मैं व्यक्त करने से खुद को रोक लेता हूं।

 

अक्षय- आप साढ़े तीन घंटे ही सोते हैं, शरीर को 7 घंटे तो सोना चाहिए ही?
पीएम मोदी- जितने मेरे साथी हैं, डॉक्टर का भी यही आग्रह है कि नींद बढ़ाऊं। राष्ट्रपति ओबामा भी इसमें उलझ गए कि तू ऐसा क्यों करता है। मेरा बॉडी साइकल ऐसा हो गया है। साढ़े तीन घंटे में नींद पूरी हो जाती है। आंख खुलते ही बिस्तर छोड़ देता हूं। हो सकता है कि 18-22 साल के कालखंड में जिस जिंदगी को जी रहा था उसमें से यह विकसित हुआ है और अब शरीर का हिस्सा है। रिटायरमेंट के बाद नींद कैसे बढ़ाऊं इस पर सोचूंगा।

 

अक्षय: कभी सोचा था कि प्रधानमंत्री बनेंगे? यह विचार कब आया?

मोदी: मैंने कभी नहीं सोचा था कि पीएम बनूंगा। जो मेरा फैमिली बैकग्राउंड है उसमें मुझे कोई अच्छी सी नौकरी भी मिल जाती तो मां पड़ोसियों को गुड़ खिला देती। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि देश मुझे इतना प्यार क्यों दे रहा है।

अक्षय: आप संन्यासी बनना चाहते थे? सेना में जाना चाहते थे।
मोदी: 1962 की जंग हुई। स्टेशन पर देखा जो लोग फौज में जा रहे थे, उनका काफी सम्मान होता था। मैं भी वहां चला जाता था। तब मन में आया कि यह देश के लिए कुछ करने का माध्यम है।

 

 

अक्षय: एक बार मेरे ड्राइवर की बेटी से मैंने पूछा कि मोदी जी मिलें तो क्या सवाल करोगी? उसने कहा- क्या हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं, खाते हैं तो कैसे, काटकर या गुठली के साथ?

मोदी: आम खाता हूं। यह मुझे पसंद भी है। गुजरात में आम रस की परंपरा है। छोटा था तो आम-वाम खरीदना, उस तरह की हमारी फैमिली लक्जरी तो थी नहीं। बचपन में पेड़ से पके आम तोड़कर खाना पसंद था। बाद में आम रस खाने की आदत लगी। लेकिन अब मुझे कंट्रोल करना पड़ता है कि खाऊं या नहीं।

 

अक्षय: आप मां के साथ नहीं रहना चाहते?

मोदी: मैं पीएम बनकर घर से निकला होता तो लगता कि सब मेरे साथ रहें। लेकिन मैंने बहुत छोटी उम्र में वह सब छोड़ दिया। मैं घर छोड़कर निकल गया तो मेरी ट्रेनिंग वैसी हुई। लेकिन फिर भी मैंने मां को बुला लिया था। कुछ दिन उनके साथ बिताए। लेकिन मां कहती थी, क्यों अपना समय खराब करते हो। जितने दिन मां रही, मैं अपने शेड्यूल में ही लगा रहता था। रात को 12 बजे आता तो मां को दुख होता कि ये क्या कर रहा है।

 

 

अक्षय: जब आप मुख्यमंत्री थे तब मिला था तब मैंने आपको एक-दो चुटकुले सुनाए थे। क्या पीएम बनने के बाद भी आपका वैसा ही ह्यूमर है? आपकी छवि बेहद स्ट्रिक्ट नजर आती है।

 

मोदी: मेरी यह छवि गलत तरीके से पेश की गई है। ऑफिस जाता हूं, तो खुद काम करता हूं तो दूसरों को भी लगता है कि ये करते हैं तो हमें भी करना चाहिए। कई बार रात 11 बजे फोन करके पूछता हूं कि फलां काम हुआ कि नहीं। मैं काम के वक्त काम करता हूं। इधर-उधर की बात में वक्त बर्बाद नहीं करता। मेरी मीटिंग में कोई मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता। मेरा फोन भी नहीं आता। जहां तक ह्यूमर का सवाल है। मेरे परिवार में पिताजी कभी नाराज हों तो मैं एक-दो मिनट में ही माहौल को हल्का कर देता था।

अक्षय: सुना है आपने अपनी जमा पूंजी के 21 लाख रुपए भी बच्चियों के लिए दान कर दिए थे?

 

मोदी: मैंने अपने सेक्रेटरी की बच्चियों की मदद के लिए गुजरात सरकार को 21 लाख रुपए दिए। सरकार की तरफ से विधायक को कम पैसे में प्लॉट मिलता है। मैंने वह भी पार्टी को ले लेने के लिए कहा।

 

अक्षय: सुना है गुजराती पैसों के लिए बहुत सही रहते हैं, लेकिन आपने अपने पैसे दे दिए, प्लॉट दे दिया? आपको एक चुटकुला सुनाता हूं। एक गुजराती बुजुर्ग आदमी मर रहा होता है। तो पूछता है मेरा लड़का कहां है? बेटा कहता है- मैं यहां हूं। बुजुर्ग पूछता है- मेरी बेटी कहां है? वह कहती है- मैं यहां हूं। मेरी बीवी कहां है? वह कहती है- मैं यहां हूं। तो बुजुर्ग कहता है- फिर दुकान पर कौन है?

मो: दीएक मैं भी सुना दूं। एक बार ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर कोई पैसेंजर सोया था। स्टेशन आया तो खिड़की से बाहर झांककर जाते हुए व्यक्ति से पूछा- कौन सा स्टेशन आया? उसने कहा चार आना दोगे तो बताऊंगा। इस पर यात्री ने कहा- रहने दे, अहमदाबाद आया होगा।

 

 

अक्षय- आपके पास अलादीन का चिराग हो, जिन्न तीन विश मांगे तो आप क्या मांगेगे?
पीएम मोदी- बिना परिश्रम के कुछ नहीं मिलता है और अगर मुझे अलादीन का चिराग मिल जाये तो मैं उसे कहूंगा की ये जितने भी समाजशास्त्री और शिक्षाविद हैं उनके दिमाग में भर दो कि वे आने वाली पीढ़ियों को ये अलादीन के चिराग वाली थिअरी पढ़ानी बंद कर दें। उन्हें मेहनत करने की शिक्षा दें।

 

 

अक्षय- आप खुद ट्विटर और इंस्टाग्राम देखते हैं, अपने ऊपर बने हुए मीम्स देखकर कैसा लगता है?
पीएम मोदी मैं बिलकुल देखता हूं। मुझे दुनियाभर की जानकारी मिलती है। मैं आपका ट्विटर अकाउंट भी देखता हूं और ट्विंकल का भी देखता हूं। और उसे देखकर मुझे लगता है कि जो वह गुस्सा मुझपर निकालती हैं, आपके पारिवारिक जीवन में शांति रहती होगी क्योंकि उनका सारा गुस्सा मेरे पर निकल जाता होगा और आपको आराम रहता होगा। मीम्स को देखकर मैं इंजॉय करता हूं, मोदी को कम, क्रिएटिविटी को ज्यादा देखता हूं। मेरा विरोध भी होता है तो मजा आता है। सोशल मीडिया का फायदा यह है कि कॉमन मैन की सेंस, क्रिएटिविटी समझने में बड़ा मजा आता है।

 

अक्षय- एक न एक दिन सबको रिटायर होना होता है, आपको भी होना है। आपने कभी सोचा है कि पोस्ट-रिटायरमेंट प्लान क्या होगा?
पीएम मोदी- हमलोगों के इनर सर्कल की एक मीटिंग थी, अटलजी, आडवाणीजी, राजमाता सिंधियाजी, प्रमोद महाजन थे, तब सबसे छोटा मैं था। बातें चलीं कि रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे। प्रमोद जी का जीवन विविधताओं से भरा था। मुझे पूछा तो लगा कि मुझे तो कुछ आता ही नहीं। इस बारे में सोचा नहीं। जब जो जिम्मेदारी मिली, उसे जिंदगी माना। इसलिए कल्पना ही नहीं होता कि समय बिताने के लिए कुछ करना पड़ेगा। मुझे पक्का लगता है कि शरीर का कण-कण और समय के पल-पल किसी मिशन में लगाऊंगा।