विश्व गुर्दा दिवस पर लोहिया संस्थान ने आयोजित किया फ्री जांच परामर्श शिविर
300 लोगों की जांच में 50 गुर्दा रोग से ग्रस्त तथा 50 गुर्दा रोग होने के खतरे से ग्रस्त पाये गये
लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने सिर्फ दो साल पूर्व शुरू किये गये किडनी ट्रांसप्लांट का कारवां अपने अर्धशतक को छू रहा है। इस छोटी सी अवधि में 49 ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, 50वें ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हमारा अगला प्रयास एबीओ इन्कॉम्पेटिबल गुर्दा प्रत्यारोपण (ABO incompatible Kidney Transplant) है। आपको बता दें कि यह प्रत्यारोपण वह होता है जिसमें किडनी दान देने वाले और मरीज का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है।
यह जानकारी विश्व किडनी दिवस पर संस्थान द्वारा आयोजित जांच शिविर के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में संस्थान के गुर्दा रोग विभाग एवं मूत्ररोग रोग विभाग के चिकित्सकों ने दी। निदेशक डॉ एके त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई इस पत्रकार वार्ता में नेफोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अभिलाष चंद्रा, यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ ईश्वर राम ध्याल, डॉ नम्रता राव, डॉ आलोक श्रीवास्तव, डॉ संजीत कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुब्रत चन्द्रा एवं प्रवक्ता मीडिया डॉ भुवन चन्द्र तिवारी उपस्थित थे। निदेशक डॉ त्रिपाठी ने कहा कि संस्थान में पहला किडनी प्रत्यारोपण वर्ष 2016 में किया गया था। इतने कम समय में सफलतापूर्वक 50 प्रत्यारोपण करना संस्थान की बड़ी उपलब्धि है।
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि विश्व गुर्दा दिवस की इस वर्ष की थीम गुर्दा का स्वास्थ्य सभी को सभी जगह है। किडनी डिजीज होने के अनेक कारण है जैसे अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, अनियंत्रित ब्लड शुगर, मोटापा, स्मोकिंग, तम्बाकू का सेवन, पथरी की अनदेखी आदि। विशेषज्ञों ने बताया संस्थान में आज एक जांच परामर्श शिविर भी आयोजित किया गया जिसमें 300 लोगों की फ्री जांच की गयी, इनमें 50 मरीज गुर्दे की बीमारी से पीड़ित पाये गये और इतने ही मरीज मधुमेह, रक्तचाप से पीडि़त पाये गये जिन्हें गुर्दा रोग होने का खतरा है।
गुर्दा प्रत्यारोपण की सफलता के बारे में विशेषज्ञों ने बताया कि यह देखा गया है कि गुर्दा प्रत्यारोपण किये जाने के एक साल बाद 90 फीसदी मरीज स्वस्थ रहते हैं, प्रत्यारोपण के पांच साल बाद करीब 70 फीसदी और 10 साल बाद 30 प्रतिशत मरीज स्वस्थ रहते हैं। इसके कारणों के बारे में उन्होंने बताया कि दो वजहों पहली संक्रमण तथा दूसरी गुर्दा की अस्वीकार्यता (रिजेक्शन) से ही मरीज की मृत्यु होती है। इसलिए प्रत्यारोपण के बाद अनेक सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं जैसे समय पर दवा खाना, संक्रमण से बचना, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर नियंत्रित रखना। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता चूंकि कम हो जाती है इसलिए संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है।
गुर्दा रोग से बचाव के लिए विशेषज्ञों ने बताया कि खाने में नमक, चिकनाई, ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर का नियंत्रण, रोजाना व्यायाम, धूम्रपान व शराब से दूरी, मोटापे से दूरी और आवश्यक मात्रा में साफ पानी का सेवन करना चाहिये, स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम रोजाना डेढ़ से दो लीटर पानी पीना चाहिये।
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