-शासन के निर्देशों और नियमों के विपरीत मनमानी किये जाने की शिकायत
-भर्ती परीक्षा कराने का किया विरोध घोषित परीक्षाफल भी रोकने की मांग
सेहत टाइम्स
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने संजय गांधी पीजीआई में फीजियोथैरेपिस्ट के पदों के लिए अर्हता के लिए पोस्ट ग्रेजुएट का निर्धारण करने पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से एसजीपीजीआई में फीजियोथैरेपिस्ट के पदों के लिए अर्हता केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा सेवा नियमावली में प्रदत्त व्यवस्था डिप्लोमा/डिग्री निर्धारित करने के उपरान्त ही नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए निर्देशित करने के साथ ही संस्थान द्वारा आयोजित ऑनलाइन परीक्षा के परिणाम पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ प्र के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि एसजीपीजीआई के अन्तर्गत फीजियोथैरेपिस्ट पद पर नियुक्ति के लिए विगत वर्ष 2021-22 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया था, जिसमें शैक्षिक अर्हता 3 वर्ष डिप्लोमा इन फीजियोथेरेपी मांगी गई थी। इस संबंध में परिषद द्वारा पुरजोर विरोध करते हुये तत्कालीन अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा उ प्र शासन को अवगत कराया गया था कि 3 वर्षीय डिप्लोमा फीजियोथेरेपी पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश में केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही संचालित हो रहा था एवं प्रदेश में स्टेट मेडिकल फैकल्टी द्वारा 4 वर्षीय डिग्री कोर्स एवं 2 वर्षीय डिप्लोमा /डिग्री पाठ्यक्रम अतिविशिष्ट संस्थान एसजीपीजीआई, केजीएमयू सहित कई अन्य संस्थानो में चलाया जा रहा है। ऐसे में केवल 3 वर्षीय डिप्लोमा धारकों को फीजियोथेरेपिस्ट पद पर चयन करने पर 4 वर्षीय डिग्री धारक एवं 2 वर्षीय डिप्लोमा धारकों के साथ अन्याय होगा। शासन द्वारा संज्ञान लेते हुये चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई गई फीजियोथैरेपिस्ट सेवा नियमावली के अनुसार 2 वर्षीय डिप्लोमा/4 वर्षीय डिग्री धारकों की चयन प्रक्रिया में शामिल करने हुते निर्देशित किया गया था।
अतुल मिश्रा का कहना है कि बड़े ही खेद की बात है कि एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा पुनः फीजियोथेरेपिस्ट संवर्ग का पद विज्ञापित किया गया है, जिसमें न्यूनतम शैक्षिक अर्हता मास्टर इन फीजियोथेरेपी मांगी गई, जो न्यायसंगत नहीं है।इससे डिग्री/डिप्लोमा के छात्र उक्त परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित रह जाएंगे।
श्री मिश्र व प्रोवेंशियल फ़ीज़ियोथेरेपिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री अनिल कुमार ने बताया कि केन्द्र व प्रदेश सरकार में समूह ग के पद की न्यूनतम शैक्षिक अर्हता परास्नातक है ही नहीं। उल्लेखनीय है कि परिषद व संघ के अनुरोध पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार द्वारा उपरोक्त के संबंध में संशोधन के लिए एसजीपीजीआई के निदेशक को निर्देशित किया गया था ,परन्तु एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा उसको नजरअंदाज करते हुये 15 जुलाई 2023 को भर्ती संबंधी ऑनलाइन परीक्षा करा ली गई व 16 जुलाई 2023 को मध्य रात्रि बिना पारदर्शिता किये परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया, जो कदापि उचित नहीं है। इससे प्रदेश के हजारों फ़ीज़ियोथैरेपिस्ट में काफ़ी आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने कहा कि दुःखद है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा बेरोज़गारों को रोज़गार प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के लिए अनेकों बार निर्देशित किया गया है। वहीं पर एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा बेरोज़गारों को रोज़गार से वंचित रखा जा रहा है।
