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केजीएमयू फिर बना अखाड़ा, नारेबाजी-पुतला जलाने की कोशिश के बाद प्रदर्शनकारियों और चिकित्सकों में तीखी झड़प, पुलिस ने किया बल प्रयोग

-एक सप्ताह पूर्व ऑर्थोपैडिक विभाग में हुए बवाल का पार्ट 2 है यह विवाद

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू का मुख्य परिसर शनिवार 4 अप्रैल को एक बार फिर से अखाड़ा बन गया। एक हफ्ता पूर्व ऑर्थोपैडिक विभाग आये मरीज व उसके तीमारदारों के साथ हुई मारपीट की घटना पर केजीएमयू प्रशासन के कार्रवाई के आश्वासन के बाद एक हफ्ता बीतने के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज लोगों द्वारा केजीएमयू परिसर पहुंचकर प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग करने लगे, प्रदर्शनकारियों ने कुलपति का पुतला फूंकने की कोशिश की। इस बीच चिकित्सकों और प्रदर्शनकारियों के आमने-सामने आने पर तीखी झड़पें हुई, इसके तुरंत बाद ही पुलिस ने वहां पहुंचकर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करते हुए स्थिति को सम्भाला। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।

दरअसल, हुआ यूं कि बीती 28 मार्च को केजीएमयू के ऑर्थोपेडिक विभाग की ओपीडी में डॉ शांतनु के पास पहुंचे मरीज की वापस जाते समय अस्पताल की पार्किंग में ट्रॉमा सेंटर जाने के लिए पहुंचे विभाग के एक डॉक्टर के साथ विवाद हुआ था। मरीज का आरोप है कि इसी के बाद वहां कुछ कर्मचारी भी पहुंच गये। जिन्होंने मरीज और उनके साथ आये तीमारदार से मारपीट की। इसके बाद देखते ही देखते मरीज की तरफ से वहां कई गाड़ियां भी पहुंची, जिसमें युवक सवार थे जिससे हंगामा खड़ा हो गया। इसके बाद मामला बढ़ता देख जिम्मेदार अधिकारियों ने बीच-बचाव करते हुए मरीज और तीमारदार से मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी। इस आश्वासन के बाद ही मामला शांत हुआ था।

इस घटना को लेकर केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह का कहना है कि संजीत सिंह पटेल अपने समर्थकों के साथ केजीएमयू पहुंचे थे। वह स्वयं को मेरठ विश्वविद्यालय का पूर्व अध्यक्ष बता रहे थे और केजीएमयू में बीते दिनों हुई मारपीट का वीडियो पेन ड्राइव में मांग कर रहे थे, लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने वह वीडियो सिर्फ जांच अधिकारियों को देने की बात कही। जिस पर वह भड़क गये। उनका कहना है कि हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने इस मामले में पहले ही जांच कमेटी बना दी थी, उन्होंने पुलिस जांच में सहयोग की बात भी कही है।