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गर्भवती, स्‍तनपान कराने वाली व कमजोर इम्‍यूनिटी वाले स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों की नहीं लगेगी कोविड ड्यूटी

-चिकित्सालयों के कोविड एवं गैर कोविड क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने चिकित्सालयों के कोविड एवं गैर कोविड क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार गर्भवती महिला स्वास्थ्य कर्मी, स्तनपान कराने वाली महिला कर्मचारी तथा कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले स्वास्थ्य कर्मियों को अब कोविड ड्यूटी से छूट रहेगी, ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी अब गैर कोविड क्षेत्र में लगाई जाएगी।

प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद द्वारा 25 मई 2020 को जारी नए दिशा निर्देशों में कहा गया है कि अस्‍पताल के कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है साथ ही इनफेक्शन प्रीवेंशन एंड कंट्रोल प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए चिकित्सालय संक्रमण नियंत्रण समिति भी गठित की गई है, लेकिन इसके बावजूद ऐसी सूचनायें हैं कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो रहा है जिससे स्वास्थ्य कर्मियों एवं मरीजों के संक्रमित होने की आशंका है। चिकित्सालय संक्रमण नियंत्रण समिति इस प्रोटोकॉल का पालन हो इसे सुनिश्चित करे तथा चिकित्सालय में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट उपलब्ध कराये तथा यह सुनिश्चित करे कि सभी को संक्रमण संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है।

कर्मियों के लिए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि उन्‍हें कोविड-19 के सामान्य लक्षणों के होने पर उसकी सूचना देना अनिवार्य होगा। कर्मचारियों की नियमित थर्मल स्क्रीनिंग होगी, कोविड-19 रोगियों का प्रबंधन करने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मियों को चिकित्सीय पर्यवेक्षण में कीमोप्रोफाइलेक्सिस प्रदान किया जाएगा चिकित्सा कर्मियों के द्वारा पीपीई के उल्लंघन की त्वरित रिपोर्टिंग एवं फॉलोअप किया जाये। चिकित्सा कर्मी संक्रमण से बचने के लिए निरोधात्मक उपाय जैसे हाथों को धोना  या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग, श्वसन संबंधी शिष्टाचार का पालन करेंगे। वार्डों, ओपीडी, आईसीयू से निकलने के बाद स्वास्थ्य कर्मी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे तथा मास्क लगाएंगे जिससे वह दूसरों को संक्रमित ना कर सकें साथ ही खुद को भी संक्रमित होने से बचा सकें।

दिशा निर्देशों में कहा गया है कि चिकित्सा कर्मियों के द्वारा पीपीई प्रोटोकॉल के उल्लंघन की स्थिति में चिकित्सालय संक्रमण नियंत्रण समिति स्वास्थ्य कर्मियों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत करेगी जिसमें पहली श्रेणी में उच्च जोखिम एक्स्पोज़र वाले कर्मी होंगे तथा दूसरी श्रेणी में निम्न जोखिम एक्सपोजर वाले कर्मी होंगे। उच्च जोखिम एक्स्पोज़र वाले कर्मियों में कोरोना रोगियों को चिकित्सा सेवा प्रदान करने वाले स्वास्थ्य कर्मी या बिना अनुशंसित पीपीके या पीपीई का संभावित उल्लंघन कर कोविड-19 रोगी के नमूनों की जांच करने वाले प्रयोगशाला कर्मी, समुचित पीपीई का प्रयोग किए बिना एरोसॉल उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया संपादित करने वाले कर्मी, बिना मास्क, फेस शील्ड, चश्मे के कोविड-19 के रोगी से 1 मीटर की दूरी के अंदर 15 मिनट से अधिक समय तक संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मी तथा बिना मास्क, फेस शील्ड, चश्मे के दुर्घटनावश शारीरिक सम्‍पर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। ऐसे स्वास्थ्य कर्मियों को 14 दिनों के लिए होम क्वॉरेंटाइन किया जाएगा तथा आईसीएमआर के द्वारा निर्गत जांच प्रोटोकॉल के अंतर्गत जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाएगा और अगर रिपोर्ट नि‍गेटिव आती है तो 14 दिनों के होम क्वॉरेंटाइन अवधि पूर्ण करने के बाद स्वास्थ्य कर्मी वापस कार्य पर लौटेंगे।

दूसरी श्रेणी यानी निम्न जोखिम एक्सपोजर में ऐसे स्वास्थ्य कर्मी आएंगे जो उच्च जोखिम श्रेणी में नहीं आते हैं, इस श्रेणी के स्वास्थ्य कर्मियों को क्‍वारेंटाइन की कोई आवश्यकता नहीं है और वह अपना कार्य करते रहेंगे। बाद में स्वास्थ्य कर्मी में कोविड-19 से संबंधित लक्षण विकसित होने पर प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी जांच की जाएगी और जांच पॉजिटिव आने पर कोविड हॉस्पिटल में भर्ती किया जाएगा।

दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है की ऐसे सभी स्वास्थ्य कर्मी जो को भी ड्यूटी पर तैनात हैं, केवल उन्हीं को एक्टिव क्वॉरेंटाइन अनुमन्य होगा। 14 दिन बाद उनकी जांच कराई जाएगी और अगर जांच रिपोर्ट में नि‍गेटिव पाए जाते हैं तो उन्हें 2 दिन के लिए होम क्वॉरेंटाइन में भेजा जाएगा। इस दौरान वे सभी नियमों का पालन करेंगे और अगर जांच में पॉजिटिव पाए जाते हैं तो उन्हें कोविड अस्पताल में भेजा जाएगा अन्यथा की स्थिति में निम्न जोखिम जोखिम एक्स्पोज़र वाले स्वास्थ्य कर्मियों को 2 दिन के बाद पुनः नॉन कोविड चिकित्सालय में ड्यूटी पर भेजा जाएगा।