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धर्मस्‍थलों में एक बार में पांच से ज्‍यादा श्रद्धालुओं की अनुमति नहीं होगी

-प्रतिरूप, मूर्तियों और पवित्र ग्रंथों को स्पर्श करने की भी होगी मनाही

-8 जून से श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे धर्मस्‍थल, कड़े दिशा-निर्देशों का करना होगा पालन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। सभी धर्म स्थलों पर को 8 जून से खोला जा रहा है लेकिन इसके लिए कई तरह का नियमों का पालन करना आवश्यक किया गया है, इनमें मुख्‍य रूप से सभी प्रोटोकाल का पालन करने वालों को एक बार में पांच-पांच की संख्‍या से ज्‍यादा परिसर के अंदर जाने को नहीं मिलेगा। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी द्वारा जारी विस्‍तृत दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार बीते 31 मई को जारी निर्देशों में कुछ संशोधन किए गए हैं।

इन संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक धर्मस्थल के अंदर एक बार में एक स्थान पर 5 से अधिक श्रद्धालु ना हों, प्रवेश द्वार पर हाथों को कीटाणु रहित करने के लिए अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग किया जाए एवं इन्‍फ्रारेड-थर्मामीटर की भी व्यवस्था यथासंभव की जाए। जिन व्यक्तियों में कोई लक्षण प्रदर्शित नहीं होगा केवल उन्हें ही परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी, सभी प्रवेश करने वालों को फेस कवर या मास्‍क का प्रयोग करना अनिवार्य होगा।

दिशा निर्देशों में कहा गया है कि जूते-चप्पलों को अपने वाहन इत्यादि में ही उतार कर श्रद्धालु परिसर में जाएं और यदि जरूरत पड़े तो वहां बने स्टैंड में स्वयं ही अलग-अलग खातों में रखें। इसी तरह पार्किंग स्थलों पर भीड़ प्रबंधन करते समय सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से अनुपालन करें सभी आगंतुकों को कोई ढूंढ़ने संक्रमण से बचाव के बारे में लगातार माइक से जागरूक किया जाए। धर्मस्थल के बाहर स्थित किसी भी प्रकार की दुकानें, स्टॉल, कैफेटेरिया पर भी पूरे समय सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का कड़ाई से अनुपालन करना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग को सुनिश्चित करने के लिए परिसरों में व्यक्तियों के लाइन में खड़े होने के लिए स्पष्ट दृश्य निशान अंकित कर दिया जाए।

इसी प्रकार प्रवेश एवं निकास की यथासंभव अलग-अलग व्यवस्था की जाए लाइन में खड़े लोग भी 6 फीट की शारीरिक दूरी पर हों, यही हाल बैठने के स्थानों पर हो, वेंटीलेशन, एयर कंडीशनरों के प्रयोग के समय तापमान 24 से 30 डिग्री के मध्य होना चाहिए आर्द्रता की सीमा 40 से 70% के मध्य होनी चाहिए। क्रॉस वेंटीलेशन इस प्रकार से होना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा ताजी हवा अंदर आ सके। प्रतिरूप, मूर्तियों और पवित्र ग्रंथों को स्पर्श करने की अनुमति नहीं होगी। सभा और मंडली निषेध रहेंगी। संक्रमण फैलने के खतरे से बचने के लिए इकट्ठे होकर गायन की अनुमति नहीं होगी, रिकॉर्ड किए हुए भक्ति संगीत गाने बजाए जा सकते हैं। प्रार्थना सभाओं में एक ही चादर और दरी के प्रयोग से बचा जाए। श्रद्धालुओं को अपने लिए अलग दरी या चादर लानी चाहिये, जिसे वे अपने साथ वापस भी ले जा सकते हों।

इसके अलावा धार्मिक स्थल के अंदर किसी प्रकार के प्रसाद वितरण अथवा पवित्र जल के छिड़काव आदि की अनुमति नहीं होगी। एक-दूसरे को बधाई देते समय शारीरिक संपर्क से बचना होगा, श्रद्धालु एवं पुजारी समेत कोई भी किसी को किसी रूप में स्पर्श न करें। लंगर, सामुदायिक रसोई, अन्‍न दान आदि के लिए भोजन तैयार और वितरित करते समय शारीरिक दूरी के मानकों का अनुपालन करना होगा। परिसर के भीतर शौचालयों, हाथ-पैर धोने के स्थानों पर स्वच्छता के विशेष उपाय करने होंगे। प्रबंधन द्वारा धार्मिक स्थलों की लगातार सफाई और कीटाणु रहित करने के उपाय करने होंगे। परिसर के फर्श को विशेष रूप से कई बार साफ करना होगा। आगंतुक अपने फेस कवर, मास्क, ग्‍लव्‍स आदि को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ेंगे, यदि कहीं कोई ऐसी सामग्री रहती है तो उसका उचित निपटान यानी डिस्पोजल सुनिश्चित करना होगा।

दिशा निर्देशों में कहा गया है कि परिसर के अंदर संदिग्ध या पुष्‍ट केस के मामले में बीमार व्यक्ति को ऐसे स्थान पर रखा जाए जिससे कि वह अन्य व्यक्तियों से बिल्कुल अलग हो जाए। डॉक्टर द्वारा उसकी जांच परीक्षण होने तक उसे मास्‍क या फेस कवर दिया जाए। तुरंत निकटतम अस्पताल, क्लीनिक अथवा जिला स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 1800 1805 145 पर सूचित किया जाए, नामित स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा मरीज और उसके संपर्कों आदि के संबंध में संक्रमण के जोखिम का मूल्यांकन किया जाएगा तदानुसार कार्यवाही की जाएगी। यदि व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाए तो परिसर को पूर्ण रूप से कीटाणुरहित किया जाए।