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लिवर प्रत्‍यारोपण की सफलता का अध्‍याय लिखने वालों को कराया पत्रकारों से रू-ब-रू

केजीएमयू में अब तक हुए चारों लिवर प्रत्‍यारोपण के मरीजों का स्‍वास्‍थ्‍य ठीक

सफलता से उत्‍साहित केजीएमयू के जिम्‍मेदारों ने कहा, कैडेवर दान के प्रति लोगों को करें जागरूक

लखनऊ। यहां स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में 14 मार्च, 2019 को शुरू हुआ लिवर ट्रांसप्‍लांट का सफर सफलता की चार पायदान चढ़ चुका है। इन चार ट्रांसप्‍लांट में एक कैडेवर से लिया गया लिवर का ट्रांसप्‍लांट शामिल है, जो 25 जून को हुआ था, चारों मरीज ठीक हैं और फॉलोअप में हैं। 25 जून को पहली बार ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त लिवर को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किये जाने वाले मेरठ निवासी 32 वर्षीय मरीज को आज शुक्रवार को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

 

केजीएमयू में लिवर ट्रांसप्‍लांट में अब तक मिली शत प्रतिशत सफलता के बारे में बताने के लिए संस्‍थान द्वारा आज एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस आयोजित की गयी थी, जिसमें संस्‍थान के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट सहित लिवर ट्रांसप्‍लांट में शामिल चिकित्‍सकों, पैरा मेडिकल कर्मियों तथा किसी भी रूप में ट्रांसप्‍लांट में भागीदारी निभाने वालों को भी शामिल किया गया। गैस्‍ट्रो सर्जरी के हेड डॉ अभिजीत चन्‍द्रा के नेतृत्‍व में की गयीं सभी सफल ट्रांसप्‍लांट सर्जरी से संस्‍थान उत्‍सा‍हित दिखा, और सभी ने पत्रकारों से भी अपील की कि लोगों में कैडेवर दान करने के प्रति जागरूकता फैलायें जिससे लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों का इंतजार खत्‍म हो, और उन्‍हें लिवर प्रत्‍यारोपित किया जा सके।

 

पत्रकार वार्ता में बताया गया कि ब्रेन डेड व्‍यक्ति का लिवर जिस मरीज में प्रत्‍यारोपित किया गया था, लिवर प्रत्यारोपण के बाद मरीज की तबियत मे काफी सुधार है मरीज अब सामान्य रुप से भोजन ले रहा है एवं हल्के व्यायाम करने में भी सक्षम है।

 

प्रो अभिजीत चन्‍द्रा ने बताया कि अबतक केजीएमयू में 4 लिवर प्रत्यारोपण किये जा चुके हैं, जिसमें 3 लिविंग डोनर द्वारा प्राप्त लिवर एवं 1 कैडेवर से प्राप्त लिवर का प्रत्यारोपण किया गया है। लिविंग डोनर से प्राप्त लिवर प्रत्यारोपण के पश्चात सभी मरीज एवं डोनर को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डिस्चार्ज किये गये सभी मरीज एवं उनके डोनर स्वस्थ है तथा नियमित रुप से फॉलोअप में आ रहे है। चौथा कैडेवर से प्रत्‍यारोपित किये गये मरीज को आज डिस्‍चार्ज किया जा रहा है।

 

 

उन्‍होंने बताया कि केजीएमयू के इतिहास में पहली बार ब्रेन डेड डोनर से प्राप्त लिवर का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया है। यह आधुनिक मेडिकल साइंस की जटिलतम प्रक्रिया है। इससे उत्‍तर प्रदेश के लिवर सिरोसिस से पीडित मरीजों के इलाज के लिए एक नया रास्ता खुला है, इस महत्वपर्ण सफलता के पीछे केजीएमयू कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट की प्रेरणा से विभिन्न विभागों ने आपसे में को-ऑर्डिनेट किया। इनमें मुख्य रूप से सर्जिकल गै्रस्ट्रोइण्ट्रोलाजी के प्रो अभिजीत चन्द्रा, डा विेवेक गुप्ता, डा प्रदीप जोशी, ऐनेस्थीसिया विभाग से प्रो अनीता मलिक, डा मोहम्मद परवेज एवं डा एहसान सिद्दीकी, ट्रान्सफ्यूजन मेडिसिन से डा तूलिका चन्द्रा, कार्डियोलाजी विभाग से प्रो वीएस नारायण, पल्मोनरी मेडिसिन से प्रो0 सूर्यकान्त एवं डा0 वेद प्रकाश, पैथोलॉजी विभाग से प्रो आशुतोष कुमार, माइक्रोबायोलॉजी विभाग से प्रो0 अमिता जैन, रेडियोलॉजी विभाग से डा नीरा कोहली, डा अनीत, डा मनोज एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन से डा अविनाश एवं डा अर्मीन शामिल रहे। मरीज की प्री ऑपरेटिव एवं पोस्ट ऑपरेटिव मॉनीटरिंग में मेडिकल गैस्ट्रोइण्ट्रोलॉजी के डा सुमित रूंगटा एवं मेडिसि‍न विभाग से डॉ हिमांशु रेड्डी एवं डा अजय का विशेष योगदान रहा। केजीएमयू से एमओयू के तहत मैक्स अस्पताल से डा शालीन अग्रवाल एवं वैभव नासा का योगदान रहा।

 

इसके अतिरिक्‍त मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा एसएन संखवार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ बीके ओझा, फॉरेंसिक विभाग में डा अनूप वर्मा, परमिंदर पनवार एवं पुलिस विभाग ने ब्रेन डेड डोनेशन में अहम भूमिका निभायी। इसके अलावा 50 से ज्यादा गैर-चिकित्सीय स्टाफ ने लगातार 48 घण्टे की ड्यूटी की जिसमें नन्द गोपाल, आईसीयू इन्चार्ज सिस्टर अनिता, ओटी सिस्टर इन्चार्ज कनक, डायटिशियन सुनीता सक्सेना एवं फीजियोथेरेपि‍स्ट रवींद्र कुमार एवं डॉ मधु पाठक शमिल रहे।

 

बताया गया कि यह प्रत्यारोपण केजीएमयू के लिए एक बडी सफलता है। गैस्ट्रोसर्जरी विभाग में लिवर सिरोसिस की समस्या से पीड़ित 10 मरीज लिवर प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत हैं, जिनका विभाग में प्रत्यारोपण से पूर्व होने वाली जांचें करायी जा रही हैं जाचें पूरी होने के बाद जिनका शीघ्र ही लिवर प्रत्यारोपण होना प्रस्तावित है।