सरकार की वादाखिलाफी से नाराज कर्मचारी अब चलेंगे बड़े आंदोलन की राह!

-5 जनवरी को राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद की हाईकमान की बैठक में तय होगी रणनीति

-माध्‍यमिक शिक्षणेतर संघ भी अब संयुक्‍त परिषद के परिवार में हुआ शामिल

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊविभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों पर मुख्य सचिव द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद दिसंबर माह में निर्णय न हो पाने, कैशलेश चिकित्सा, महंगाई भत्ता बहाल किये जाने, अन्य समाप्त किये गए भत्तों को पुनः शुरू किए जाने, पुरानी पेंशन बहाली, संविदा/आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति, ठेकेदारी व्यवस्था, निजीकरण पर रोक आदि मांगों पर कार्यवाही न होते देख राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आंदोलन की रणनीति तैयार करने हेतु 5 जनवरी को हाई कमान की बैठक बुलाई है।

परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत की अध्यक्षता में आज प्रदेश के लगभग 30,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघ ‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेतर संघ’ ने परिषद से संबद्धता ली। संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार विश्वकर्मा, महामंत्री शिव बहादुर यादव , उपाध्यक्ष विजय कुमार द्विवेदी, कोषाध्यक्ष शिव कैलाश सोनी आज कार्यालय में उपस्थित हुए और परिषद के नेतृत्व में संघर्ष करने का आश्वासन दिया। परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत ने कहा कि माध्यमिक शिक्षणेतर संघ अब परिषद के परिवार का हिस्सा है, संघ के सदस्यों के हितों के लिए परिषद संघर्ष करेगी।

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि आज नववर्ष के उपलक्ष्य में परिषद से सम्बद्ध संगठनों के अध्यक्ष/महामंत्री व परिषद व उपस्थित पदाधिकारियों ने सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं । बैठक में परिषद के संगठन प्रमुख के के सचान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश मिश्रा, परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा, उपाध्यक्ष सुनील यादव, उपाध्यक्ष धनंजय तिवारी, सर्वेश पाटिल, प्रवक्ता अशोक कुमार,  सचिव डॉ पी के सिंह, मीडिया प्रभारी सुनील यादव,मंडलीय मंत्री राजेश कुमार, अजय पाण्डेय, सुभाष श्रीवास्तव जिला अध्यक्ष , कमल श्रीवास्तव,आदि उपस्थित थे।

बैठक में नेताओ ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश का कर्मचारी विशेषतः चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग कोरोना वायरस से लड़ने में लगा हुआ है, प्रदेश के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बगैर कोविड-19 में जनता के हितों हेतु कार्य कर रहे हैं, बचाव व उसके उपचार आदि में कर्मचारियों द्वारा लगभग सफलता प्राप्त कर ली गयी है, ऐसे समय में कर्मचारियों की मांगों को पूरा कर पारितोषिक दिया जाना चाहिए ।

मुख्य सचिव की बैठक दिनांक 18 नवम्बर 2020 को मुख्य सचिव ने वेतन विसंगति दिसंबर माह में दूर करने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे , लेकिन दिसंबर समाप्त हो जाने पर भी कार्यवाही ना होने से प्रदेश के सभी कर्मचारी अत्यंत आक्रोशित है, ऐसा प्रतीत होता है कि शासन द्वारा कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसलिये अब परिषद ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने का निर्णय लेते हुए बैठक आहूत की है।

श्री मिश्रा ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से अपील की कि कर्मचारियों के मामले का संज्ञान लेकर मांगों पर निर्णय कराएं, जिससे प्रदेश में सरकार और कर्मचारियों के मध्य सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे।