40 वर्ष से ऊपर का हर तीसरा व्‍यक्ति कमर और घुटने के दर्द का शिकार

भारत में बने इम्‍प्‍लांट सस्‍ते और गुणवत्‍तापूर्ण भी

लखनऊ। व्यायाम की कमी व आधुनिक जीवन शैली ने हड्डी से सम्बन्धित परेशानियों को बढ़ाया है। इसमे सबसे ज्यादा प्रमुख समस्या घुटने व कूल्हे की है। देश में चालीस साल से अधिक उम्र वाला हर तीसरा व्यक्ति घुटने व कूल्हे के दर्द से ग्रसित है। यह बात शनिवार को होटल हिल्टन में आर्थोप्लास्टी पर आयोजित कार्यशाला में हड्डी रोग विषेशज्ञ डा॰ आर॰ पी॰ सिंह ने कही। दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी लखनऊ कौशल राज शर्मा,  मेयो मेडिकल सेन्टर की डायरेक्टर डा॰ मधुलिका सिंह, डा॰ एन॰एस॰ लॉर्ड ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित करके किया।

 

गोमती नगर स्थित मेयो मेडिकल सेन्टर के तत्वावधान में आयोजित ’द्वितीय लखनऊ आर्थोप्लास्टी कोर्स 2018‘ की दो दिवसीय कार्यशाला में हड्डी से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हुए मेयो मेडिकल सेन्टर के ज्वाइंट रीप्लेसमेंट विषेशज्ञ डा॰ आर॰पी॰ सिंह ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में आयी आधुनिकतम तकनीक से होने वाले प्रत्यारोपण से सर्जरी के तीसरे दिन से ही मरीज को उसके पैरों पर खड़ा कर दिया जाता है और एक सप्ताह में वह चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है।

 

कार्यशाला में आये देश के जाने माने प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा॰ एन॰एस॰ लॉर्ड ने कहा कि प्रत्यारोपण करने से पहले इम्प्लांट का चयन महत्वपूर्ण है। मरीज की आयु के अनुपात में यह चयन करना जरूरी है कि इम्प्लांट कितने दिन तक चलेगा। साथ ही अब देश में ही तैयार बहुत से ऐसे इम्प्लांट हैं जो सस्ते होने के साथ ही गुणवत्तापूर्ण भी है।

 

घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ मुम्बई के डा॰ हरीश भिंडे ने प्रत्यारोपण सर्जरी में होने पर संक्रमण (इन्‍फैक्‍शन) के खतरे से बचाव पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में हैदराबाद के डा॰ कृष्‍ण किरन, डा॰ रमनीक महाजन समेत अन्य विशेषज्ञों ने प्रत्यारोपण की विभिन्न तकनीक पर प्रकाश डाला।

 

कार्यशाला के दूसरे सत्र में गोमती नगर स्थित मेयो मेडिकल सेन्टर में कूल्हे व घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की गयी। सर्जरी का सजीव प्रसारण होटल हिल्टन में किया गया। यहां उपस्थित देश विदेश के अस्थि रोग विशेषज्ञों ने सवाल-जवाब के माघ्यम में सर्जरी की तकनीक को बारीकी से देखा। कार्यशाला के अंतिम दिन 2 सितम्बर को सफेदाबाद स्थित मेयो मेडिकल कालेज में हैण्डस ऑन  ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें प्रदेश भर के हड्डी रोग विशेषज्ञों को कैडबर पर प्रत्यारोपण की तकनीकी जानकारी दी जाएगी।