अब सुनने और बोलने में असमर्थ शिशुओं का केजीएमयू में होगा इलाज

आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एण्ड हियरिंग और केजीएमयू के बीच समझौता

 

लखनऊ. सुनने और बोलने में दिक्कत वाले नवजात के विशेष इलाज की सुविधा केजीएमयू में मिलेगी. जिन बच्चों में मस्तिष्क और बोलने की क्षमता का विकास नहीं हो पाता है उन्हें इस तरह की दिक्कत हो जाती है. ऐसे बच्चों के कौक्लिअर इम्प्लांट एंड स्पीच थेरैपी Cochlear Implant & speech therapy से इलाज करने के लिए आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एण्ड हियरिंग नवजात बच्चों के सुनने की क्षमता की जांच करने के लिए उपकरण एवं मैन पावर देगा. इसी क्रम में आज यहाँ केजीएमयू में एक आपसी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किये गए.

 

केजीएमयू के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आज किंग जार्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय एवं आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एण्ड हियरिंग के मध्य एक आपसी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया गया जिसके तहत आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एण्ड हियरिंग द्वारा नवजात बच्चों के सुनने की क्षमता की जांच करने के लिए उपकरण एवं मैन पावर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय को प्रदान की जाएगी. जिससे केजीएमयू के नाक, कान, गला विभाग, नियोनेटोलोजी विभाग एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के तत्वावधान में नवजात शिशुओं के सुनने की क्षमता की जांच की जायेगी।

 

ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी अग्रवाल ने बताया कि जो नवजात बच्चे ठीक से सुन नही सकते हैं उनके मस्तिष्क का और बोलने की क्षमता का उचित विकास नही हो पाता है। अब चिकित्सा विश्वविद्यालय में जब यह जांच की सुविधा उपलब्ध होगी तो ऐसे बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच के उपरांत उनका कौक्लिअर इम्प्लांट एंड स्पीच थेरैपी के माध्यम से उपचार किया जा सकेगा जिससे कि उनके मस्तिष्क और बोलने की क्षमता का उचित विकास हो सके। चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मदन लाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि इस प्रकार की सुविधा उत्तर प्रदेश में अभी सिर्फ केजीएमयू में उपलब्ध होगी तथा उपरोक्त जांच नवजात के जन्म के 72 घण्टों के भीतर कभी भी की जा सकेगी।