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कोविड काल में केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर हो रहा है ओवरलोडेड

-क्‍या नॉन कोविड इमरजेंसी के मरीजों का बोझ हल्‍का करेंगे दूसरे चिकित्‍सा संस्‍थान

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित ट्रॉमा सेंटर पर आजकल क्षमता से ज्यादा मरीजों का बोझ है जिस वजह से आपात स्थिति में आने वाले रोगियों की समुचित देखभाल में दिक्कत आ रही है यहां तक कि आने वाले मरीजों के लिए बेड तक की कमी हो रही है। इस बारे में ट्रॉमा सेंटर प्रशासन का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को हम विस्तार भी नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि केजीएमयू को कोविड हॉस्पिटल बनाये जाने के कारण संस्थान में अधिकतर बेड कोविड के मरीजों की देखभाल के लिए रखे गए हैं, ऐेसे में संक्रमण के कारण इन पर नॉन कोविड मरीज का इलाज नहीं किया जा सकता है।

प्रो. संदीप तिवारी

केजीएमयू के मीडिया सेल के फैकल्‍टी इंचार्ज प्रो संदीप तिवारी और को फैकेल्टी इन्चार्ज डॉ सुधीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि  चूंकि अन्य चिकित्सा संस्थान पूरी तरह से कोविड अस्पताल नहीं हैं, ऐसे में इन संस्थानों को केजीएमयू पर बोझ कम करने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के साथ अपनी नॉन कोविड इमरजेंसी सुविधाएं चलानी चाहिए।

प्रो संदीप व डॉ सुधीर ने कहा है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से ही कोविड-19 के निदान और उपचार में अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान कर रहा है और रोगी देखभाल के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा अब तक लगभग 18 लाख आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा चुके हैं, इसके अतिरिक्त अब तक 5000 से अधिक रोगियों का सफल इलाज कर उन्हें छुट्टी दी जा चुकी है। कोविड वैक्सीन की बात करें तो यहां 40000 डोज दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय के अनुसार केजीएमयू को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है इसलिए हमारे अधिकतर बेड कोविड रोगियों के लिए आरक्षित हैं इस समय हम 988 बिस्तरों की क्षमता वाला कोविड अस्पताल चला रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या राज्य में संचालित समस्त कोविड अस्पतालों में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के अब तक 200 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं। उन्होंने बताया इसके अतिरिक्त केजीएमयू द्वारा विभिन्न नॉन कोविड सेवाएं जैसे ट्रॉमा और आपातकालीन सर्जरी, प्रसूति सुविधाएं, कार्डियोलॉजी, डायलिसिस, नियोनाटोलॉजी और ऑन्कोलॉजी भी जारी है।