या तो डॉक्‍टरों को ‘इज्‍जत’ दे सरकार वरना करे सभी का इस्‍तीफा स्‍वीकार

सिर्फ आठ घंटे की ओपीडी के लिए हमें भी रख लें ढाई लाख रुपये महीने पर 

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश चिकित्‍सा सेवा संघ संवर्ग के चिकित्‍सा अधिकारी अपनी मांगों को पूरा करवाने को लेकर आर-पार का मन बना रहे हैं। हालांकि फि‍लहाल अभी ज्ञापन देने और काला फीता बांधकर विरोध करने की तारीख बतायी गयी हैं लेकिन साथ ही सरकार से अनुरोध की चाशनी में लिपटा विरोध भी जता दिया है और कहा है कि अगर सरकार हमारी जायज मांग नहीं पूरी कर सकती है तो हम सबके इस्‍तीफे स्‍वीकार कर लें और हमें भी संविदा वाले चिकित्‍सकों की तरह ढाई लाख रुपये वेतन पर संविदा पर नौकरी दे दी जाये।

 

पीएमएस एसोसिएशन उत्‍तर प्रदेश के चिकित्‍सकों ने अपनी पीड़ा को सरकार तक पहुंचाने के लिए सोमवार को एक पत्रकार वार्ता बुलायी। अध्‍यक्ष डॉ अशोक यादव ने कहा कि उत्‍तर प्रदेश जैसे 22 करोड़ से अधिक जनसंख्या व़ाले राज्य की दिन रात, सेवा करने वाले राजकीय चिकित्सकों के संवर्ग को अपमान, प्रताड़ना और गुलामी का शिकार बना दिया गया है। इनकी कर्तव्यनिष्ठा, कठोर परिश्रम में अर्जित योग्यता के लिए जब इन्‍हें प्रोत्साहन देना चाहिये तो संवर्ग के चिकित्सकों के मौलिक-अधिकारों तक को दर-किनार कर दिया गया है, यहां तक कि, सेवा में योगदान के समय-प्रवृत्त, अधिवर्षता-आयु पर सेवा निवृत्त होने जैसे मौलिक अधिकार और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के अधिकारों से भी राज्य सरकार ने उन्हें वंचित कर दिया है।

नये चिकित्‍सकों के न आने से संवर्ग के समाप्‍त होने का खतरा बढ़ रहा

उन्‍होंने कहा ऐसे में जहां दशकों से सेवारत चिकित्सक हताश, निराश और कुंठित हैं वहीं नये चिकित्सक नियमित राजकीय सेवा में आने से डर गये हैं और उन्हें नियमित राजकीय सेवा में लाने के सरकार सारे प्रयास विफल हो गये है। इसके चलते प्रान्तीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के मृत प्रायः होने का खतरा बहुत बढ़ गया है, जो लोक-कल्याणकारी राज्य के लिये सबसे बडी चिन्ता का विषय होना चाहिये और इसे रोकने के उपाय करना सभी की जिम्मेदारी है। बेहतर होगा समय रहते सरकार हमारी व्‍यथा को समझ ले अन्‍यथा मजबूर होकर हमें अपनी अगली रणनीति बनाने पर विचार करना पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि आंदोलन के पहले चरण में 24 सितम्‍बर को प्रदेश के सभी जिला मुख्‍यालयों पर मुख्‍यमंत्री को सम्‍बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा जायेगा। इसके बाद 30 सितम्‍बर तक अगर मांगें नहीं पूरी होती हैं तो 1 अक्‍टूबर को हम लोग काली पट्टी बांधकर विरोध जतायेंगे तथा आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जायेगी।

मानक से एक चौथाई कम हैं चिकित्‍सा सेवा से जुड़े लोग

महामंत्री डॉ अमित सिंह ने कहा कि गैरतकनीकी आधारों पर आधारित नीतियों के चलते पटरी से उतरी चिकित्सा सेवाओ की दुर्व्‍यवस्‍था के लिए चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि विभाग में सरकार के ही तय किये गये मानक के सापेक्ष मात्र एक चौथाई मैन पावर है। दोहरी-तिहरी अव्यावहारिक व मनमानी व्यवस्थाओं के चलते चिकित्सा सेवायें, अराजकता और दिशाहीनता की तरफ बढ़ रही हैं। सन् अस्सी के दशक में सरकार द्वारा स्वयं निर्धारित किये गये जन-स्वास्थ्य के मानक, आज सन् 2018 तक भी प्राप्त नही किये जा सके हैं- इस वास्तविकता को न केवल दबाया व छुपाया जा रहा है अपितु इस बावत आम जनता औैर न्यायालय तक को अंधरे में रखा जा रहा हैं। कई गुना काम के बोझ में दबे स्थाई ढांचे के राजकीय चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों को कुछ निहित स्वार्थो के चलते षड्यंत्र-पूर्वक अव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं कमी के लिए जिम्मेदार ठहरा कर निशाना बनाया जा रहा है और दोषपूर्ण-नीतियों के बनाने वालों को जवाबदेही से बचाया जा रहा है।

 

ऐसे हलात के चलते चिकित्सा स्वास्थ्य जैसी सम्वेदनशील सेवाओं में असम्वेदनशीलता से क्षुब्ध होकर अपने मौलिक आधार और सम्मान प्राप्त करने के लिए और आम जनता, सरकार और न्यायालय सहित सभी सम्बद्ध पक्षों के सक्रिय हस्तक्षेप और ध्यानाकर्षण के लिए चिकित्सकों के संवर्ग ने आन्दोलन की राह पर जाने फैसला किया है।

 

डॉ अशोक यादव ने बताया कि 9 सितम्बर को सम्पन्न संगठन की केन्द्रीय कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से लिये गये फैसले के तहत आगामी 24 सितम्बर, को सभी जिला शाखाओं द्वारा कार्य-दशाओं तथा चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए अविलम्ब हस्तक्षेप करने के आशय का ज्ञापन मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जायेगा और आगामी 1 अक्टूबर को राज्य भर के चिकित्सक उपेक्षा और सम्वेदनहीनता के विरूद्ध अपना आक्रोश व्यक्त करने लिये काली पट्टी बांधकर सेवायें प्रदान करेंगे।

 

डॉ अमित सिंह ने बताया कि बैठक में यह प्रमुखता से प्रकट हुआ कि सेवा- सम्बन्धी प्रकरणों तथा चिकित्सा सेवाओं के प्रभावी प्रदायन के सम्बन्ध में हमारें संगठन द्वारा लगातार शासन के सभी सक्षम स्तरों पर पर्याप्त ध्यानाकर्षण किया जाता रहा है। लेकिन, प्रभावी कार्यवाई के नाम पर प्रगति, अत्यन्त असन्तोष-जनक, पीड़ादायक और निराशाजनक है। प्रोन्नति सहित अन्य लम्बित मामलों को लेकर तथा सातवें वेतन आयोग के क्रम में प्रैक्टिस बन्दी भत्ते सहित अन्य भत्तों के अभी तक प्रदान नहीं किये जाने से पूरा संवर्ग आक्रोशित है। उन्होनें कहा कि संवर्ग के चिकित्सकों से विकल्प लिये बिना, अधिवर्षता-आयु मनमानें ढंग से बढ़ा दिये जाने तथा पात्र- चिकित्सकों को स्वैच्छिक सेवा-निवृत्ति का लाभ नहीं दिया जाना और उन्हें केवल गुलाम बनाकर छोड़ दिया जाना किसी हालत में सहन नहीं किया जा सकता है।

 

उन्होनें आगे कहा कि, दोहरी व्यवस्था के तहत चिकित्सा इकाइयों में रूपये ढाई लाख तक, प्रतिमाह वेतन पर चिकित्सक बिडिंग के माध्यम से मात्र आठ घण्टें के लिये नियुक्त किये जा रहे है और उनसे मेडिकोंलीगल पोस्ट-मार्टम इत्यादि कार्य नही लिये जाने का नियम भी प्रख्यापित किया गया है, जबकि लोक सेवा आयोग से चयनित नवनियुक्त चिकित्साधिकारियों को मात्र रूपये 60 से 70 हजार प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाता है और उनसे दिन रात मेडिकोलीगल कार्य सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के सम्पादन में कार्य लिये जाते है। यदि राज्य की चिकित्सा सेवायें इसी प्रकार दोहरी व्यवस्था के तहत चलाया जाना जनहित में है तो सभी सेवारत-सदस्य चिकित्सक, सेवा मुक्त होकर उक्त संविदा नियमों के तहत पारितोषिक स्वरूप रूपये ढाई लाख प्रतिमाह के वेतन पर कार्य करने के लिये तैयार है। सम्वाददाता सम्मेलन में अध्यक्ष, महामंत्री के अलावा उपाध्यक्ष (मुख्यालय)  आशुतोष कुमार दुबे, उपाध्यक्ष (महिला) डॉ0 निरूपमा सिंह, उपाध्यक्ष डॉ भावतोष शंखधर, उपाध्यक्ष डॉ विकासेन्दु अग्रवाल, अपर महासचिव, डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी, संगठन सचिव डॉ सचिन वैश्य, जोनल सचिव, डॉ जावेद अहमद खान, राज्य निर्वाचन अधिकारी, डॉ राजीव बंसवाल, लखनऊ शाखा के अध्यक्ष, डॉ डीके सिंह, लखनऊ शाखा के सचिव डॉ अनूप बाजपेई मौजूद थे।