आत्‍महत्‍या पर लगाम के लिए विचारों की अभिव्यक्ति की स्‍वतंत्रता जरूरी

-विश्‍व आत्‍महत्‍या रोकथाम दिवस पर डॉ कुमुद श्रीवास्‍तव का लेख

डॉ कुमुद श्रीवास्‍तव

आत्महत्या के विषय और वैश्विक स्तर पर इन त्रासदियों को रोकने के लिए किए जाने वाले कार्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितंबर को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (आईएएसपी) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ के साथ मिलकर पहले विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की मेजबानी की। तब से दुनिया भर के कई देश इस उपक्रम में शामिल हो गये, और लगभग 40 देशों ने इस अवसर को चिन्हित करने के लिए जागरूकता सम्बंधित कार्यक्रम आयोजित किए।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार, हर साल 800,00 के करीब लोग मारे जाते हैं। आत्महत्या के कारण, हर 40 सेकंड में 1 मौत हो जाती है। वर्तमान समय में,स्थितियां और भी गंभीर होगई हैं क्योंकि ऐसी वैश्विक महामारी फैली हुई है कि चारों तरफ भय, निराशा, अवसाद, अकेलापन, चिंता, तनाव, नकारात्मकता व्याप्त है, अत: ऐसे में आत्महत्या की रोकथाम पर ध्यान देना अनिवार्य और प्रासंगिक हो जाता है।

आत्महत्या के तथ्य:

1)100,000 में से 1 बच्चा 10 से 14 साल की उम्र में हर साल आत्महत्या करते हैं।

2) समलैंगिकऔर उभयलिंगी बच्चे अन्य सामान्य बच्चो की अपेक्षा 3 गुना समय आत्महत्या का प्रयास करते हैं।

3) बुजुर्गों में आत्महत्या की दर उन लोगों के लिए सबसे अधिक है जो तलाकशुदा या विधवा हैं।

4) 20-24 के बीच की आयु वाले 100,000 युवा वयस्कों में 12.7 युवा प्रत्येक वर्ष आत्महत्या करते हैं।

5) पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आत्महत्या के विचार आने की अधिक संभावना है।

6) महिलाओं में आत्महत्या का सबसे आम तरीका जहर का सेवन करना है।

7)अनुमानत: 25  प्रयासों के बाद आत्महत्या का एक प्रयास सफल हो जाता है।

8) 80 फीसदी से 90 फीसदी लोग जो अवसाद से ग्रसित हैं और  इलाज कराते हैं उनका इलाज थेरेपी या दवा द्वारा सफलतापूर्वक किया जाता है।

9) एक अध्ययन में,41 प्रतिशत ट्रांसजेंडर वयस्कों ने कहा कि उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था। इसी अध्ययन में पाया गया कि शारीरिक हमले का शिकार हुए 61 फीसदी ट्रांसजेंडर लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया था।

10) आत्महत्या मृत्यु के प्रमुख 20 कारणों मे से एक है।

ऐसे कुछ उपाय और क्रिया-कलापों को अपनाया जाये।

महत्वपूर्ण बातें

1)   हम सब आत्महत्या की चेतावनी के संकेतों को जाने और पहचाने।

2)   हम सब यह सीखे कि ऐसे संकेत मिले तो क्या कहा जाये और क्या किया जाये।

3)   हम सब मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझें और जीवन में इसे प्राथमिकता दें, और अपनी मनोवैज्ञानिक प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करें।

4)   हम सब स्वीकारें कि प्रयास करने से सफलता अवश्य मिलेगी और नुकसान की भरपाई सम्भव है।

आत्महत्या बहुत वेदना पूर्ण और कायरता पूर्ण कृत्य है।