सस्ती है, कोई साइडइफ़ेक्ट नहीं है और रोग को जड़ से ठीक कर देती है होम्योपैथी

 

 

सरकार चाहे तो महंगे इलाज का एकमात्र विकल्प हो सकता है होम्योपैथी से इलाज  

 

लखनऊ. लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एस0पी0 सिंह ने कहा है कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति भारत जैसे देश की जनस्वास्थ्य की आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है क्योंकि यह पद्धति अपेक्षाकृत कम खर्चीली, दुष्परिणामरहित तथा रोग को जड़ से ठीक करने वाली है।

 

कुलपति प्रो0 सिंह ने ये विचार विश्व होम्योपैथी दिवस (डा0 हैनीमैन जयन्ती) की पूर्व संध्या पर बाबा हास्पिटल, मटियारी, चिनहट, लखनऊ के प्रेक्षागृह में आयोजित जनस्वास्थ्य की जरूरत और होम्योपैथी विषय पर आयोजित संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की ये मीठी गोलियाँ बड़े से बड़े गम्भीर रोगों को ठीक करने में कारगर हैं, इसलिए इस पद्धतिको बढ़ावा दिया जाना समय की जरूरत है। इसके पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर एवं डा0 हैनीमैन के चित्र पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया।

 

केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के वरिष्ठ सदस्य डा0 अनुरूद्ध वर्मा ने कहा कि होम्योपैथी जनस्वास्थ्य के सरोकार से जुड़ी लोक कल्याण वाली पद्धति है भारत जैसे देश में जहाँ गरीबी, अशिक्षा और जनसंख्या की अधिकता है, एलोपैथी के महंगे इलाज के कारण 6 करोड़ लोग प्रति वर्ष गरीबी रेखा में शामिल हो जाते हैं। वहाँ पर सबको स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध कराने का एकमात्र विकल्प है होम्योपैथी। उन्होंने कहा कि सरकार होम्योपैथी के द्वारा कम व्यय में ज्यादा लोगों को स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध करा सकती है।

 

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्वकुलपति प्रो0 अवधराम ने इस अवसर पर कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की विशिष्टता और गुणों को आम जनता तक पहुँचाना जरूरी है, क्योंकि अभी गाँवों में होम्योपैथी के प्रति जागरूकता की कमी है। उन्होंने होम्योपैथी के बारे में व्याप्त तमाम भ्रांतियों के निराकरण के लिए जन-जागरण अभियान चलाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय जनसहयोग एवं बाल विकास संस्थान भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक डी0डी0 पाण्डेय ने कहा कि सरकार आयुष के माध्यम से जनता को स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है परन्तु अभी होम्योपैथी के विकास के लिए काफी कार्य किया जाना शेष है।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व निदेशक होम्योपैथी प्रो0 डा0 बी0एन0 सिंह ने कहा कि होम्योपैथिक को घर-घर पहुँचाना सरकार तथा चिकित्सकों का लक्ष्य होना चाहिए तथा इसे व्यवसाय की बजाए सेवा की तरह अपनाना चाहिए। संगोष्ठी में डा0 ए0एम0 सिंह ने होम्योपैथी को रोगों के उपचार में उपादेयता, डा0 पंकज श्रीवास्तव ने हड्डी एवं जोड़ों के रोगों के उपचार में होम्योपैथी की कारगरता, डा0 निशान्त श्रीवास्तव ने चर्म रोगों के उपचार में होम्योपैथी की भूमिका आदि पर चर्चा की। समारोह को उ0प्र0 होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के सदस्य डा0 फतेह बहादुर वर्मा, होम्योपैथी औषधि अनुसंधान संस्थान के पूर्व सहायक डा0 जे0पी0 सिंह, नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा0 एस0डी0 सिंह एवं डा0 राकेश कुमार बाजपेई आदि ने सम्बोधित किया। स्वागत डा0 राजीव अग्रवाल एवं आभार प्रदर्शन डा0 संजीव दीक्षित ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा0 स्फूर्ति सिंह ने किया।