लॉकडाउन में टीबी कर्मियों की भूमिका को सराहा, सांसद ने किया सम्‍मानित

-काकोरी सीएचसी पर आयोजित हुआ कोरोना योद्धा सम्‍मान समारोह

लखनऊ। कोरोना महामारी की रोकथाम में लगे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं टीबी विभाग के कर्मचारियों तथा सफाई कर्मियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, काकोरी पर आयोजित “कोरोना योद्धा सम्मान समारोह” में सांसद मोहनलाल गंज,  कौशल किशोर एवं ब्लॉक प्रमुख, काकोरी कुंवर राम बिलास द्वारा सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए प्रशस्ति पत्र देकर संम्मानित किया गया। आपको बता दें कि लॉकडाउन के इस पीरियड में टीबी के मरीजों को समय पर दवा पहुंचे इसके लिए विभाग द्वारा सभी इंतजाम‍ किये गये है।

सांसद द्वारा सर्वप्रथम सफाई कर्मचारी शिवा  एवं करन को सम्मानित किया गया। तत्पशचात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ॰ नरेन्द्र अग्रवाल,  जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ॰ बी के सिंह,  अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ॰ आर वी सिंह,  अधीक्षक  डॉ॰ यू एस लाल, डॉ॰ बृजेश कुमार, डॉ॰ पिनाक त्रिपाठी,  डॉ॰ अनिल, विजय कुमार मौर्य,  सुजीत कुमार, विजय प्रकाश, सुधीर कुमार अवस्थी, शशिभूषण भारती, प्रदुमन कुमार मौर्य, मो.ओसामा, सुमित कुमार, अक्षय कुमार,  प्रशान्त चौहान, राम जी वर्मा, फहीम अहमद, तौशीफ खान, रंजीत कुमार, मनीष सिंह,  अमित यादव, जन्मेजय सिंह, जय प्रकाश तिवारी,  राजकमल, सुरेन्द्र सैनी, राजीव कुमार, विपिन कुमार, पंकज द्विवेदी, पंकज श्रीवास्तव आदि को कोरोना योद्धा के रूप में संमानित किया गया।  इसके अतिरिक्त सांसद द्वारा विशेष तौर पर टीबी कर्मचारियों के योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए एक मिनट तक ताली बजाकर सबका अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले टीबी नियंत्रण कर्मचारी कल्याण समिति के महामंत्री मुकेश सिंह एवं संयुक्त मंत्री विजय कुमार मौर्य की सराहना करते हुए सांसद ने सभी से लॉकडाउन एवं सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए पूरी लगन एवं निष्ठा से कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा सभी के हितों की रक्षा के लिए सरकार से हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन भी दिया।

जिला टीबी अधिकारी डॉ बीके सिंह ने बताया कि निदेशालय से पहले ही निर्देश आ गये थे कि चूंकि लॉकडाउन में बार-बार मरीजों को आने में दिक्‍कत के साथ ही संक्रमण का भी खतरा पैदा हो सकता है, ऐसे में जिन मरीजों की दवा चल रही है उन्‍हें एक माह की दवा एक साथ दे दी जाये।

यह पूछने पर कि मान लीजिये मरीज ने दवा नहीं खायी, इस पर डॉ सिंह का कहना था कि मरीजों से फोन पर सम्‍पर्क बना रहता है, और उन्‍हें फोन करके दवा खाने के बारे में बात की जाती है। उन्‍होंने बताया कि यही नहीं जिस मरीज की दवा खत्‍म हो जा रही है, उन तक दवा हमारे कर्मचारी पहुंचा रहे हैं। ज्ञात हो टीबी की दवा को बीच में रोका नहीं जाता है, क्‍योंकि अगर दवा कोर्स पूरा होने से पहले रोकी गयी तो एमडीआर यानी मल्‍टी ड्रग रेजिस्‍टेंस का खतरा (बाद में इन दवाओं का असर न होना) रहता है।