कोरोना की अभी न वैक्‍सीन, न दवा, तो क्‍यों न बढ़ायें रोग प्रतिरोधक शक्ति

-आयुष मंत्रालय ने कहा, इन उपायों से बढ़ सकती है रोगों से लड़ने की शक्ति

लखनऊ। न सिर्फ भारत बल्कि पूरा विश्‍व कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है एवं उसके खिलाफ लड़ रहा है। अभी तक कोरोना की वैक्‍सीन या दवा नहीं खोजी जा सकी है, प्रयास जरूर चल रहे हैं, ऐसे में इससे बचाव ही बड़ा विकल्‍प देखा गया है, लॉकडाउन भी संक्रमण को बचाने के लिए किये जाने वाले उपायों का हिस्‍सा है। कोरोना से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता के उपाय करना बेहतर है। कोरोना ही नहीं, किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए व्‍यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी आवश्‍यक होती है, क्‍योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो रोगों से ग्रस्‍त होने से रोकने में सहायक होगी। आयुर्वेद आयु एवं स्वास्थ्य से जुड़ा विज्ञान होने के साथ ही प्रकृति के साधनों के प्रयोग पर जोर देता है। रोगों से बचाव का आयुर्वेदिक पक्ष मुख्यतः दिनचर्या एवं ऋतु चर्या पर आधारित है। मुख्य रूप से यह पौधों पर आधारित चिकित्सा विज्ञान है आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित सरल उपायों के द्वारा व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को और बेहतर कर सकता है आयुष मंत्रालय में श्‍वसन तंत्र स्वास्थ्य संबंधी बचाव और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए स्वयं देखभाल के दिशा निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय के अनुसार यह दिशा निर्देश आयुर्वेदिक ग्रंथों एवं वैज्ञानिक पत्रों पर आधारित है।

इन दिशा निर्देशों में गर्म पानी पीने व काढ़ा पीने के सुझाव भी शामिल हैं। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा दिए गए सुझावों को अपनाने की अपील की है।

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह साफ लिखा गया है कि इन उपायों से कोरोना महामारी कोविड-19 के इलाज का दावा नहीं किया जा रहा है। ये उपाय व्‍यक्तिगत प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इन उपायों का प्रयोग व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार करें। ये उपाय देश के प्रख्यात वैद्यों द्वारा संस्‍तुत किये गये हैं। दिशा निर्देशों में सामान्य उपाय अपनाते हुए सलाह दी गई है कि पूरे दिन केवल गर्म पानी पीयें, इसके अलावा प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान करें। इसके अलावा हल्दी, जीरा, धनिया एवं लहसुन आदि मसालों का भोजन बनाने में प्रयोग करें। मंत्रालय द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय बताए गए हैं उनमें च्यवनप्राश 10 ग्राम यानी एक चम्मच सुबह लेने को लेने की सलाह दी गई है। मधुमेह यानी डायबिटीज के रोगियों को शुगर फ्री च्‍यवनप्राश लेने की सलाह दी गई है। इसके अलावा तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सूखी अदरक एवं मुनक्का से बनी हर्बल टी या काढ़ा दिन में एक से दो बार पीयें, स्वाद के अनुसार इसमें गुड़ या ताजा नीबू का रस मिला सकते हैं। इसके अलावा गोल्डन मिल्क की सलाह में कहा गया है कि डेढ़ सौ ग्राम गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी चूर्ण दिन में 1 से 2 बार पीयें।

दिशा निर्देश में सामान्य आयुर्वेदिक उपायों में सुबह-शाम तिल या नारियल का तेल या घी नाक के दोनों छिद्रों में लगाने की सलाह दी गई है एवं दिन में एक से दो बार एक चम्मच तिल या नारियल तेल को मुंह में लेकर 2 से 3 मिनट कुल्ले की तरह मुंह में घूमायें, उसके बाद उसे कुल्ले की तरह ही थूक दें और फिर गर्म पानी से कुल्ला कर लें।

इन दिशानिर्देशों में खांसी, गले में खराश होने पर किए जाने वाले उपायों के लिए कहा गया है कि दिन में कम से कम एक बार पुदीना के पत्ते या अजवाइन डालकर पानी की भाप लें, इसके अलावा खांसी या गले में खराश होने पर लौंग के चूर्ण में गुड़ या शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार लें। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यह उपाय सामान्य सूखी खांसी एवं गले की खराश के लिए लाभदायक है फिर भी अगर लक्षण बने रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श लें।